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संपादकीय

हिंदुस्तान को वर्तमान का प्रजातंत्र नहीं बल्कि सही मायनों में लोकशाही या तानाशाह की जरूरत

September 17, 2018 05:33 PM

- संजय मिश्रा:


भारत में प्रजातंत्र है, कहने को तो इस प्रजातंत्र में जनता अपनी सरकार चुनती है जो वास्तव में जनता की और सिर्फ जनता के लिए सरकार हो। लेकिन क्या ये चुनी हुई सरकार वास्तव में हमारी होती है? क्या वह वास्तव में हमारी चिंता करती है? नहीं। चुनाव हो जाने के बाद जनता, उसके सरोकार और उसके हित-अहित सरकार की प्राथमिकताओं में बहुत दूर चले जाते हैं। वोट मिल जाने के बाद सरकार में बैठे लोगों का सोच बदल जाता है। वे जनता के वोट को "जो चाहे करने की अनुमति" के रूप में देखते है, झूठ बोलकर जनता को ही उल्लू एवं बेवकूफ बनाते रहते है, अपनी तनखा एवं अपने लिए सभी तरह की सुख सुविधाएं खुद ही ले लेती है और जनता ठगा सा अनुभव करती है। सोचती है कि क्या इसी बात के लिए वोट दिया था, पर उसके पास सिवाय 5 साल बाद अगले चुनाव के अलावा कोई विकल्प शेष रह नहीं जाता है। इस तरह हम हर चुनाव में अपने लिए तानाशाह चुनते हैं या बदलते हैं। या यूँ कहें कि हम अपनी सरकार नहीं बल्कि अपने तानाशाह चुनते हैं।
हिन्दुस्तान की व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन के लिए वर्तमान वाला ये प्रजातंत्र नहीं बल्कि एक सचमुच के तानाशाह की जरूरत है जो:
1— रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ पीपुल्स एक्ट 1951 को निलंबित कर दे एवं इस एक्ट के तहत माननीयों को मिले हुए सभी सुख सुविधाओं सहित उनके सभी तरह के विशेषाधिकार एवं डबल/ ट्रिपल पेंशन इत्यादि को समाप्त कर दे।
2— आरक्षण की ब्यवस्था को पूर्णतः समाप्त कर दे ताकि सिर्फ योग्य, समर्थ एवं कर्मठ व्यक्ति ही सेवा में आ सके, जिससे देश एक रफ़्तार से विकास की और अग्रसर हो। समाज के कमजोर, पिछड़े एवं गरीब तबकों (चाहे वो किसी भी जाती या धर्म के हो) को आर्थिक सहायता देकर उसे योग्य एवं समर्थ बनाने की दिशा में काम करे।
4— जम्मू कश्मीर के अलग संविधान को समाप्त करे, भारतीय संविधान की धारा 370 को समाप्त करे ताकि कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक हो, उनमें कोई भेदभाव नहीं रहे।
5— 100 रूपये से ऊपर की सभी करेंसी जैसे 500, 1000, एवं 2000 के नोट को तत्काल प्रभाव से समाप्त करे और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दे, क्योंकि ये बड़े नोट आम आदमी के किसी काम के नहीं बल्कि ये तो भ्रष्ट नेताओ एवं भ्रष्ट बाबुओं के तिजोरियों की शोभा बढ़ाने के लिए है।
6— सभी जमीन की रजिस्ट्री ऑनलाइन हो, सभी सरकारी ठेके ऑनलाइन भरे जाएँ एवं ऑनलाइन ही घोषित किये जाएँ।
7— न्याय ब्यवस्था को सुधारने के लिए सभी न्यायालयों को एक नियत समय सीमा के भीतर विवाद निपटाने का प्रावधान किया जाए। किसी भी आवेदन या अपील को बिना सुने एवं बिना कारण के ख़ारिज नहीं किया जाए। प्रावधान पर खरे नहीं उतरने वाले जजों को पदोन्नति या सुविधा का विकल्प रोक दिया जाए।
8— सभी माननीयों के डबल या ट्रिपल पेंशन तत्काल प्रभाव से समाप्त हो एवं सेना की तरह ही माननीयों को भी 15 साल के सेवा होने पर ही पेंशन का प्रावधान हो।
9— सभी माननीय द्वारा चुनाव के समय किये गए वादे एवं घोषणाओं के क्रियान्वयन का समय सीमा तय हो, इसमें फेल रहने वाले माननीयों को वापस बुलाने का अधिकार जनता को मिले।
10— भ्रष्टाचारियों, रेपिस्ट एवं अन्य अपराधों के लिए अरब देशों में प्रचलित कड़े कानून को भारत में भी सख्ती से लागू किया जाए।

कोई तो ऐसा खुदा का नेक बंदा फरिश्ता बनकर आएगा और सही मायनो में एक सही तानाशाह की तरह उपरोक्त ब्यवस्था लागू करेगा तभी हिन्दुस्तान आगे बढ़ सकता है अन्यथा जनता के सपने सिर्फ सपने ही बने रहेंगे, आज के जनप्रतिनिधि से तो ये तो ये उम्मीद करना ही बेकार है।

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