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हिमाचल प्रदेश

नहीं रहे स्वतंत्रता सेनानी सुशील रतन, बुधवार को होगा अंतिम संस्कार

June 25, 2019 06:10 PM

ज्वालामुखी, (विजयेन्दर शर्मा)

 प्रदेश स्वतंत्रता सेनानी कल्याण बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष एवं ज्वालामुखी के पूर्व विधायक संजय रत्न के पिता सुशील चंद रत्न नहीं रहे रहे। 95 वर्षीय रत्न ने बीती रात 11:50 बजे पी.जी.आई चण्डीगढ़ में अंतिम सांस ली।

उनकी पार्थिव देह को चंडीगढ़ से ज्वालामुखी लाया जा रहा है। उनका अंतिम संस्कार बुधवार को ज्वालामुखी के अष्टभुजी शमशानघाट पर किया जायेगा। बीते दिनों वह गिर गए थे, जिसके चलते उनका ऑपरेशन हुआ, बाद में उनकी किडनी पर उसका विपरीत असर पडऩा शुरू हो गया।

पीजीआई चंडीगढ़ में उनकी बिगड़ती सेहत के चलते डायालासिस चल रहा था, सोमवार को उनका सातवां डायालासिस था। उनका स्वास्थय ज्यादा बिगडऩे के चलते सोमवार रात उनका निधन हो गया।

हिमाचल से ब्रिटिश हुकूमत की दमनकारी नीतियों के खिलाफ आजादी के आंदेालन में भाग लेने वाले क्रांतिकारियों में सुशील रतन भी थे। जिन्होंने आजादी के आंदोलन को नई दिशा दी।

सुशील रत्न वर्ष 1985 से 1990 तक खादी कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष रहे. इसके बाद वर्ष 2003 से 2007 तक उन्हें स्वतंत्रता सेनानी कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष का जिम्मा दिया गया    इसके बाद वह 2013 से 2017 तक फिर से इसी पद पर आसीन रहे   वर्तमान में भी वह भारत सरकार के गह मंत्रालय के तहत स्वतंत्रता सेनानी कल्याण के लिए बनी छह सदस्यीय समिति के सदस्य रहे

उनके बेटे संजय रत्न ज्वालामुखी से कांग्रेस के पूर्व विधायक हैं.  31 मार्च 1924 को देहरा के गरली में जन्मे सुशील रत्न पब्लिक रिलेशन ऑफिसर के पद से वर्ष 1982 में रिटायर होने के बाद से ही राजनीति में आ गए उन्होंने 1985 व 1990 में कांग्रेस टिकट पर ज्वालामुखी से विधानसभा का चुनाव लड़ा, पर दोनों ही मर्तबा हार गए. वर्ष 1985 से 1990 तक खादी वोर्ड के उपाध्यक्ष भी रहे. 2003 से 2007 तक और 2013 से 2017 तक स्वत्रतां सेनानी कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष रहे. 31 मार्च को हाल ही में उन्होंने परिवार संग अपना जन्मदिन बनाया था. वर्तमान में गृह मत्रांलय में भारत सरकार की हाई पावर कमेटी के सदस्य भी थे

आजादी के बाद सुशील रतन स्वतंत्रतता सेनानी परिवारों के उत्थान के लिये भी अग्रणी भूमिका निभाई। सुशील रतन ने हिमाचल प्रदेश लोक संपर्क विभाग में भी अपनी बेहतरीन सेवायें दीं।

 
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