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राष्ट्रीय

महिलाओं को स्तन कैंसर के प्रति जागरूक किया

August 27, 2019 08:34 PM

ऋषिकेश, ओम रातुड़ी: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश और मैना फाउंडेशन ट्रस्ट, अमेरिका के संयुक्त तत्वावधान में मुनिकीरेती के शीशमझाड़ी में महिलाओं के लिए स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किया गया, जिसमें महिलाओं को स्तन कैंसर के प्रति जागरुक किया गया और उनकी जांच की गई। एम्स संस्थान की ओर से महिलाओं में बढ़ते ब्रेस्ट कैंसर के मामलों के मद्देनजर जनजागरुकता अभियान शुरू किया गया है, जिसके तहत विभिन्न क्षेत्रों में स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। मुनिकीरेती के शीशमझाड़ी में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में एम्स के चिकित्सकों की टीम ने महिलाओं का स्तन परीक्षण किया और उन्हें ब्रेस्ट कैंसर को लेकर जागरुक किया। इस अवसर पर अपने संदेश में एम्स निदेशक प्रोफेसर कांत ने कहा कि महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, उन्होंने इसकी वजह महिलाओं में जागरुकता के अभाव को बताया। निदेशक एम्स ने बताया कि महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरुक करने के उद्देश्य से एम्स ऋषिकेश की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में इस तरह के जनजागरुकता शिविरों का आयोजन किया जा रहा है,जिससे महिलाओं को जागरुक किया जा सके। उन्होंने बताया कि संस्थान में महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच के लिए स्पेशल ब्रेस्ट क्लिनिक का संचालन किया जा रहा है, जिसमें महिलाएं अपनी स्तन संबंधित समस्याओं की जांच करा सकती हैं । शिविर में कम्यूनिटी एंड फेमिली मेडिसिन विभाग की डा. मीनाक्षी खापरे ने महिलाओं का सघन परीक्षण किया और उन्हें स्तन कैंसर के लक्षण, कारण व निवारण की जानकारी दी। इस दौरान 50 महिलाओं की जांच की गई, जिनमें से 8 रोगियों के स्तन में गांठ पाई गई,जिन्हें उपचार के लिए एम्स, ऋषिकेश रेफर किया गया। उन्होंने बताया कि मुहिम के तहत ढालवाला व नरेंद्रनगर क्षेत्र की महिलाओं को स्तन कैंसर को लेकर जागरुक किया जा रहा है। बताया कि एम्स में प्रो. बीना रवि की देखरेख में संचालित स्पेशल ब्रेस्ट कैंसर क्लिनिक में भी महिलाएं अपने स्वास्थ्य की संपूर्ण जांच करा सकती हैं। उन्होंने बताया कि काफी संख्या में स्तन कैंसर से ग्रस्त मरीज आते हैं, जिनमें अधिकतर मरीज आखिरी स्टेज में होते हैं। लिहाजा उनका उपचार करना मुश्किल हो जाता है। उनका कहना है कि यदि महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरुक रहें तो इस तरह के जटिल रोगों का पता पहली स्टेज में ही लग जाता है। बताया गया कि महिलाओं को इस तरह की जांच प्रति दो वर्ष में अवश्य करानी चाहिए। ऐसे में यदि उन्हें कैंसर से संबंधित संकेत मिलें तो उसका पता मामोग्राफी के जरिए लगाया जा सकता है।

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