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हरियाणा

प्रदेशभर के ग्रामीण सफाई कर्मचारी हड़ताल पर, सिरसा में जोरदार प्रदर्शन

August 27, 2019 09:20 PM

सिरसा, सतीश बांसल: उत्तर प्रदेश की तर्ज पर सफाई कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करने, जब तक नियमित न हों तब तक 18 हजार रुपए न्यूनतम वेतन देने, 2000 की बजाय 400 की आबादी पर एक कर्मचारी की नियुक्ति, पी.एफ. व ईएसआई की सुविधा प्रदान करने, सफाई कर्मचारियों को सभी प्रकार के अवकाश देने और बेगार प्रथा पर रोक लगाने, काम के नियम तय करने, हर माह की 7 तारीख तक वेतन देने तथा बकाया वेतन व वर्दी भत्ते का तुरन्त प्रभाव से भुगतान करने जैसी मांगों के समाधान की मांग को लेकर प्रदेशभर के ग्रामीण सफाई कर्मचारी आज से तीन दिन की हड़ताल पर चले गए हैं। ग्रामीण सफाई कर्मचारियों ने नगरपालिका, नगरपरिषद और नगरनिगम के 32 हजार कर्मचारी जो आज से अपनी मांगो को लेकर हड़ताल पर चले गए हैं, उनके आंदोलन का भी पुरजोर समर्थन किया।
आज के घटनाक्रम के अनुसार सफाई कर्मचारियों ने हड़ताल के उपरान्त आज यूनियन के प्रधान सुरेश कुमार की अध्यक्षता में बी.डी.ओ. कार्यालय पर धरना दिया। हड़ताली कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी करते हुए सरकार के खिलाफ अपने गुस्से का इजहार किया। धरने का संचालन ब्लॉक सचिव सोनू ने किया। यूनियन नेताओ ने हड़ताल को सफल बताते हुए कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों का समाधान नही करती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। यूनियन के जिला प्रधान सुरेश कुमार व जिला सचिव सोनू ने ग्रामीण सफाई कर्मचारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि यूनियन ग्रामीण सफाई कर्मियों की जायज मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रही है। कई बार पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ के झज्जर स्थित आवास पर प्रदर्शन कर चुके हैं और 7 मार्च 2018, 27 जून 2018, 3 जुलाई 2018 और 6 जनवरी 2019 सहित कई बार विभाग के आला अधिकारियों के साथ भी वार्ता हो चुकी है। पूर्व में हुए आंदोलन के दबाव में हुई वार्ता में 13500 रुपये वेतन देने, पी.एफ., ई.एस.आई. लागू करने, साल में चार वर्दी देने, काम के औजार दिए जाने व हर माह की 7 तारीख तक वेतन भुगतान करने की सहमति बनी थी जिसकी घोषणा 4 जुलाई 2018 को सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष रामावतार वाल्मीकि ने रोहतक में की थी। इस घोषणा को एक साल बीत जाने के बाद भी आज तक सरकार ने इसे लागू नही किया। सरकार ने एक हजार रुपए मानदेय और एक हजार रुपए वर्दी भत्ते में बढ़ोतरी की है जो ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। सरकार के इस रुख से साफ होता है कि सरकार कर्मचारियों से काम तो लेना चाहती है लेकिन देना कुछ नही चाहती। इससे एक और बात भी स्पष्ट होती है कि सरकार को आंदोलन की बात ही समझ में आती है।
उन्होंने सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा की भाजपा ने सत्ता में आने से पहले अपने घोषणा-पत्र में वादा किया था कि सफाई कर्मियों को 15000 रुपये वेतन दिया जाएगा लेकिन 5 साल सत्ता में होने के बाद भी इस वायदे को पूरा नहीं किया है। कांग्रेस के राज में वर्ष 2013 में शहरी और ग्रामीण सफाई कर्मियों को एक समान 8100 रुपये वेतन मिलता था, लेकिन आज सरकार ने भेदभाव पैदा करते हुए ग्रामीण सफाई कर्मियो को 11 हजार और शहरों में ठेके पर काम करने वाले कर्मियो को 13500 रुपये दिए जा रहे है जो ग्रामीण सफाई कर्मियों के साथ अन्याय है। यूनियन नेताओं ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि कल 28 अगस्त को पंचायती राज मंत्री के साथ होने वाली यूनियन नेताओं की वार्ता में ग्रामीण सफाई कर्मियों की मांगो और समस्याओ का तुरन्त समाधान किया जाना चाहिए अन्यथा आंदोलन और तेज होगा और भाजपा को आगामी विधानसभा चुनावों में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

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