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पंजाब

जीरकपुर में बिना मंजूरी चल रहे होटलों से लोग परेशान , नक्शा पास करवाया शोरूम का चल रहा कारोबार होटल का

September 05, 2019 09:21 PM

जीरकपुर, जीएस कलेर

राष्ट्रीय राजमार्गों पर कतार से एक के बाद एक कागजों में शोरूम का नक्शा पास करवा चल रहे होटल आपका ध्यान खींचेंगे। राहगीरों को भले ही ये इमारत आसानी से नजर आती हैं, लेकिन नगर काउंसिल की आंखों से ये इमारत छुपी हुई है। इलाके में नियमों का उल्लंघन कर इनका निर्माण किया गया।

  आलम यह है कि नगर काउंसिल में मौजूद जनप्रतिनिधि इस मामले को लेकर ढुलमुल रवैया अपनाए हुए हैं, वहीं अधिकारी इस मसले पर चुप्पी साधे हुए हैं। क्षेत्र की जनता रिहायशी इलाके में बने इन होटलों से हो रही अव्यवस्था की मार झेलने को मजबूर है।

क्षेत्र के निवासियों का कहना है कि मास्टर प्लान के प्रावधानों के अनुसार रिहायशी क्षेत्र में 15 मीटर से अधिक ऊंचाई की इमारतों के बनने पर रोक लगाई गई है। यह निर्माण भी तभी मंजूर किया जाएगा जबकि बेसमेंट में पार्किग का प्रावधान हो, लेकिन इस इलाके में इस मानक का धड़ल्ले से उल्लंघन हो रहा है। पार्किंग की समस्या का आलम यह है कि सड़क का अच्छा खासा हिस्सा पार्किंग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इन सभी तथाकथित होटलों में किसी में भी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगा है, जो कि शहर का सीवरेज व पानी का धड़ल्ले से व्यावसायिक इस्तेमाल कर रहे है। इन होटल्स की वजह से अक्सर इन क्षेत्रों की सीवरेज लाइंस चोक रहती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मास्टर प्लान में उल्लंघन का पूरा खेल नगर काउंसिल अधिकारियों व बिल्डरों के बीच सांठगांठ का नतीजा है। इन्हें अनधिकृत कॉलोनियों या सड़क किनारे हो रहे छोटे से छोटा अवैध निर्माण नजर आता है, लेकिन संगठित तौर पर जीरकपुर में बने होटलों के बारे में सब कुछ जानने के बाद भी अनदेखा कर दिया जाता है।
गेस्ट हाउस के नाम पर चल रहे होटल :

नियमों के मुताबिक रिहायशी क्षेत्र में होटल को नहीं बल्कि गेस्ट हाउस संचालन को मंजूरी दी जाती है, लेकिन जीरकपुर इलाके में काउंसिल की ओर से लाइसेंस भले ही गेस्ट हाउस के लिए दिया गया हो पर इस लाइसेंस की आड़ में होटल का कारोबार चल रहा है। गेस्ट हाउस का इस्तेमाल जहां सिर्फ सीमित स्तर पर विश्राम के लिए होता है वहीं होटल में विश्राम व खानपान दोनों का प्रावधान है।

जीरकपुर में अधिकांश जगहों पर गेस्ट हाउस नहीं बल्कि होटल संचालित किए जा रहे हैं। नियम यह है कि होटल केवल कमर्शियल एरिया में संचालित किए जा सकते हैं। होटल संचालन से जुड़े और भी कई नियम हैं जिनकी यहां धज्जियां उड़ाई जाती हैं। मास्टर प्लान के मुताबिक होटल के लिए ली गई जमीन के कुल क्षेत्रफल के 30 फीसद हिस्से में ही निर्माण की इजाजत है, लेकिन यहां रत्ती भर भी जगह छोड़ने को कोई राजी नहीं है। सूत्रों की माने तो काउंसिल के कागजों में यह शोरूम है पर प्रैक्टिकल में इसे होटल का रूप दे दिया गया जहाँ अग्निशमन मानकों से लेकर म्यूनिसिपल बाइलॉज मानकों को ठेंगा दिखाया जा रहा है।

रिहायशी इलाके में चल रहे अवैध होटलों से जुड़ी समस्या को काउंसिल की बैठकों में आज तक नहीं उठाया गया। अधिकारी अक्सर यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि जमीनी सर्वे से जुड़ा कार्य काफी मुश्किल हो चुका है। वे यह कहकर बचाव कर लेते हैं कि काउंसिल के पास लाइसेंस की मंजूरी से पहले ही इनके पास पुलिस, अग्निशमन व अन्य विभागों की मंजूरी हासिल हो जाती है। ऐसे में नगर काउंसिल के पास करने के लिए कुछ खास नहीं रह जाता है। बावजूद इसके हमारी कोशिश है कि लाइसेंस उन्हें ही मिले जो कानून से जुड़े सभी प्रावधानों को पूरा करते हैं।

जहां भी आरोप है उसे दूर किया जाएगा। -कुलविंदर सोही, प्रधान नगर काउंसिल जीरकपुर

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