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संपादकीय

लालू के लाल क्या कर पाएंगे बिहार में कमाल ?

November 28, 2015 07:55 PM

सुखविंदर सिंह
बिहार में महागठबंधन ने महा जीत दर्ज कर भाजपा के कमल की जड़े उखाड़ दी , इससे एक बात तो साफ़ हैं कि भाजपा जमीनी हकीकत से कोसो दूर थी जिसको बिहार की जनता ने आईना दिखा दिया। वैसे देखा जाए तो भाजपा ने तैयारी तो पूरी कर रखी थी भाजपा के पास अच्छे ब्रह्मास्त्र भी थे पर भाजपा इस ब्रह्मास्त्रों का इस्तेमाल ढंग से नहीं कर पायी और भाजपा की तैयारी धरी धरी रह गयी। खैर जो होना था वह हो गया अब इसे बदला नहीं जा सकता। बिहार चुनाव के हीरो रहे लालू प्रसाद यादव जिन्होंने यह साबित कर दिया की अगर वह अपनी आई पर आ जाए तो उनके लिए कोई भी काम मुश्किल नहीं होगा। इस बार लालू के दोनों बेटों ने भी चुनाव में अपना जलवा बिखेरा और 
लालू यादव के दोनों बेटे बिहार में मंत्री बन गए। तेजस्वी तो उपमुख्यमंत्री हैं... जाहिर है लालू यादव ने आखिरकार अपने राजनैतिक वारिस की घोषणा कर दी है।अगर हम लालू के दोनों बेटो की बात करे तो दिमाग में एक ही सवाल आता है कि लालू के लाल क्या कर पाएंगे बिहार में कमाल ? यह सवाल दिमाग में आना भी लाजमी है क्योकि दोनों का राजनीति के क्षेत्र में अनुभव कम हैं , दोनों कम पढ़े लिखे हैं।  लालू के लाल तेजस्वी 9वीं पास हैं पर वह फर्राटे से अंग्रेजी बोलते हैं। उनका संस्कारी होना भी उस वक्त दिखा जब उन्होंने मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के पांव शपथ ग्रहण समारोह के मंच पर छुए। यहां पर भी तेज प्रताप चूक गए। तेज प्रताप शायद घबराहट में या फिर उत्तेजना में शपथ के दौरान कुछ शब्दों का उच्चारण सही ढंग से नहीं कर पाए और राज्यपाल को उन्हें दुबारा शपथ लेने के लिए कहना पड़ा। लालू यादव को कैसा लगा होगा पता, नहीं मगर बहुतों को अच्छा नहीं लगा। कई लोग मानते हैं कि लालू यादव की पारिवारिक मजबूरी थी कि तेज प्रताप को मंत्री बनाना पड़ा। तेजस्वी उप मुख्यमंत्री के अलावा सड़क और भवन निर्माण मंत्री होंगे तो तेज प्रताप के पास स्वास्थ्य मंत्रालय होगा।   वहीं, उनके बडे़ बेटे तेज प्रताप यादव के पास स्वास्थ्य के अलावा दो और मंत्रालयों का कामकाज है। अगर लोग यह सोच रहे हैं कि लालू के लाल अपने पिता और माता रावडी देवी  की तरह किसी न किसी तरीके से राजनीति में सफल हो जाएंगे तो लोगों की सोच गलत हैं। आज कल की राजनीति पहले जैसी नहीं रही जितना बदलाव देश में नहीं हुआ होगा उतना बदलाब देश की राजनीति में चूका हैं।  राजनीति के जानकारों की माने तो राजनीति पहले से काफी वल्गर हो गयी हैं और अब राजनीति की परिभाषा भी काफी हद तक बदल चुकी हैं। राजनीति में वही लोग कामयाब हैं जिन्हें चापलूसी, झूठे वायदे  और रायी का पहाड़ बनाना आता हों। अब देखना यह हैं कि लालू के लाल कब और कैसे करते हैं कमाल।

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