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पंजाब

छत्त गांव में सहकारी सभा चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया,उदयवीर सिंह ढिल्लों सहित कांग्रेस के 11 मैंबर निर्विरोध जीते

September 12, 2019 08:06 PM

ज़ीरकपुर, जेएस कलेर

छत्त गांव में सहकारी सभा के सदस्यों की चुनाव को लेकर उस समय पर माहौल तनावपूर्ण हो गया जब अकाली दल के उम्मीदवारों के नामज़दगी फार्म रद्द कर दिए गए। अकाली दल के उम्मीदवारों के नामज़दगी पत्र रद्द होने बाद में चुनाव अधिकारी की ओर से कांग्रेस पार्टी से जिला प्रधान दीपइन्दर सिंह ढिल्लों के लड़के उदयवीर सिंह ढिल्लों सहित 11 उम्मीदवारों को बिना मुकाबलो के विजेता घोषित कर दिया गया।

 दूसरी ओर हलका विधायक एन.के. शर्मा सहित अकाली दल के उम्मीदवारों ने चुनाव आधिकारियों पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए राजनैतिक दबाव में नामज़दगी पत्र रद्द करने का आरोप लगाते हुए पंजाब सरकार के विरुद्ध ज़ोरदार नारेबाज़ी की।
कांग्रेस से चुने गए 11 सदस्यों में लोहगढ़ से उदयवीर सिंह ढिल्लों, सतपाल सिंह, परमजीत कौर, गुरचरन सिंह, प्यारा सिंह, हरपाल सिंह, सुखदेव सिंह, अमरजीत कौर, कृष्ण गोपाल, जतिन्दर सिंह, निरमैल सिंह शामिल हैं।

इस मौके हलका विधायक एन.के. शर्मा ने पंजाब सरकार ख़िलाफ़ रोष व्यक्त करते आरोप लगाया कि जिला कांग्रेस प्रधान दीपिन्द्र सिंह ढिल्लों न कभी मैंबर पार्लियामेंट और न कभी विधायक की चुनाव जीते हैं। परन्तु अब 600 वोटों वाली सहकारिता सभा की चुनाव में मुकाबला करने के बजाए धक्केशाही के साथ अपने लड़के को जितवाया. उन्होंने आरोप लगाया कि इतने छोटे स्तर के चुनावों में धक्केशाही करने के लिए गाँव को पूरी तरह पुलिस छावनी में तबदील किया हुआ था। अकाली दल के 11 उम्मीदवारों और 11 कवरिंग कैंडिडेट्स की ओर से नामज़दगी दाख़िल की गई थी परन्तु चुनाव अधिकारी की ओर से राजनैतिक दबाव के चलते सभी नामज़दगी पत्र रद्द करते कांग्रेस के उम्मीदवारों को विजेता करार दे दिया जो लोकतंत्र का अपमान है। उन्होंने इस धक्केशाही ख़िलाफ़ अदालत का दरवाज़ा खटखटाने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीति का इससे निचला स्तर नहीं हो सकता कि कांग्रेसी नेता अपने लड़के को जितवाने के लिए इतनी निचले स्तर की राजनीति कर सकते हैं।
इस मौके  उदयवीर  सिंह ढिल्लों ने अकाली दल की ओर से लगाए धक्केशाही के आरोपों को खारिज करते कहा कि आज से पहले कभी भी सहकारी सभा की चुनाव नहीं हुआ बल्कि हलका विधायक अपने दफ़्तर में बैठकर सदस्यों का नाम फ़ाईनल कर देते थे। परन्तु पहली बार कांग्रेस ने यह चुनाव करवाए हैं जिनमें अकाली दल के किसी भी उम्मीदवार की ओर से नियमों की पालन करते हुए सही नामज़दगी पत्र दाख़िल नहीं किये जिन्हें नियमों मुताबिक रद्द कर दिया।

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