ENGLISH HINDI Wednesday, August 21, 2019
Follow us on
ताज़ा ख़बरें
कार्यशाला में मृदंगम वादक मननार काएल बालाजी ने दक्षिणी भारतीय ताल की बारीकियां बताईएनएच एम्प्लाइज यूनियन ने प्रशासन के खिलाफ स्वास्थ्य सेवायें बंदकर प्रदर्शन किया ट्राईसिटी में घर बैठे राशन पंहुचायेगा जीवाला डॉट.इन ग्रॉसरी स्टोरस्वास्थ्य और सौंदर्य प्रेमियों के लिए वेगनटिक सुपर फूड्स ने एल्मो-एल्मोंड बेवरेज लॉन्च कियाजीरकपुर के शिवालिक विहार में प्रधान के घर शॉर्ट सर्किट से लगी आग से लाखों का नुक्सानई फाइलिंग कभी भी कहीं भी, ई-रिटर्न भरने के दिए टिप्ससाइबर अपराध और कानूनी जागरूकता पर 3 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरूडेराबस्सी के सभी एटीएम पड़े हैं काफी समय से बंद
राष्ट्रीय

भारत सरकार का बड़ा फैसला, जम्मू कश्मीर से संबधित धारा 370 एवं 35ए को समाप्त किया

August 05, 2019 06:03 PM

नई दिल्ली, फेस2न्यूज/संजय मिश्रा:
भारत सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने का फ़ैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में इसका फ़ैसला हुआ जिसका एलान गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में किया।
केंद्र के आज के इस बड़े फ़ैसले की कुछ मुख्य बातें:
गृहमंत्री ने संसद को बताया कि अनुच्छेद 370 को ख़त्म कर दिया गया है और इस आदेश पर राष्ट्रपति जी ने हस्ताक्षर भी कर दिए हैं।
अनुच्छेद 370 के ख़त्म होने के साथ अनुच्छेद 35-ए भी ख़त्म हो गया है जिससे राज्य के 'स्थायी निवासी' की पहचान होती थी।
सरकार ने अनुच्छेद 370 के ख़ात्मे के साथ-साथ प्रदेश को पुनर्गठित करने का भी प्रस्ताव पास किया है।
प्रस्ताव किया गया है कि जम्मू-कश्मीर अब राज्य नहीं रहेगा बल्कि दो केंद्र शासित प्रदेश होंगे, एक का नाम होगा जम्मू-कश्मीर, दूसरे का नाम होगा लद्दाख।
दोनों केंद्र शासित प्रदेशों का शासन लेफ़्टिनेंट गवर्नर के हाथ में होगा.
जम्मू-कश्मीर की विधायिका होगी जबकि लद्दाख में कोई विधायिका नहीं होगी।
अनुच्छेद 370 का केवल एक खंड बाक़ी रखा गया है जिसके तहत राष्ट्रपति किसी बदलाव का आदेश जारी कर सकते हैं।
गृहमंत्री ने बताया कि केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने का प्रस्ताव वहाँ की सुरक्षा की स्थिति और सीमा-पार से आतंकवाद की स्थिति को देखते हुए लिया गया।
ज्ञात हो कि वर्ष 1947 में भारत-पाकिस्तान के विभाजन के वक्त जम्मू-कश्मीर के राजा हरि सिंह स्वतंत्र रहना चाहते थे। लेकिन कुछ शर्तों के साथ वो भारत में विलय के लिए तैयार हो गए थे।
इसके बाद संविधान में अनुच्छेद 370 का प्रावधान करके जम्मू-कश्मीर को विशेष अधिकार दिए गए। एवं वर्ष 1951 में राज्य को संविधान सभा को अलग से बुलाने की अनुमति दी गई। प्रधानमंत्री नेहरू और शेख अब्दुल्ला ने पांच महीनों की बातचीत के बाद अनुच्छेद 370 को भारतीय संविधान में जोड़ा था जिसके मुताबिक रक्षा, विदेश नीति और संचार मामलों को छोड़कर किसी अन्य मामले से जुड़ा क़ानून बनाने और लागू करवाने के लिए केंद्र को राज्य सरकार की अनुमति चाहिए होती थी। यही नहीं इसी विशेष दर्जें के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान का अनुच्छेद 356 (आपातकाल) लागू नहीं होता। इस कारण भारत के राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बरख़ास्त करने का अधिकार नहीं है। इस अनुच्छेद के चलते, जम्मू-कश्मीर का अपना अलग झंडा होता था एवं जम्मू -कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता था।
लेकिन गृह मंत्री अमित शाह ने आज संसद में इस अनुच्छेद को ख़त्म करने घोषणा कर दी है। इससे पहले प्रधानमंत्री के आवास पर कैबिनेट की बैठक हुई। नए बिल के अनुसार जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन किया जाएगा। जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा। जम्मू-कश्मीर एक केंद्र शासित प्रदेश होगा और दूसरा लद्दाख।

