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कविताएँ

अक्स

February 08, 2017 09:38 PM

— शिखा शर्मा

तेरा अक्स हूं मैं
तू ही है मुझमें
तेरा मिलना था किस्मत का लेखा
तुझसे ही जुडी है जीवन की रेखा
डगर सूनी
आँखें नम
दिल में दबे थे हजारों गम
टकराना तो सिर्फ बहाना था
कुदरत ने हमें मिलाना था
मांगी हुई दुआएं
बहुत काम आई
पनाह मिली है
अब जो तेरी
रौनक से भरी जिंदगी मेरी
तू मिला
छंट गया तन्हाई का अँधेरा
खुशनुमा हुआ मेरा
हर शाम-सवेरा
जीउं अब कुछ इस तरह
कि
तेरा फ़िक्र
तेरा जिक्र
तेरा ही शुक्र मनाऊं
रूह की हसरत में सरगम की तरह
तेरा ही नाम गुनगुनाऊं
जीवन तेरे लिए
प्राण भी तुझ पर
करूँ न्यौछावर
प्यार का अहसास भी तू
रूह की आस है तू
नवजीवन की शुरूआत
अब तेरी दहलीज पर
अंतिम श्वास भी अब तेरी दहलीज पर
तेरा ही अक्स हूं मैं
तू ही है मुझ मैं

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