ENGLISH HINDI Saturday, January 25, 2020
Follow us on
 
ताज़ा ख़बरें
द लास्ट बेंचर्स "और अमृत कैंसर फाउंडेशन ने महिलाओं के लिए लगाया मैमोग्राफी, डेकसा और डेंटल जांच शिविर26 को वाईस ऑफ़ इंडिया नागरिकता संशोधन एक्ट के समर्थन पर विशाल पद यात्रा कैंसर की चपेट में गांव बडबर, 6 से अधिक लोगों की हो चुकी मौतवाल्मीकि समाज ने नगर निगम कमिश्नर और पूर्व मेयर राजेश कालिया का पुतला फूंकाअवैध माइनिंग के खिलाफ हरकत में आया प्रशासन, मुबारिकपुर घग्गर नदी पर बनाए अवैध पुल को तोड़ागणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में आयकर विभाग ने लगाया रक्तदान शिविर, 108 रक्त यूनिट एकत्रितजुडो चैंपियनशिप में आर्यन ने जीता गोल्ड, प्रिंस ने रजत व अंजू ने कांस्य हासिल कियापंजाब की सर्वदलीय बैठक के बयान का कोई औचित्य नहीं: मुख्यमंत्री
कविताएँ

माँ

May 13, 2018 12:09 PM

-शिखा शर्मा

धुंए की तरह उड़ा दे
सारी परेशानियां
"माँ" की इस कदर
बरसती है मेहरबानिया।

बार-बार निहारने के बाद
खुद पर वहम करे
माँ" काला टीका लगाकर
नज़र उतारने के सौ-सौ टोटके करे।

अपना पेट काटकर
बच्चों का पेट पालती है
"माँ" अबला होकर भी
सब संभालती है।

"माँ" थप्पड़ मार कर भी
हंसा देती है
"माँ" अपना रंग, रूप,
यौवन सब भुला देती है

हो दुःखी फिर भी
खुशियों का ढोंग करती है
"माँ" के पैरों में छाले हो
फिर भी हँसती है।

मन्नतों की डोर जब
टूट कर बिखर जाती है
"माँ" के टूटे पल्लू के आगे
ईश्वर की मर्जी बदल जाती है

धरती पर साँसों की माला
जब खत्म हो जाती है
"माँ" तब भी आसमां से
दौर दुआओं का जारी रखती है

शब्द भी खुश हो जाता है
एक मात्रा जोड़कर जब
"माँ" बन जाता हैं।

कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें