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संपादकीय

यह तो वित्तीय आपातकाल है?

November 15, 2016 08:11 PM

चन्द्र शर्मा

पांच सौ और हजार रु के नोटों का प्रचलन अचानक बंद करने के मोदी सरकार के फैसले से पूरे देश में अफरा-तफरी फैली हुई है। ऐसा लग रहा है जैसे देश में वित्तीय आपातकाल है। पिछले मंगलवार की आधी रात से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में 500 और 1000 रु के नोटों का प्रचलन बंद करने की घोषणा की थी। राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने देशवासियों को आश्वस्त किया था कि उनकी इस कार्रवाई से जनमानस को कोई असुविधा नहीं होगी। यह कार्रवाई काले धन का खात्मा करने की दिशा में ठोस कदम माना जा रहा था। मगर एक सप्ताह बाद मोदी सरकार के इस कदम ने आम आदमी का दम निकाल दिया है। सुबह से शाम तक बेंकों और एटीएम (ऑटोमैटिक टेलर मषीन) पर कतार में खडे होते-होते अब तक देश में चार वृद्धों की मौत हो चुकी है। समय पर उपचार नहीं होने और अस्पतालों द्वारा 500 और 1000 रु के नोट लेने से मना करने पर अब तक 16 मासूम बेमौत मारे जा चुके है। लोगों को अपने ही जमाखाते से पैसे निकालने के लिए तरसना पड रहा है। सरकार ने एटीएम से एक दिन में एक कार्ड से ज्यादा से ज्यादा 2000 रु और बैंक में जमाखाते से सप्ताह में अधिततम 10,000 रु की सीमा बांध रखी है। रविवार को एटीएम से एक दिन में एक बारगी 25,00 रु की सीमा बढाई गई। बैकों से सप्ताह में पैसा निकालने की सीमा 25,000 रु कर दी गई है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर मुफ्त टोल टैक्स की सुविधा 18 नवंबर तक बढा दी गई है। अस्पतालों, पेट्रोल पंपों और टोल नाकाओं को दस दिन और प्रतिबंधित 500 और 1000 रु मुद्रा को स्वीकार करने को कहा गया है। यह बात दीगर है कि अधिकतर अस्पताल और पेट्रोल पंप प्रतिबंधित नोट लेने से साफ मुकर रहे हैं। इन बातों से साफ है कि देश में स्थिति कितनी गंभीर है। यह स्थिति है 2015 में भारी कर्ज में डूबे यूनान से भी बदतर है। तब यूनान के पास मुद्रा का संकट था। भारत में इस समय मुद्रा प्रबंधन का संकट है। 500 रु और 1000 रु के विमुद्रीकरण से उपजी स्थिति से साफ लगता है कि सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए वित्तीय संस्थाओं को तैयार् नहीं किया था। देश में इस समय 2 लाख से ज्यादा एटीएम हैं और लोग-बाग इनका कहीं ज्यादा उपयोग करते हैं। लगभग हर एटीएम में 5 सौ और 1000 हजार रु के नोट रखे जाते है ताकि एटीएम में ज्यादा से ज्यादा नकदी रखी जा सके। एटीएम में 100 रु के ज्यादा से ज्यादा दस लाख नोट रखने की क्षमता है और अगर एक कार्ड से अधिकतम 2500 भी निकाले जाएं, तो भी बमुश्किल 400 कस्टमर्स की मांग पूरी की जा सकती है। और 2000 एव 500 रु के नए नोट आने से स्थिति और भी जटिल बनती दिख रही है। मौजूदा एटीएम इन नोटों के छोटे आकार के लिए बने ही नहीं है। नतीजतन, बैंको को अपने सभी एटीएम बदलने पडेंगे। इन सब बातों से साफ है कि देश मौजूदा विमुद्रीकरण के लिए तैयार नहीं था। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं अर्थशास्त्री डाक्टर सुब्रमनयम स्वामी का भी यही कथन है कि वित्त मंत्रालय विमुद्रीकरण के लिए जरा भी तैयार नहीं था। आम तौर पर विमुद्रीकरण से लोगों के लेन-देन और जमाखातों पर अकुंश नहीं लगाया जाता। देष में इससे पहले भी विमुद्रीकरण की कार्रवाई की गई थी मगर इससे लोगों को कोई परेशानी नहीं हुई थी। निसंदेह, मौजूदा स्थिति पहले से काफी अलग है। अब देश प्लास्टिक मनी की तरफ बढ रहा है और जैसे-जैसे इसका प्रचलन बढेगा, विमुद्रीकरण का ज्यादा असर नहीं होगा। मगर अभी मात्र दो फीसदी लोग प्लास्टिक मनी का उपयोग करते है। अमेरिका और विकसित देशों में 98 फीसदी लोग इसका उपयोग करते है। बहरहाल, मोदी सरकार के विमुद्रीकरण से काला धन का खात्मा तो हुआ नहीं पर आम आदमी को भारी परेशानी हो रही है।

श्री चन्द्र शर्मा जाने माने वरिष्ठ पत्रकार हैं

 
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