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तम्बाकू से देशभर में प्रति वर्ष 1.3 मिलियन मौतें

August 11, 2019 06:46 PM

शिमला, (विजयेन्दर शर्मा) भारत में तंबाकू की समस्या एक चिंता का विषय है, हमारे देश में तंबाकू उपभोक्ताओं की संख्या 267 मिलियन के आंकड़े को पार कर गई है भयावह बात यह है कि हर एक मिनट में तंबाकू से संबंधित बीमारियों के कारण पांच लोगों की मौत हो जाती है एक अनुमान के मुताबिक़ विश्व भर में धूम्रपान करने वालों में से 11.2 फीसदी लोग भारत में रहते हैं ऐसे में यह चीन के बाद सबसे अधिक धूम्रपान करने वाला देश है सिगरेट के धुयें से कई तरह की बीमारियाँ होती है जैसे कि फेफड़ों का कैंसर परिधीय धमनी रोग, क्रॉनिक ऑब्सेट्रक्टिव लंग डिजीज और हृदय रोग आदि, धूम्रपान करने वालों में से करीब पचास फीसदी तो असमय ही धुंए से संबंधित रोग के कारण मर जाते हैं ग्लोबल टोबैको एटलस के मुताबिक भारत में ज्वलनशील सिगरेट पीने की आर्थिक लागत वर्ष 2018 में लगभग 27.93 बिलियन डॉलर थी। अगस्त 2018 तक के हिसाब से यह भारत के जीडीपी का 1% होता है और भारत सरकार के लिए यह निःसंदेह एक बड़ा भारी बोझ है।
अनुमान बताते है कि अगर ऐसे ही धूम्रपान की दर जारी रही तो 21वीं सदी में धूम्रपान से संबंधित रोगों के कारण एक अरब लोगों की मौत हो जाएगी। विश्व भर में ज्वलनशील सिगरेट पीने वालों का लगभग 11.2% भारत में निवास करता है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि इस विकराल समस्या के समाधान के लिए कुछ सुरक्षित विकल्पों पर विचार किया जाये जिस से कि लोगो को इस समस्या से मुक्त किया जा सके, विभिन्न अनुसंधानों और अनुभवों से यह प्रमाणित हो चूका है कि ई.सिगरेट धूम्रपान को छुड़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, और यह पारम्परिक धुए वाली सिगरेट के मुकाबले 95 प्रतिशत कम हानिकारक है। आमिर उल्लाह खान, देश के प्रमुख अर्थशास्त्री और एक्विटास में अनुसंधान निदेशक और इस विषय के जानकर ने बताया कि उपलब्ध वैज्ञानिक सबूतों के अनुसार यह बिल्कुल स्पष्ट है कि वैपिंग स्मोकिंग के जोखिम का फ्रैक्शन भर है यह 95 प्रतिशत कम हानिकारक है और बायस्टैंडर्स को इसका कतई जोखिम नहीं होता है, इसलिए ई.सिगरेट को बेन करना लोगो को एक सुरक्षित विकल्प से वंचित करेगा ऐसे समय में जब भारत में ई.सिगरेटों को लेकर संदेह काफी बढ़ रहा है हमें स्मोकर्स तक इतनी विश्वसनीय सूचना पहुंचानी चाहिए कि वे उस पर विश्वास कर सकें नियम बनाते समय ई.सिगरेट और आम सिगरेट के जोखिमों पर विचार करना महत्वपूर्ण है इस तरह के वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध हैं जो साबित करते हैं कि पारंपरिक सिगरेट के मुकाबले ई.सिगरेट उल्लेखनीय रूप से कम नुकसानदेह है ऐसे में लाखों सिगरेट पीने वालों के लिए एक सही विकल्प को सिरे से नकार देना दुर्भाग्यपूर्ण है, स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि लोगों को सिगरेट की जगह कम हानिकारक सब्सिट्यूट का रुख करना चाहिए, यदि आप सार्वजनिक बेहतर स्वास्थ्य लाभ के दृष्टिकोण से देखते हैं तो अधिक जहरीली सिगरेट तक पहुंच रखने वाले लोगों के लिए कम नुकसानदेह ई सिगरेट को बैन करना निहायत ही बेतुका तर्क है भले ही सरकार युवाओं द्वारा उपयोग किए जाने वाले ई.सिगरेट के प्रभाव गुणवत्ता मानकों निकोटीन सामग्री, विपणन, प्रचार और लेबलिंग के बारे में चिंतित है लेकिन हमें प्रतिबंध लगाने के बजाय श्रेणी को विनियमित करके इस समस्या को संबोधित करना चाहिए। हमें इ.सिगरेट का स्पष्ट मूल्यांकन देखना चाहिए। व्यावहारिक पद्धतियों के अध्ययन से लेकर विशेषज्ञों से बातचीत और वर्तमान वैज्ञानिक शोध पद्धतियों तक हमें पूरी श्रृंखला को ख़ारिज नहीं कर देना चाहिए वह भी तक जब वह एक व्यावहारिक विकल्प हो। एक मजबूत नियम वाली सरकार यह तय करे कि सिर्फ जिम्मेदार खिलाडी अपने उत्पादों के साथ बाजार में प्रवेश करें जो उपभोग के जरूरी मापदंडों पर खरे उतरते हों और अन्य आवश्यक नियमों से तारतम्य रखते हों। प्रतिबन्ध एक प्रकार से उपभोक्ता के अधिकार का न सिर्फ उल्लंघन है बल्कि इससे भारत में अवैध बिक्री बढ़ने का भी खतरा है जबकि देश पहले से ही अवैध सिगरेट बिक्री के बोझ से दबा है और एक चौथाई अवैध सिगरेटों की बिक्री जारी है।

 
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