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संपादकीय

देश में बेखौफ क्यों हैं तस्कर?

August 27, 2016 02:56 PM

आर एल गोयल
नशा तस्करी के मामले में पंजाब नंबर एक पर है। पिछले साढे तीन साल के आंकड़ों के मुताबिक देश में नशों एवं हथियारों की तस्करी करने वाले 96,771 तस्कर पकड़े गए जबकि अकेले पंजाब में पकड़े गए तस्करों की संख्या 36,318 है यानि देश में पकड़े गए तस्करों का 37 प्रतिशत अकेले पंजाब में है। केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी तथ्यों अनुसार पजाब में एक जनवरी 2013 से 30 जून 2016 तक 16.04 क्विंटल हैरोइन और 19.80 क्विंटल अफीम पकड़ी गई। पंजाब पुलिस औसतन 28 तस्कर प्रतिदिन पकड़ती है।     

पंजाब के नवनियुक्त गर्वनर वी पी सिंह बदनौर ने शपथ ग्रहण करते ही पंजाब में नशों की मौजूदा समस्या को उठाया और इस प्रांत को नशामुक्त करने पर जोर दिया।  बेशक महाराष्ट्र में इतनी अधिक मौतें हुई लेकिन याद रखना होगा कि महाराष्ट्र के मुकाबले पंजाब बहुत छोटा राज्य है।


वर्ष 2013 में पंजाब में 11265 लोगों को नशों व हथियारों की तस्करी करने के आरोप में पकड़ा गया। वर्ष 2014 में 10141 और चालू वित्त वर्ष के दौरान 10233 लोगों पर पुलिस केस दर्ज किए गए।
वर्ष 2015 में देशभर में से सबसे ज्यादा 6.01 क्विंटल हैरोइन व 4.20 क्विंटल अफीम पंजाब में से ही पकड़ी गई थी। सरकार व पुलिस के आला अधिकारी हालांकि इसका कारण पंजाब की अंतर्राष्ट्रीय सीमा के साथ होना कहते हैं जबकि सच्चाई यह है कि नशे व हथियारों के तस्करों को कई पुलिस अधिकारियों व राजनेताओं का संरक्षण प्राप्त होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। यही कारण है कि पुलिस ज्यादा शोर पड़ने पर अपनी तरफ से खानापूर्ति हेतु बीस—पचास केस दर्ज कर लेती है। ऐसे केसों में से अक्सर नशेड़ी या नशे की छोटी —छोटी आपूर्ति करने वाले ही होते हैं। इतने सालों में पुलिस अधिकारी छोटी—मोटी मुर्गियों को ही हलाल करने में व्यस्त हैं, बड़े—बड़े तस्करों के साथ चूंकि पुलिस अधिकारियों के उठने—बैठने व खाने—पीने की चर्चा भी सामने आती रहती है अत: उन्हीं की सूचना पर पुलिस ऐसे लोगों को पकड़ती है जो बड़े तस्करों के लिए परेशानी खड़ी करने वाले होते हैं। एक तरफ वे लोग उन तस्करों को खुश करके लाभ लेते हैं और दूसरी तरफ पुलिस विभाग में अपनी अच्छी कारगुजारी कर तरक्की व मैडल प्राप्त करते हैं। इस बात की संभावना भी कम नहीं कि सरकार द्वारा तस्करों पर नकेल कसने के आदेशों के बाद पुलिस कर्मचारी व अधिकारी अपनी निजी रंजिशें निकालने की खातिर अपने दुश्मनों को तस्करी करने के आरोप में पकड़ रहे हों। जैसे कि आंतकवाद के दिनों में बड़े पैमाने पर देखने में आया था। अनेकों ऐसे पुलिसकर्मी व अधिकारी उन केसों को अभी भी भुगत रहे हैं।
पंजाब के नवनियुक्त गर्वनर वी पी सिंह बदनौर ने शपथ ग्रहण करते ही पंजाब में नशों की मौजूदा समस्या को उठाया और इस प्रांत को नशामुक्त करने पर जोर दिया। हालांकि केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाली मौत के मामलों में पंजाब का नंबर 12वां है। सबसे अधिक मोतें महाराष्ट्र में दिखाई गई है। सन् 2014 में महाराष्ट्र में नशीले पदार्थो से 1372 लोगों की मौत हुई। हरियाणा में यह आंकड़ा 86 व पंजाब में 38 है। इस रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में नशीले पदार्थों से होने वाली मौतों में इजाफा होने की बजाए इसमें कमी आई है। वर्ष 2012 में नशे से 91, वर्ष 2013 के दौरान 66 और वर्ष 2014 में ये आंकड़ा 38 है। पंजाब सरकार का तर्क है कि महाराष्ट्र में इतनी अधिक मौतें हुई लेकिन कोई आवाज नहीं और पंजाब में 38 मौतों ने भूचाल ला दिया। याद रखना होगा कि महाराष्ट्र के मुकाबले पंजाब बहुत छोटा राज्य है। पंजाब में होने वाली मौतें अधिकतर कालेज जाने वाले छात्रों की है। दरअसल स्कूली पढाई के बाद कालेज में प्रवेश करने वाले छात्रों को एक तो नशा आसानी से उपलब्ध हो जाता है। और दूसरा दिशा विहीन युवा पीढी इस में ही आनंद ढूंढने लगती है।
आज सबसे पहली जरूरत विद्यालयों, महाविद्यालयों में नशे की आपूर्ति पर रोकथाम लगाई जाए। इस काम के लिए जहां पुलिस अपने फर्ज को सर्वोपरि मान कर कालेज प्रशासन की मदद ले सकती है वहीं अपना खुफिया तंत्र इस्तेमाल करके तस्करी के इस तन्त्र को तहस—नहस कर सकती है।

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