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पंजाब

खेती संबंधी गठित की राष्ट्रीय समिति में पंजाब को बाहर रखना सरासर धक्का: मान

July 09, 2019 12:20 PM

चंडीगढ़, फेस2न्यूज:
आम आदमी पार्टी पंजाब के प्रधान और संसद मैंबर भगवंत मान ने केंद्र सरकार की तरफ से देश में खेती को उत्साहित करने और कृषि से होने वाली आमदन को अगले तीन सालों तक दोगुना करने के लक्ष्य की प्राप्ति सम्बन्धित सिफारिशें देने के लिए बनाई गई राष्ट्रीय समिति में पंजाब को बाहर करने का सख्त विरोध करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने खेती और पानी का गंभीर संकट का सामना कर रहे पंजाब को नजर अन्दाज किया है, बल्कि पिछले 60 सालों से पूरे देश का पेट भर रहे पंजाब के 'अंनदाता' की तौहीन की है।   

मान बोले, ऐसे अहम फैसलों के समय कहां होती हैं केंद्रीय मंत्री हरसिमरत बादल, बेहतर होता कैप्टन, हरसिमरत, सभी राज्यों और पार्टियों के संसद सदस्यों में से बनाते नुमाइंदे 


'आप' द्वारा जारी बयान में मान ने मांग की है कि केंद्र सरकार अपने फैसले पर फिर से विचार करके मोदी सरकार इस राष्ट्रीय समिति में पंजाब को तुरंत शामिल कर खेती प्रधान राज्य का हक बहाल करे।
मान ने इस मुद्दे पर बठिंडा से संसद मैंबर और केंद्रीय फूड प्रोसेसिंग मंत्री हरसिमरत कौर बादल को घेरते कहा कि मोदी सरकार जब ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर फैसला लेते समय पंजाब को अनदेखा करती है तो वह (हरसिमरत बादल) कहां होते हैं? मान ने कहा, ''मैं पूछना चाहता हूं कि सिर्फ सत्ता का आनंद लेने के लिए ही बादलों ने अपनी बहु को केंद्रीय मंत्री बनवाया है? क्या बठिंडा और पंजाब के हितों की रक्षा करना हरसिमरत कौर बादल की मुख्य जिम्मेदारी नहीं है?
मान ने पार्टी स्तर से ऊपर उठ कर पंजाब के सभी संसद और राज्यसभा मैंबर को इस मुद्दे पर एकजुट होने का आह्वान किया ताकि सरकार पर दबाव डाल कर पंजाब को उस राष्ट्रीय समिति का मैंबर बनवाया जा सके, जिसके साथ पंजाब की खेती और समूची आर्थिकता जुड़ी हुई है, क्योंकि केवल खेती प्रधान राज्य होने के कारण पंजाब का समूचा दारमुदार कृषि पर निर्भर करता है, जो घातक नीतियों के कारण गंभीर संकट का सामना कर रही है। भगवंत मान ने कहा कि केंद्र सरकार खेती और पानी के संकट प्रति कितनी गैर संजीदा है, इस राष्ट्रीय समिति के गठन ने उसकी नीति और बदनियती का खुलासा कर दिया है। बेहतर होता इस अहम समिति का चेयरमैन महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री दविन्दर फडऩवीस की जगह पंजाब के मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिदंर सिंह को बनाया जाता जबकि इन सदस्यों में हरियाणा के मुख्य मंत्री समेत बतौर फूड प्रोसेसिंग मंत्री हरसिमरत कौर बादल को भी शामिल किया जाता क्योंकि जहां हरियाणा भी खेती क्षेत्र में पंजाब जैसी चुणौतियों का सामना कर रहा है, वहीं फूड प्रोसेसिंग ईकाइओं के बिना खेती के परंपरागत गेहूं-धान की फसली विभिन्नता संभव है न ही फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र के बिना किसानों की आमदन 2022 तक दोगुनी करने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
मान ने कहा कि मोदी सरकार की तरफ से खेती के साथ सम्बन्धित इस उच्च स्तरीय राष्ट्रीय समिति के गठन करते समय राज्य के बुनियादी कानूनन अधिकारों को भी चोट मारी है, क्योंकि खेती सीधे रूप में राज्यों के अधिकार का विषय है। राज्यों के अधिकार क्षेत्र वाले विषय पर भाजपा के साथ सम्बन्धित चंद राज्यों के नुमाइंदों को नुमाइंदगी देकर मोदी सरकार ने भारतीय संघी ढांचे की मूल भावना की भी उलंघन है।
मान ने कहा कि वह इस तरह की राष्ट्रीय समिति के गठन के विरोधी नहीं हैं, क्योंकि खेती क्षेत्र को पेश आ रहे संकटों से निकालने के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर बहुत से ठोस कदम लेना समय की जरूरत है, परंतु बेहतर होता कि ऐसी महत्वपूर्ण समिति में न केवल सभी राज्यों को बल्कि सभी पार्टियों के साथ सम्बन्धित संसद सदस्यों को भी शामिल किया जाता, क्योंकि कृषि किसी एक पार्टी के साथ सम्बन्धित नहीं है व हर राज्य में कृषि का संकट और संभावनाएं अलग-अलग हैं।
मान ने मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह को इस मामले में बिना देरी दखल-अन्दाजी करने की मांग की है। मान ने यह भी कहा कि कैप्टन अमरिन्दर सिंह अपना अक्स गैर संजीदा और गैर जिम्मेदार मंत्री वाली बना चुके हैं, यदि कैप्टन पंजाब प्रति संजीदा रहते तो भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को खेती प्रधान राज्य के मुख्यमंत्री होने के तौर पर न चाहते हुए भी कैप्टनको इस राष्ट्रीय समिति में शामिल करना पड़ता।
मान ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि यदि पंजाब को इस समिति में शामिल न किया गया तो वह संसद के सदन से पूरे देश और दुनिया को बताऐंगे कि केंद्र सरकार ने किस तरह पंजाब को इस्तेमाल कर फैंक दिया है, जिसने पूरे देश का पेट भरते-भरते अपनी जवानी, किसानी, मिट्टी, पानी और समूची आबो-हवा बर्बाद कर ली।

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