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हिमाचल प्रदेश

क्या धवाला की मांगो को मान लेगी सरकार

July 30, 2019 08:27 PM

ज्वालामुखी, (विजयेन्दर शर्मा)

क्या धवाला की मांगों को मान लेगी सरकार। यही सवाल इन दिनों ज्वालामुखी ही नहीं,प्रदेश की राजनिति में बहस के केन्द्र में है।

 
  ज्वालामुखी के विधायक एवं राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष रमेश धवाला की पिछले दिनों बगावत के बाद मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने उन्हें 15 दिन में उनके उठाये मुद्दों को हल करने का आशवास दिया था। इसी के तहत अब धवाला भी 15 दिन बाद ही अपना मुंह खोलने की बात कर रहे हैं। जाहिर है 15 दिन बाद भी धवाला की मांगों को न माना गया तो एक बार फिर तकरार बढ़ेगी।
अंदरखाते धवाला की नजर तो प्रदेश मंत्रीमंडल में होने वाले बदलाव पर है, निसंदेह धवाला की अपनी दावेदारी का आधार मजबूत भी है। लेकिन धवाला विरोधी लाबी को यह कतई भी मंजूर नहीं कि धवाला मंत्री बनें। यही वजह है कि एक सुनियोजित तरीके से धवाला के खिलाफ माहौल तैयार किया गया। धवाला भी अपने विरोधियों के बुने जाल में फंस गये। अब हालात ऐसे हैं कि धवाला चाहकर भी नहीं कह पा रहे हैं कि उन्हें मंत्री बनाया जाये। चूंकि पवन राणा के खिलाफ जाना अपने पैर पर खुद ही कुल्हाड़ी मारने के समान है। बहरहाल आज स्थिती ऐसी है कि धवाला चाह रहे हैं कि उन्हें भले ही मंत्री पद न मिले, लेकिन उनकी मांगे तो सरकार माने। जिनमें पुमंख तौर पर उच्च शिक्षा निदेशक को हटाने व उनके ज्वालामुखी कालेज में तैनाती के दौरान किये गये निर्माण कार्यों की विजिलेंस जांच के साथ साथ ज्वालामुखी कालेज के एक शिक्षक को नौकरी दिये जाने की जांच की मांग है। धवाला चाहते हैं कि ज्वालामुखी का अस्पताल भी शिफ्ट होकर बस अड्डे के पास आये। और कांग्रेस राज में ज्वालामुखी कालेज में बनाये गये साईंस ब्लाक के निर्माण की भी विजिलेंस जांच हो। वहीं ज्वालामुखी मंडल भाजपा की शिफारिश पर पार्टी से निकाले गये तीन लोगों पर प्रदेश भाजपा भी कार्रवाई करे।

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