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राष्ट्रीय

लार के सैंपल से ही पता लग सकेगा कैंसर का

July 08, 2019 08:18 AM

ऋषिकेश (ओम रतूड़ी)

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में आयोजित छह दिवसीय कार्यशाला में संस्थान में मॉलिक्यूलर यूनिट खोलने की संभावनाओं पर चर्चा की गई, जिससे संस्थान में अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा सके। जिससे मरीजों में कैंसर रोग का पता लगाने व उसके उपचार के साथ ही ब्लड की बजाए लार के सैंपल से ही किसी व्यक्ति में कैंसर रोग होने से पहले इसका परीक्षण किया जा सके। साथ ही इस दौरान स्टैमसेल रिसर्च की संभावनाओं को भी तलाशा गया। कार्यशाला के दौरान विषय विशेषज्ञ ने पीजी व पीएचडी विद्यार्थियों को अपने शोध कार्यों से अवगत कराया और उनसे विभिन्न बिंदुओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की।     

- ऋषिकेश एम्स में खुलेगी मॉलिक्यूलर यूनिट

कार्यशाला के अवसर पर एम्स निदेशक पद्मश्री रवि कांत ने बताया कि संस्थान में जल्द ही मॉलिक्यूलर लैबरोटरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे रिसर्च को बढ़ावा दिया जा सके और इस सुविधा का लाभ मरीजों को मिल सके। इस दौरान निदेशक प्रो. कांत ने एम्स संस्थान में सेल कल्चर लैब के प्रस्ताव को धरातल पर उतारने के लिए 60 लाख रुपए की वित्तीय सहायता राशि को मंजूरी भी दी। उन्होंने बताया कि सेल कल्चर लैब की स्थापना से पीएचडी स्कॉलर्स को शोधकार्य की सुविधा मिल सकेगी। निदेशक एम्स ने बताया कि लैब की स्थापना के लिए संबंधित फैकल्टी को जरुरत पड़ने पर ट्रेनिंग भी दिलाई जाएगी, कहा कि  इसके लिए चिकित्सकों को साइंटिफिक मानकों के हिसाब से कार्य करना होगा, लिहाजा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा, उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी सेफ्टी मानक फॉलो होने चाहिए। कार्यशाला में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी केजीएमयू लखनऊ के एडवांस रिसर्च सेंटर के डा. सत्येंद्र कुमार सिंह ने आयोजित कार्यशाला में एम्स ऋषिकेश में मॉलिक्यूलर टेस्ट यूनिट और स्टैमसेल रिसर्च लैब की संभावनाओं को लेकर फैकल्टी व स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के साथ चर्चा की और इससे जुड़ी बुनियादी सुविधाओं के बाबत जानकारी दी। डा. सत्येंद्र ने उनसे अपने द्वारा किए गए अनुसंधान भी साझा किए। साथ ही उन्हें स्टैमसेल रिसर्च से जुड़े जरुरी पहलुओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। इस दौरान उन्होंने एम्स संस्थान द्वारा संबंधित प्रोजेक्ट्स को लेकर तैयार किए गए प्रारूप को संतोषजनक पाया। उन्होंने बताया कि ऋषिकेश एम्स ने निदेशक कांत की अगुवाई में बीते दो वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में काफी प्रगति की है। जिससे संस्थान में आए बदलाव व नई सुविधाएं मिलने से जल्द यहां मेडिकल सर्विसेज में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा। कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ ने पीएचडी व पीजी स्टूडेंट्स को रिसर्च ग्रांट प्रस्तुतिकरण के तौर तरीके बताए व उन्हें पोस्ट डोक्टोरल फैलोशिप से संबंधित जानकारियां भी दी। कार्यशाला में पीजी और पीएचडी के करीब 50 छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया।

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