ENGLISH HINDI Saturday, January 25, 2020
Follow us on
 
ताज़ा ख़बरें
द लास्ट बेंचर्स "और अमृत कैंसर फाउंडेशन ने महिलाओं के लिए लगाया मैमोग्राफी, डेकसा और डेंटल जांच शिविर26 को वाईस ऑफ़ इंडिया नागरिकता संशोधन एक्ट के समर्थन पर विशाल पद यात्रा कैंसर की चपेट में गांव बडबर, 6 से अधिक लोगों की हो चुकी मौतवाल्मीकि समाज ने नगर निगम कमिश्नर और पूर्व मेयर राजेश कालिया का पुतला फूंकाअवैध माइनिंग के खिलाफ हरकत में आया प्रशासन, मुबारिकपुर घग्गर नदी पर बनाए अवैध पुल को तोड़ागणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में आयकर विभाग ने लगाया रक्तदान शिविर, 108 रक्त यूनिट एकत्रितजुडो चैंपियनशिप में आर्यन ने जीता गोल्ड, प्रिंस ने रजत व अंजू ने कांस्य हासिल कियापंजाब की सर्वदलीय बैठक के बयान का कोई औचित्य नहीं: मुख्यमंत्री
कविताएँ

विहान मयूख

September 11, 2017 02:44 PM

— शिखा शर्मा
नभ से छिपने लगे हैं तारे
गगनचर चहकने लगे है सारे
फूट पड़ी है लौ मार्तण्ड की
देख कुसुम खिले है कितने प्यारे
छंट गया तिमिर का बदरा
रोशन हुआ खुशियों का अंगना
गतिमान है ऊर्जा की धारा
बूंद-बूंद रस घुलता न्यारा
पग-पग अनुभव कर ले राही
निद्रा की चादर छोड़
कर ले नई मंजिल की तैयारी
देख चली है पिपीलिका की पंक्ति
सूक्ष्म होकर भी अपार की शक्ति
न थकना न रुकना
न ललाट ठेंडुना
न भास्कर के पीछे चलना
नई राह की नई मुसाफिर
रोज़ नई मंजिल चुनना
समय की गति का मुसाफिर
समय के साथ ही चल
मंजिल बना
छोर तक पहुंचने का फल पा

कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें