ENGLISH HINDI Monday, October 21, 2019
Follow us on
 
राष्ट्रीय

शिशु त्वचा देखभाल कार्यशाला, शिशुओं की मृत्युदर कम करना जरूरी

July 02, 2019 10:02 PM

ऋषिकेश,(ओम रतूड़ी)
एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने कहा है कि नवजात शिशुओं की मृत्युदर कम करना जरूरी है। वे एम्स ऋषिकेश में नवजात शिशु त्वचा देखभाल पर आधारित राज्यस्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में सेंटर ऑफ एक्सिलेंस इन नर्सिंग एजुकेशन एंड रिसर्च की ओर से ट्रेंड नर्सेस एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सहयोग से नवजात शिशु त्वचा देखभाल पर आधारित राज्यस्तरीय कार्यशाला में राज्यभर से करीब 109 नर्सिंग ऑफिसर्स, एनएस, नर्सिंग ट्यूटर ने प्रतिभाग किया। मंगलवार को संस्थान के सेंटर ऑफ एक्सिलेंस इन नर्सिंग एजुकेशन एंड रिसर्च (कॉलेज ऑफ नर्सिंग )में आयोजित कार्यशाला का बतौर मुख्य अतिथि एम्स निदेशक पद्श्री प्रोफेसर रवि कांत ने विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर निदेशक प्रो. रवि कांत ने कहा कि राज्य में नवजात शिशुओं की मृत्युदर को कम करने के लिए इस तरह की कार्यशालाएं उपयोगी साबित होंगी। निदेशक एम्स पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने नर्सिंग को प्रोत्साहित करने के लिए नर्सिंग पाठ्यक्रम में जरुरी सुधार की आवश्यकता बताई। कार्यशाला में टीएनएआई के विशेषज्ञों ने शिशुओं की बेहतर देखभाल पर व्याख्यानमाला प्रस्तुत की। इस अवसर पर टीएनएआई उत्तराखंड चैप्टर की अध्यक्ष ललिता बिष्ट, एसोसिएशन की सहायक महासचिव वतचला धीनाकरण ने नवजात शिशुओं का मूल्यांकन एवं देखभाल से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की। हिमालय कॉलेज देहरादून की सहायक आचार्य राजकुमारी सिल्विया देवी ने नवजात शिशु की त्वचा के रुखेपन, पानी की कमी व इसमें इस्तेमाल होने वाले उत्पादों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। एम्स की सहायक आचार्य नर्सिंग मलार कोडी ने शिशुओं को संक्रमण से बचाने के लिए निसंक्रामक और ऑस्टोमी की देखभाल के बारे में व्याख्यान दिया।

कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें
 
और राष्ट्रीय ख़बरें
डीआरडीओ ने प्रौद्योगिकी हस्‍तातंरण से जुड़े 30 समझौते किये सुरक्षित और किफायती प्रौद्योगिकियों की दिशा में नवाचार उन्मूलन के लिए टीबी दर गिरना काफ़ी नहीं, गिरावट में तेज़ी अनिवार्य: नयी WHO रिपोर्ट बिना मानवाधिकार उल्लंघन के, व्यापार करे उद्योग: वैश्विक संधि की ओर प्रगति प्रकृति ही देगी प्लास्टिक का हल चिकित्सकों व नर्सिंग कर्मचारियों का ट्रॉमा केयर में दक्ष होना नितांत आवश्यक कूड़ा मुक्त, कुरीति मुक्त भारत बने अनुभव व नवीनतम तकनीकि ज्ञान का लाभ मरीजों को मिले: प्रो. कांत जल संरक्षण पर कार्य करने की जरूरत हिमालयी क्षेत्रों में बड़े उद्योगों के बजाय लघु उद्योगों को महत्व दिया जाये