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पंजाब

ग़ैर-कानूनी संगठन के तौर पर एस.एफ.जे. पर पाबंदी लगाने के केंद्र के फ़ैसले का स्वागत

July 11, 2019 09:43 AM

चंडीगढ़, फेस2न्यूज:
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने एक ग़ैर-कानूनी संगठन के तौर पर सिख फॉर जस्टिस (एस.एफ.जे.) पर भारत सरकार द्वारा पाबंदी लगाने के फ़ैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि आई.एस.आई. का समर्थन प्राप्त इस संगठन की भारत विरोधी अलगाववादी कार्यवाहियों से देश की सुरक्षा करने के प्रति यह एक पहला कदम है।
कैप्टन ने जारी एक बयान में कहा कि चाहे इस संगठन के साथ एक आतंकवादी संगठन के तौर पर सलूक किये जाने की ज़रूरत है परन्तु भारत सरकार ने कम से कम एस.एफ.जे. के विरुद्ध लंबे समय से लम्बित पड़ा स्टैंड आखिरकार ले लिया है। इस संगठन ने हाल ही के वर्षों के दौरान पंजाब में खुलकर दहशत की लहर चलाई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कदम से आखिरकार केंद्र सरकार ने इस संगठन के विरुद्ध कार्यवाही करने की अपनी इच्छा जताई है जिसने ‘सिख जनमत संग्रह 2020’ संबंधी षडय़ंत्रकारी मुहिम पाकिस्तान की आई.एस.आई. के समर्थन के साथ चलाई है। इसको 2014 में शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के हितों के मद्देनजऱ एस.एफ.जे. और इससे जुड़े लोगों के विरुद्ध ज़ोरदार हमला करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा और ज्य़ादा सक्रियता के साथ कदम उठाए जाने चाहिए।
कैप्टन ने कहा कि एस.एफ.जे. की ग़ैर-कानूनी सरगर्मियों ने देश को बड़ी चुनौती दी है। उन्होंने इस संगठन के विरुद्ध तीखी जंग का न्योता दिया है।
कैप्टन ने कहा कि हाल ही के वर्षों के दौरान एस.एफ.जे. ने पंजाब में आगजऩी और हिंसा की कार्यवाहियां करवाने के लिए कुछ गरीब और भोले भाले नौजवानों को गरमख्याली बनने के लिए प्रेरित किया और फंड मुहैया करवाए। उन्होंने कहा कि इस संगठन ने पंजाब में गैंगस्टरों पर और गरमख्यालियों का समर्थन प्राप्त करने की भी सभी कोशिशें की और उनको भारत सरकार से ‘पंजाब की आज़ादी’ की लड़ाई के लिए नसीहत दी।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने एस.एफ.जे. द्वारा पैदा की चनौती को कम आंकने की कोशिश करने वालों की भी तीखी आलोचना की जोकि न केवल भारत में बल्कि भारत से बाहर भी लगातार दम-खम दिखाने की कोशिश कर रही है। इसका प्रगटावा 30 जून, 2019 की घटना से भी हुआ है। इस दिन इंग्लैंड आधारित एस.एफ.जे. के सरगर्म सदस्यों ने एजबेस्टन (बर्मिंघम) में भारत और इंग्लैंड के बीच विश्व कप क्रिकेट मैच के मौके पर भी इसका प्रगटावा किया। इस मौके पर पम्मा और उसके जोड़ीदार के जनमत संग्रह 2020 की टी-शर्ट पहनी देखी गई और यह क्रिकेट मैच के दौरान खालिस्तान का झंडा लहरा रहे थे।

