ENGLISH HINDI Wednesday, August 21, 2019
Follow us on
राष्ट्रीय

भटके हुये लोग इस्लाम नहीं, इस्लाम वतन को जोड़कर रखने का संदेश है

August 05, 2019 09:15 PM

ऋषिकेश/दिल्ली (ओम रतूड़ी)
नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में हुये अमनो एकता सम्मेलन में परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कहा कि राष्ट्र भावना और राष्ट्रीयता की मशाल को अपने दिलों में जाग्रत रखे ताकि भारत की अस्मिता पर कभी आंच न आने पाये। अपने दिलों में मोहब्बत और भाईचारा की भावना को बनायें रखे। अपने दिलों को नफरत का दरिया न बनायें बल्कि मोहब्बत, भाईचारे, शान्ति, एकता और अमन का समन्दर बनायें।
सम्मेलन की अध्यक्षता हज़रत मौलाना क़ारी सय्यद मुहम्मद उस्मान, साहब मंसूरपूरी, अध्यक्ष ज़मीयत उलमा-ए-हिन्द ने किया।
ज़मीयत उलेमा हिन्द के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि समाज में शान्ति, एकता और सद्भाव बनाने के लिये अमनो एकता सम्मेलन का आयोजन किया गया।
इससे पहले स्वामी चिदानन्द ने कहा कि देश में कहीं भी न दूरंगी नीति होगी न दूरंगा रंग होगा। हमें अपने वतन के लिये जीना, वतन को चमन बनाने के लिये, वतन में अमन लाने के लिये और हर भारतीय में देशभक्ति जगाने के, लिये कौमी एकता के लिये सबको मिलकर प्रयत्न करना होगा तभी हम अपने राष्ट्र में अमन, शान्ति और एकता की स्थापना कर सकते है।
उन्होंने कहा कि हमें जिम्मेदारी लेनी होगी कि आईएसआई या कुछ ऐसे भटके हुये लोग जो कुछ भी ऐसा करते है तो हमें कहना होगा कि यह इस्लाम नहीं है ताकि लोगों को सही संदेश जाये। उन्होने कहा कि इस्लाम वतन को जोड़ कर रखने का संदेश देता है; सब की सलामती का संदेश देता है; वतन की सलामती का संदेश देता है। आज इस मंच से हम कह दें पूरे विश्व को कि इस्लाम सब की सलामती चाहता है, क्योकि एकता की आवाज में बहुत बड़ी ताकत है, उस ताकत को समझें। स्वामी चिदानन्द ने कहा कि शक से नही, शिकायतों से नही बल्कि हक से कहे कि यह वतन हमारा है।
हज़रत मौलाना क़ारी सय्यद मुहम्मद उस्मान, साहब मंसूरपूरी ने कहा कि वर्तमान समय में देश की बदलती हुई सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि में, जिसमें देश के मिले जुले सामाजिक ताने-बाने, धार्मिक सहिष्णुता, साम्प्रदायिक सद्भाव, अमन और शान्ति पर आधारित चिरकालीन व्यवस्था को ध्वस्त करने की कोशिशें की जा रही है। यह हम सभी की साझा जिम्मेदारी है कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच भाईचारें, सद्भाव, सौहार्द, अमन, शान्ति और एकता को बनायें रखने के लिये हर सम्भव प्रयास करें ताकि विध्वंसक तत्वों की साजिशें नाकाम हों और इस हेतु विभिन्न धर्मों की विचारधाराओं को एक साथ लाकर अनेकता में एकता और आपसी मेलजोल को बनाया रखा जा सके।
स्वामी चिदानन्द ने अमन और एकता सम्मेलन में आये विद्धानों को पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट करते हुये पानी, पेड़ और प्रकृति को सुरक्षित रखने का संदेश दिया। उन्होने कहा कि वतन की शान्ति और अमन के लिये अपना समर्पण और सेवा सदैव बनायें रखे जिससे वतन में समृद्धि की रोशनी सदैव फैलती रहे। उन्होने कहा कि कब तक पंचर लगाते रहेंगे अब समय आ गया है कि वतन की एकता को कोई पंचर न करे इसका ध्यान रखे। उन्होने कहा कि हम सभी अपने-अपने क्षेत्र में जो भी करते है उसे देश की सेवा समझते हुये; वतन की सेवा समझते हुये इस्लाम के सच्चे अर्थ को अपने जीवन का हिस्सा बनाते हुये आगे बढे। उन्होने कहा कि यह अमन, शान्ति और एकता की यात्रा है अतः मेरा वतन मेरी शान, मेरा वतन मेरी जान इस विचार से आगे बढ़े और देश की सेवा करें।

कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें
और राष्ट्रीय ख़बरें