राष्ट्रीय

'इंजीनियर्स, आन्तरिक इंजीनियरिंग पर भी ध्यान दें'

September 15, 2019 05:10 PM

ऋषिकेश, (ओम रतूड़ी ) 

रविवार को इंजीनियर्स डे (अभियन्ता दिवस) के अवसर पर अभियंताओं को शुभकामनायें देते हुये परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि इंजीनियर्स, बाह्य इंजीनियरिंग के साथ आन्तरिक इंजीनियरिंग पर भी ध्यान दें। धरती पर भगीरथ पहले इंजीनियर थे जिन्होने भागीरथी गंगा को धरती पर लाया था। इस अवसर पर स्वामी जी ने भारत के महान अभियन्ता और भारत रत्न श्री मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को याद करते हुये कहा कि वे भारत के महान इंजीनियरों में से एक थे। इंजीनियर्स का आधुनिक भारत की रचना और भारत को नया स्वरूप प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने इंजीनियर्स डे (अभियन्ता दिवस) के अवसर पर देश की उन्नति में अपना बहुमूल्य योगदान देने वाले अभियन्ताओं को शुभकामनायें दी

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने आचार्य पुंडरीक गोस्वामी से वृन्दावन में यमुना जी की विशेष आरती का आयोजन, ब्रह्मान्ड घाट रमनरेती में विगत वर्ष शुरू की यमुना आरती के वार्षिकोत्सव समारोह का आयोजन हेतु चर्चा, यमुना स्वच्छता, पर्यावरण एवं जल संरक्षण, वृक्षारोपण, वृन्दावन के घाटों का सौन्द्रर्यीकरण जैसे अनेक विषयों पर वार्ता भी की। उन्होंने कहा कि कथाओं और भण्डारों के अवसर पर अक्सर एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग किया जाता है उसे पूर्ण रूप सेे प्रतिबंधित किये जाने की जरूरत है इस हेतु जागृति लाना आवश्यक है।

उन्होने कहा कि एकल उपयोग प्लास्टिक के स्थान पर ईको फ्रेंडली दोने-पत्तल का उपयोग किया जाना चाहिये इससे स्थानीय लोगों को रोजगार भी प्राप्त होगा। डिस्पोजेबल प्लास्टिक जो सिर्फ एक बार उपयोग किया जाता है अर्थात उसका पुनर्नवीनीकरण नहीं होता इसमें प्लास्टिक की थैलियां, पानी और सोडा की बाॅटल भी है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार विश्व स्तर पर प्लास्टिक उत्पादन में प्रतिवर्ष 320 मिलियन टन की वृद्धि हो रही है जिसमें केवल 9 प्रतिशत रिसाइक्लिंग के लिये जाता है और 12 प्रतिशत या तो जला दिया जाता है या फिर फेंक दिया जाता है।

ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि 100 मिलियन टन प्लास्टिक समुद्र और महासागरों में चला जाता है और 80 से 90 प्रतिशत प्लास्टिक भूमि आधारित स्रोत्रों से आता है। उन्होने कहा कि प्लास्टिक पहले नदियों को मृतप्राय बनाता है और फिर महासागरों को प्रदूषित करता है। अतः सोशल रिस्पांसिबिलिटी’ (सीएसआर) की तरह ’कथाकार सोशल रिस्पांसिबिलिटी’ (केएसआर) के तहत यमुना सहित देश की अन्य नदियोें की स्वच्छता मुहिम की ओर बढ़ना होगा।

आचार्य पुंडरीक गोस्वामी ने कहा कि स्वामी जी द्वारा आशीर्वाद स्वरूप भेंट किया रूद्राक्ष का पौधा भगवान गोपेश्वर की धरती पर रूद्रेश्वर का प्रतीक रोपित किया जायेगा। दोनों ने विश्व स्तर पर जल की आपूर्ति हेतु विश्व ग्लोब का जलाभिषेक किया तथा आगे आने वाले जल संकट के समाधानों पर चर्चा की कि कैसे जल शक्ति-जन शक्ति बने तथा जल जागरण जन जागरण बने।

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