आर्टिकल 370 समाप्त होने से कश्मीर में क्या-क्या बदल जाएगा?
कोई भी खरीद सकेगा संपत्तिः अनुच्छेद 370 के कारण राज्य से बाहरी अब देश का कोई भी नागरिक जम्मू-कश्मीर में संपत्ति खरीद पाएगा।
अब अलग झंडा नहींः
जम्मू-कश्मीर का अपना अलग झंडा भी था। वहां सरकारी दफ्तरों में भारत के झंडे के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर का झंडा भी लगा रहता था। भारत के तिरंगे के अपमान को आधिकारिक तौर अपमान नहीं माना जाता था। लेकिन अब जम्मू-कश्मीर में अलग झंडा नहीं रहेगा। यानी राष्ट्रध्वज भारत का तिरंगा रहेगा।
बाकी देश की तरह जम्मू-कश्मीर में लागू होगा हर कानूनः
आर्टिकल 370 के कारण देश की संसद को जम्मू-कश्मीर के लिए रक्षा, विदेश मामले और संचार के सिवा अन्य किसी विषय में कानून बनाने का अधिकार नहीं था। साथ ही, जम्मू-कश्मीर को अपना अलग संविधान बनाने की अनुमति दी गई थी। लेकिन अब यह सब बदल गया है।
राज्यपाल का पद खत्म:
राज्यपाल का पद खत्म हो जाएगा। इसके साथ ही राज्य की पुलिस केंद्र के अधिकार क्षेत्र में रहेगी एक संघ शाषित क्षेत्र की तरह।
नहीं लागू होती थी धारा 356:
जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती थी। इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य सरकार को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं था। यानी, वहां राष्ट्रपति शासन नहीं, बल्कि राज्यपाल शासन लगता था। लेकिन चूंकि जम्मू-कश्मीर अब केंद्र शासित राज्य होगा, तो अब यह स्थिति भी बदल गई है।
धारा 370 को खत्म करने के भारत सरकार के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस को छोडकर अधिकांश भारतीय नेताओं ने इसे सही कदम बताया है वहीं पीडीपी प्रमुख और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने मोदी सरकार के फ़ैसले को भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला दिवस क़रार दिया है। उन्होंने ट्वीट किया है कि भारत सरकार का अनुच्छेद 370 को हटाने का फ़ैसला ग़ैर-क़ानूनी और असंवैधानिक है और इससे जम्मू-कश्मीर में भारत की मौजूदगी एक क़ब्ज़ा करने वाली सेना की हो गई है। उन्होंने ये भी कहा कि 1947 में विभाजन के समय जम्मू-कश्मीर के नेतृत्व ने टू-नेशन सिद्धान्त को ख़ारिज करते हुए भारत सरकार के साथ जाने का जो फ़ैसला किया था आज उसका उलटा असर हुआ है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह मोहम्मद क़ुरैशी ने अनुच्छेद 370 ख़त्म करने पर कहा, ''भारत ने बहुत ख़तरनाक खेल खेला है। इसके असर पूर इलाक़े पर बहुत भयानक हो सकते हैं. इमरान ख़ान पूरे मसले को समाधान की तरफ़ ले जाना चाहते थे लेकिन भारत ने अपने फ़ैसले से मामले को और जटिल बना दिया है। कश्मीरियों को पहले से ज़्यादा क़ैद कर दिया गया है। हमने इस मामले में संयुक्त राष्ट्र को सूचित कर दिया था। हमने इस्लामिक देशों को भी सूचित कर दिया है। सभी मुसलमान मिलकर कश्मीरियों की सलामती की दुआ करें। पाकिस्तानी कौम पूरी तरह से कश्मीरियों के साथ है।''

कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें
और राष्ट्रीय ख़बरें