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सशक्त सोच ही समाज को परिवर्तन करेगी: कुलपति मदान

July 04, 2019 08:11 PM

माउंट आबू, फेस2न्यूज:
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय में समाज सेवा प्रभाग के बैनर तले ज्ञान सरोवर अकादमी परिसर में चार दिवसीय समाज सेवकों का राष्ट्रीय समम्मेलन विभिन्न सत्रों में सामाजिक उत्थान के विषयों पर हुई चर्चा के साथ संपन्न हुआ।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए हरियाणा करनाल, अकोला यूनिवर्सिटी कुलपति डॉ. एम.एस. मदान ने कहा कि हमारी सशक्त सोच ही समाज को परिवर्तन कर सकती है। सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए समाज उत्थान से पूर्व समाजसेवकों को अपनी सोच में परिवर्तन करने की जरूरत है। मानवीय मूल्यों की गरीबी से ही सामाजिक ढांचे में दरारें बढ़ती जा रही हैं। बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ मानसिक संतुलन को बेहतर बनाने को प्राथमिकता देनी चाहिए। दिल्ली अहसास पीस फाउंडेशन अध्यक्ष रोटेरियन जावेन इकबाल खान ने कहा कि समाज को सुधारने का बीड़ा उठाने वाली समाज सेवी संस्थाएं वंदनीय हैं। जो बिना किसी स्वार्थ के पूरी समर्पणता के साथ समाज के हर वर्ग को एकजुट करने में कार्यरत हैं। वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों का निवारण करने के लिए स्वयं को सशक्त बनाने की जरूरत है। इसके लिए सहजराजयोग को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए।
मीडिया प्रभाग अध्यक्ष बीके करूणा ने कहा कि सामाजिक परिदृश्य में नवीनता लाने के लिए समाजसेवकों की रचनात्मक सोच होना जरूरी है। जरूरमंदों की आवश्यकताओं को पूर्ण करने से पूर्व उनकी मानसिकता को सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण करना होगा।
रोटरी क्लब पूर्व प्रांतपाल रतनलाल गुप्ता ने कहा कि समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य करने वाले महानुभाव अनेक प्रकार के साधनों व विधियों का प्रयोग करके सामाजिक स्तर को ऊंचा उठाने का प्रयास तो करते हैं लेकिन स्वयं में आध्यात्मिक मूल्यों के अभाव व कुछ निजी स्वार्थों के आकर्षण की वजह से जो सफलता मिलनी चाहिए उससे वचिंत रह जाते हैं।
प्रभाग के अधिशासी सदस्या बीके सीता बहन ने कहा कि किसी भी सामाजिक संगठन का ध्येय समाज उत्थान होता है। भौतिक साधन तो बढ़ रहे हैं लेकिन समाज सकारात्मक रूप से सुधरे उसका अभाव दिखाई दे रहा है।
करनाल से आई प्रभाग की अधिशासी सदस्या बीके प्रेम बहन ने कहा कि आज अन्नदान, कपड़े का दान, धन का दान तो सब करते हैं लेकिन वर्तमान समय मनुष्यों में चरित्र की पूंजी की कमी है। इसके लिए हरेक व्यक्ति को स्वजीवन में दिव्यगुणों का समावेश करना होगा।
मंदसौर से आई प्रभाग सदस्य बीके सुनीता बहन ने कहा कि चरित्र निर्माण व समाज में श्रेष्ठ संस्कारों को प्रचारित करने के लिए मानवीय वैचारिक धरातल को भी बदलने की जरूरत है। अधिशासी सदस्या समिता बहन ने कार्यक्रम का संचालन किया।
इस अवसर पर अमरावती महाराष्ट्र से आए नन्हें मुन्हें कलाकारों ने सामाजिक उत्थान को लेकर विभिन्न प्रादेशिक संस्कृतियों की प्रस्तुतियां देकर सम्मेलन सहभागियों की खूब तालियां बटोरीं।

 
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