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राष्ट्रीय

जैविक खेती को बढ़ावा देना नितांत आवश्यक

August 22, 2019 07:56 PM

ऋषिकेश (ओम रतूड़ी) विश्व बैंक की रिपोर्ट के आधार पर भारत में दुनिया के 1/3 से ज्यादा कुपोषित बच्चे हैं। वर्ष 2017 के ग्लोबल हंगर इण्डेक्स के अनुसार भारत 118 देशों में 97 वें स्थान पर है। हाल ही में हुये सर्वे के आधार पर देश भर के 170 कुपोषित जिलों की सूची में उत्तराखण्ड राज्य के चार जिलों का नाम शामिल है।
यह कहना है परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द का। वीरवार को योगगुरू स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण से लोक कलाकारों की कला को पोषित करने, जैविक खेती, कुपोषण, वेदशाला और योग पर हुई विशेष चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि शुद्ध वातावरण और स्वच्छ जल का प्रभाव भी अनाज पर भी पड़ता है। सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि लेकिन कुपोषण की स्थिति में सुधार लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने वर्ष 2022 तक देश को कुपोषण मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है, अतः इस लक्ष्य को हासिल करने के लिये सरकार के साथ जन समुदाय की सहभागिता भी अतीव आवश्यक है, और जैविक खेती को बढ़ावा देना नितांत आवश्यक है।
योगगुरू स्वामी रामदेव ने कहा कि लोक कला को जिंदा रखना नितांत आवश्यक है, क्योकि इसके माध्यम से लोक कलाकार प्रकृति के हृदय को गुनगुनाता है।
वार्ता में साबरमती आश्रम के व्यवस्थापक जयेश भाई, गुजरात राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और अनार बेन भी मौजूद रही।
चर्चा के दौरान स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि ’’भारत की संस्कृति और कला अद्भुत है। आज के परिदृश्य में संचार के माध्यम तो बढ़े हैं परन्तु कहीं न कहीं हम हमारी लोक संस्कृति को खो रहे हैं, जबकि लोक संस्कृति के माध्यम से हम आसानी से अपने संस्कारों को जिंदा रख सकते हैं और आगे आने वाली पीढ़ियों में उन संस्कारों को स्थापित कर सकते हैं। आज पूरे भारत में लोक कलाकार अपनी कला को जिंदा रखने के लिये और दूर तक पहुंचाने की प्रतीक्षा में रहते हैं।
स्वामी चिदानन्द ने जैविक खेती के विषय में चर्चा करते हुये कहा कि जैविक इन्डिया, जय हो इण्डिया। जैसा खायेे अन्न, वैसा बने मन। अतः जैविक खायें और जीवंत बने रहें। जैविक वस्तुओं में पोषण की गुणवत्ता अधिक होती है। उत्तराखण्ड में अनेक तरह के अनाज और दाले होती हैं, मुझे तो लगता है कि यहां के शुद्ध वातावरण और स्वच्छ जल का प्रभाव भी यहां के अनाज पर भी पड़ता है। दुनिया के समृद्ध देशों में शुमार भारत, सन 1947 के बाद से अब तक कुपोषण की समस्या से नहीं उबर पा रहा है। विश्व खाद्य संगठन की रिपोर्ट के आधार पर हर सांतवा व्यक्ति भूखा सोता है। विश्व भूख सूचंकाक में भारत का 67 वां स्थान है। देश में हर साल 25.1 करोड़ टन खाद्यान्न का उत्पादन होता है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार देश में 38.4 प्रतिशत बच्चे कम ग्रोथ के शिकार है जो निश्चित ही चिंतन का विषय है।
केन्द्र सरकार ने वर्ष 2022 तक देश को कुपोषण मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है, अतः इस लक्ष्य को हासिल करने के लिये सरकार के साथ जन समुदाय की सहभागिता भी अतीव आवश्यक है, और जैविक खेती को बढ़ावा देना नितांत आवश्यक है।

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