पिछले हफ्ते एस.एफ.जे. ने सोशल मीडिया पर एक पोस्टर भी डाला जो कि उच्च दर्जे का अलगाववादी था जिसमें खालिस्तानी समर्थकी सिखों को 9 जुलाई, 2019 के न्यूजीलैंड के विरुद्ध सेमीफाइनल के दौरान भारतीय टीम को उकसाने के लिए अपील की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह घटनाएँ शिरोमणि अकाली दल और इसके नेताओं के स्टैंड की खिल्ली उड़ाती हैं। पार्टी के प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने अपने बयान में यह कहा है कि खालिस्तान का कोई मुद्दा नहीं है। इस मुद्दे की गंभीरता का जि़क्र करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने अकालियों को इस मुद्दे पर संकुचित राजनीति करने से दूर रहने और इस समस्या के साथ लडऩे और इसके ख़ात्मे के लिए सरकार का साथ देने की अपील की। उन्होंने कहा कि अकाली दल जानबुझ कर एस.एफ.जे. के एजंडे को अनदेखा करते रहे हैं। इससे यह प्रगटावा होता है कि उनको पंजाब और यहाँ के लोगों के हितों का कोई भी ख़्याल नहीं है।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने एस.एफ.जे. के अलगाववादी और हिंसक एजंडे और इसकी पहुँच का मुकाबला करने के लिए और इसको समझने के लिए दुनिया भर के लोगों को भारत की कोशिशों का समर्थन करने की नसीहत दी। यह संगठन बहुत चालाकी भरे ढंग से इसको ग़ैर-हिंसक जनमत संग्रह मुहिम कह रहा है। उन्होंने कहा कि जो देश भारत को अस्थिर करने के लिए एस.एफ.जे. को अपनी धरती का प्रयोग करने की आज्ञा देगा उसे इसके निष्कर्ष भुगतने पड़ेंगे क्योंकि कोई भी देश दूसरे के विरुद्ध आतंकवाद या हिंसा के लिए समर्थन देकर इसके प्रभावों से बचा नहीं रह सकता।

पिछले तीन सालों से पंजाब पुलिस ने एस.एफ.जे. के नेताओं/सरगर्म सदस्यों समेत ऐसे नौजवानों के विरुद्ध बहुत से आपराधिक मामले दर्ज किये हैं जो अमेरिका कैनेडा, इंग्लैंड, मलेशिया आदि देशों से एस.एफ.जे. के प्रमोटरों की कमांड अधीन विभिन्न देशों से काम में सक्रिय रहे। पकड़े गए नौजवानों से प्राप्त हुए हथियारों और गोला-बारूद से उनका बड़ा नैटवर्क नंगा हुआ है जो कि विभिन्न दक्षिण-पूर्वी-पश्चिमी और यहाँ तक कि अफ्रीकन देशों तक फैला हुआ है। यह हिंसा और ग़ैर-कानूनी कार्यवाहियों के लिए फायनांस करने के लिए हवाला या एम.टी.टी.एस जैसे मनीट्रांसफर चैनलों का प्रयोग कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एस.एफ.जे. ने राज्य सरकार के विरुद्ध पंजाब पुलिस के मुलाजिमों को बग़ावत करने के लिए उकसाने की कोशिश की। इसके अलावा पंजाब के मुख्यमंत्री, जेल मंत्री, पूर्व और मौजूदा डी.जी.पीज़ समेत पंजाब के सीनियर पुलिस अधिकारियों को भयभीत करने के लिए धमकियां दी। इसके अलावा इस संगठन ने समर्पित सोशल मीडिया मुहिम के द्वारा सिख फौजियों को अपना निशाना बनाया और उनको फ़ौज छोडऩे और जनमत संग्रह 2020 के लिए काम करने के लिए उकसाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एस.एफ.जे और कश्मीरी अलगाववादियों के बीच मज़बूत गठजोड़ देखने को मिला है जो कि पंजाब को फूट डाल कर देश की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती खड़ी करता है। उन्होंने कहा कि जो भी अब तक सामने आया है वह सिफऱ् बहुत मामूली है। एस.एफ.जे की बीमारी बहुत गहरी धँस गई है और राष्ट्रीय अखंडता खासकर पंजाब की सुरक्षा के मद्देनजऱ इसको जड़ से ख़त्म करने की ज़रूरत है।

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