पंजाब

370 हटाने का विरोध करने वालों के आगे अड़ गए शिव सैनिक

September 16, 2019 11:19 AM

फाजिल्का (गौरव मित्तल/संदीप चलाना/साजन गुगलानी): एक ओर जहां सारा देश अनुच्छेद 370 और 35-ए खत्म होने का जश्न मना रहा है वही कुछ लोग इस जश्न के माहौल में खलल डालने का प्रयास कर रहे हैं। कुछ सरकार विरोधी संगठनों द्वारा पिछले 15 दिन से गुपचुप ढंग से की जा रही सरकार के फैसले के विरोध की तैयारी का खुलासा शनिवार को तब हुआ जब किसी ने शिव सेना को सूचना दी कि कुछ कम्यूनिस्ट संगठन बार्डर रोड पर जामा मस्जिद के निकट स्थित एक धर्मशाला में आर्टिकल 370 व 35-ए हटाए जाने के विरोध में रोष मार्च निकालने और डीसी को मांगपत्र देने के लिए बैठक कर रहे हैं। देश की सरकार द्वारा लिए इस उत्साही फैसले के विरोध की सूचना मिलते ही शिव सेना के पदाधिकारियों व सदस्यों का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
शिव सेना के जिलाध्यक्ष अमन डोडा व उपाध्यक्ष उमेश कुमार ने इस बारे में जिला पुलिस प्रशासन का आगाह किया और चेतावनी दी कि अगर सरहदी नगर में देश हित में लिए फैसले का विरोध किया गया तो शिव सेना ऐसे तत्वों को किसी भी सूरत में बख्शेगी नहीं और उनका जिस हद तक हो सका विरोध किया जाएगा। शिव सेना के इस ऐलान से प्रशासन के हाथ पांव फूल गए और देखते ही देखते जिला मुख्यालय पर मौजूद पुलिस अधिकारी उक्त धर्मशाला में पहुंच गए और शिव सेना का हाई हुए पारे के मद्देनजर शहर में रोष मार्च निकालने की तैयारी में बैठे कामरेड विचारधारा वाले संगठनों को रोष मार्च निकालने से रोक दिया। डीसी को सौंपा जाने वाला मांगपत्र भी एक प्रशासनिक अधिकारी को बुलवाकर वहीं पर ले लिया गया। सूत्र बताते हैं कि देश हित में लिए फैसले का विरोध करने पर उतारू वामपंथी विचारधारा वाले लोगों के खिलाफ शिव सैनिकों में इतना गुस्सा था कि अगर पुलिस प्रशासन ने स्थिति को संभाला न होता तो दोनों पक्षों में बड़ा टकराव हो सकता था। क्योंकि आर्टिकल 370 जम्मू कश्मीर से हटाए जाने का विरोध करने वालों ने जहां सरकार के खिलाफ नारेबाजी करनी थी, वहीं सेना के खिलाफ भी नारेबाजी की आशंका थी जिसे शिव सेना ने कतई बर्दाश्त नहीं करना था और मामला खूनी भिडं़त में भी तब्दील हो सकता था।
पता चला है कि उक्त धर्मशाला में हो रही बैठक में हिंदुत्व फासीवाद विरोधी फोरम पंजाब के बैनर तले वामपंथी विचारधारा वाले किसान संगठन, विद्यार्थी संगठन, युवा संगठन, कुछ अध्यापक संगठन व कर्मचारी संगठनों के करीब 50 से 70 लोग शामिल थे और उन्होंने भारत सरकार के विरुद्ध नारेबाजी की तथा कश्मीरियों के हको को लेकर चर्चा की। लेकिन यह नारेबाजी शहर की फिजाओं में गूंजती, उससे पहले ही भारी मात्रा में पुलिस बल के साथ एसपी एच जगदीश बिश्नोई, डीएसपी जगदीश कुमार मौके पर पहुंच गए। वहीं शिव सैनिकों के भी मौके पर पहुंचने की सूचना मिलते ही पुलिस ने संभावित टकराव को भांपते हुए सूझबूझ दिखाते हुए मामला हैंडिल करने की जिम्मेवारी नगर थाना प्रभारी नवदीप भट्टी को सौंपी गई। भट्टी ने शिव सैनिकों को विश्वास में लेकर उन्हें धर्मशाला की तरफ नहीं बढऩे दिया और दूसरी तरफ विरोध प्रदर्शन की तैयारी करके बैठे वामपंथियों का रोष मार्च टाल दिया।
बड़ा सवाल...आखिर कहां सोया रहा खुफिया विभाग?
इस सारे प्रकरण में गंभीर बात ये है कि वामपंथियों द्वारा पिछले 15 दिन से पकाई जा रही विरोध की खिचड़ी का आखिरकार किसी भी बड़े अधिकारी को पता क्यों नहीं चला। पुलिस के खुफिया विभाग किस नींद में सोए रहे जिन्हें अंदरखाते हो रही बैठकों की कोई भनक ही नहीं लगी। अगर पता लग गया था तो प्रशासन ने इन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। वहीं शांतिप्रिय शहर फाजिल्का का माहौल बिगाडऩे का कारण बनने वाली इस बैठक और बैठक के बाद देश हित में लिए फैसले के विरोध में मार्च निकालने के लिए धर्मशाला कैसे उपलब्ध करवा दी गई, ये कुछ ऐसे सवाल हैं, जिनका अगर प्रशासन ने अभी से जवाब न तलाशा तो आगामी दिनों में भी सरकार या हिंदुत्व विरोधी विचारधारा माहौल खराब करने का कोई कारनामा कर सकती है।

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