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हिमाचल प्रदेश

शतरंज खेल को मुख्यधारा में शामिल करे

July 09, 2019 06:14 PM

धर्मशाला, (विजयेन्दर शर्मा) पदोन्नत प्रवक्ता संघ के प्रदेश प्रधान रत्नेश्वर सलारिया, प्रदेश मिडिया प्रभारी विकास धीमान जिला काँगड़ा प्रधान प्रदीप धीमान सचिव राजेन्द्र कपूर, खंड ज्वालामुखी प्रधान राजीव कुमार, महिंद्र बारी, विपन पटियाल, सतिंदर भूषण ने प्रदेश सरकार व उच्च शिक्षा विभाग से मांग की है कि इसी वर्ष से उच्च शिक्षा विभाग भी शतरंज खेल को मुख्यधारा में शामिल करे। पदोन्नत प्रवक्ता संघ के प्रधान रत्नेश्वर सलारिया और प्रदेश मीडिया प्रभारी विकास धीमान ने बताया कि पिछले वर्ष अंडर 14 में शतरंज खेल को शामिल किया था और बच्चों ने राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लिया था।यदि इस बर्ष से शतरंज खेल को उच्च शिक्षा में शामिल नही किया तो अब बो राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी शतरंज खेल में इस बर्ष भाग नही ले पाएंगे। 5 जुलाई को उच्च शिक्षा विभाग की राज्य खेल कूद स्पर्धा की बैठक जिला कुल्लू में आयोजित हुई जिसमें शतरंज खेल के साथ साथ शूटिंग, स्विमिंग ब हुकपबांडों को उच्च शिक्षा विभाग में शामिल करने का प्रस्ताव सरकार को भेजने पर सहमति बनी। संघ ने प्रदेश सरकार से ये मांग की है कि शतरंज खेल को इसी बर्ष से उच्च शिक्षा विभाग की खेल कूद में शामिल किया जाए। संघ ने कहा कि इस बर्ष जिला काँगड़ा में शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित U-14 बालक व बालिका की जोनल खेल-कूद प्रतियोगिता में शतरंज में 645 बच्चों ने भाग लिया ।जो कि पिछले बर्ष के मुकाबले बहुत ज्यादा है ।जिला मंडी में पिछले वर्ष 14ब्लाक से 476 खिलाड़ियों ने शिरकत की थी परन्तु खेल की लोकप्रियता बच्चों में इस क़दर बढी कि इस वर्ष कुल छात्रों व छात्राओं ने शतरंज के खेल में अपने जौहर का प्रदर्शन किया।
जिला मण्डी के सभी 22 ब्लॉकों के 1155 शतरंज खिलाड़ियों को जिला स्तरीय U-14 शतरंज प्रतियोगिता में अपना स्थान सुनिश्चित करने के लिए हुई जद्दोजहद में 220 छात्र व छात्राओं का चयन किया गया।
इस कार्य को सम्पन्न करने में शिक्षा विभाग में कार्यरत सभी शतरंज प्रेमी शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों का पूर्ण सहयोग मिला। वहीं दूसरी ओर जिला कुल्लू में 176 छात्राओं व 263 छात्र खिलाड़ियों ने शिरकत की ।शिमला सहित प्रदेश के अन्य जिलों में भी खेल प्रतियोगिताएं जारी है। इस वर्ष प्रदेश भर में 5000 से 6000 खिलाड़ियों द्वारा इस खेल में शिरकत करने का अनुमान है। जो किसी भी खेल में शिरकत करने वाले खिलाड़ियों की सर्वाधिक संख्या हो सकती है। प्रदेश सरकार द्वारा इस सत्र से प्राथमिक स्तर पर (कक्षा 1से 5तक) शतरंज खेल की मुख्यधारा में शामिल करने जा रही है-जिसके लिए प्रदेश प्रारम्भिक शिक्षा विभाग भी बधाई का पात्र है जो त्वरित गति से इस दिशा में काम कर रहा है। U-14 में बहुत से बच्चे राष्ट्रीय स्तर पर भाग लेने के बाद अब उच्च शिक्षा विभाग में दाखिल हो चुके हैं परन्तु उच्च शिक्षा विभाग के बच्चों को शतरंज खेल की मुख्यधारा में शामिल होने से इस बार महरूम होना पड़ा और उनके खेल कैरियर पर इसका गहरा असर पडेगा।
उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग के बहुत से प्रवक्ता प्राथमिक व मिडिल स्तर पर शिक्षा विभाग में शतरंज लागू करवाने में विभाग का पूर्ण सहयोग कर रहे हैं तो उच्च शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों की सेवाएं इस खेल आसानी से उपलब्ध हो जाएंगी और इस खेल को इसी सत्र से बच्चों के लिए उपलब्ध करवाया जा सकता है।
शतरंज खेल के फायदे:
शतरंज दिमागी कसरत का एक मात्र खेल है, इसे एक स्थान पर बैठ कर खेला जाता है अतः किसी प्रकार का जोखिम भी नहीं रहता। शतरंज खेल अन्य लोगों के प्रति हमारे अन्दर सम्मान की भावना का विकास करता है।
शतरंज एक चुनौती पूर्ण खेल है जो बच्चों की बुद्धि को तीक्ष्ण बनाता है, यह खेल दिमागी कसरत के लिए सर्वोपरि माना जाता है।
इस खेल से बच्चों की एकाग्रता बढती है जो उन्हें अन्य विषय पढते वक्त लाभदायक सिद्ध होती है।
इस खेल से बच्चों के जीवन में चुनौती लेने की क्षमता का विकास होता है।
शतरंज खेलने वाले बच्चे का मन मस्तिष्क अन्य बच्चों के मुकाबले अधिक तीव्र होता है। बच्चों में योजना निर्माण के कौशल का भी विकास होता है।
बच्चों की कल्पना शक्ति के साथ साथ शतरंज खेलने वाले बच्चे गणित व विज्ञान विषय में भी बेहतर प्रदर्शन करते हैं।
शतरंज खेल में खिलाड़ी का शांत स्वभाव उनमें रचनात्मक कार्यों को करने की आदत का विकास करता है और खाली समय में नशे जैसी बुराइयों से दूर रखने में मददगार साबित होता है।
बच्चों में फैसले लेने की क्षमता के साथ साथ शतरंज खेलने वाले बच्चे, क्या सही है और क्या ग़लत है और आगे क्या करना सही होगा, यह भी सोचते हैं।
शतरंज खेल की हजारों खूबियाँ बच्चे के सर्वागीण विकास में सहायक सिद्ध होगी।
अतः यह खेल विभाग को अविलंब शुरू करना चाहिए। चूंकि यह खेल हमारी नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
संघ ने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग इस दिशा में उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही प्रवक्ता संघ का एक प्रतिनिधिमंडल माननीय मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री महोदय से मुलाक़ात करेगा व U-19 खेलों में भी पूरे प्रदेश में ब्लाक स्तर से इसी सत्र से बच्चों के शतरंज खेल में उज्वल भविष्य को देखते हुए हस्तक्षेप करने का आह्वान करेगा।

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