कोरोना ने मानव को नहीं मानवता को परास्त किया है

शहर एक एक सांस के लिए मोहताज था, जब एक क्षण की सांस भी मौत को जिंदगी से दूर धकेलने के लिए बहुत थी तब इन नेताओं के लिए तीन घंटे का फोटो सेशन भी कम पड़ रहा था। त्राहिमाम के इस काल में संवेदनहीनता की पराकाष्ठा यहीं तक सीमित नहीं रही। कभी सरकारी अस्पताल से वैक्सीन चोरी होने की खबर आई तो कभी कोरोना के इलाज में प्रयुक्त होने वाली दवाई रेमेडेवेसिर चोरी होने की। कभी आम लोगों द्वारा ऑक्सीजन सिलिंडर लूटने की खबरें आईं तो कभी प्रशासन और सरकार की नाक के नीचे 750 से 1000 रूपए का इंजेक्शन 18000 तक में बिका। पेरासिटामोल जैसी गोली भी इस महामारी के दौर में 100 रूपए में बेची गईं। हालात ये हो गए कि विटामिन सी की गोली से लेकर नींबू तक के दाम थोक में वसूले गए।