ENGLISH HINDI Monday, October 21, 2019
Follow us on
 
हरियाणा

गांधी और भगत सिंह दो धाराएं जरूर थीं लेकिन उनमे संवादहीनता नहीं थी: सिद्धू

September 16, 2019 06:08 PM

सिरसा, सतीश बांसल:
सुविख्यात चिंतक, इतिहासकार और ‘अदारा 23 मार्च’ संस्था के संयोजक सुमेल सिंह सिद्धू ने कहा है कि महात्मा गाँधी ने आजीवन देशवासियों में समरसता विकसित करने के लिए काम किया और धार्मिक भेदभाव के विरुद्ध काम करते हुए शहादत दी। सिद्धू स्थानीय श्री युवक साहित्य सदन में हरियाणा ज्ञान-विज्ञान समिति सिरसा द्वारा आयोजित ‘श्री सीताराम बागला स्मृति व्याख्यान माला’ के प्रथम आयोजन में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। ‘महात्मा गाँधी की विरासत और वैकल्पिक राजनीति का निर्माण’ विषय पर बोलते हुए उन्होंने उनके जीवनकाल से लेकर वर्तमान समय तक गाँधी की प्रासंगिकता पर अपना पक्ष रखा।  

भूदानी व पूर्व विधायक सीतराम बाघला की स्मृति में व्याख्यान माला का आयोजन

डॉ० सुमेल सिंह सिद्धू ने कहा कि समाज बहसों से ही विकास पाता है और यह बहस संसद जैसी महत्वपूर्ण जगह से ही खारिज हो जाए तो समाज और देश का विकास कैसा होगा यह समझा जा सकता है। गाँधी के साथ भगत सिंह और समाजवादी धारा के लोग बहस करते रहे हैं, अम्बेडकर, पेरियार और तमाम दलित चिंतक बहस करते रहे हैं, जिन्ना और तमाम अल्पसंख्यक लोग बहस करते रहे हैं, अलग-अलग विषयों पर बहस होती रहती थी और गाँधी उनसे संवाद बनाये रखते थे। उन्होंने कहा कि यह एक जरुरी गुण है जो सत्ता के शीर्ष पर बैठे व्यक्तियों में अवशय ही होना चाहिएं। उन्होंने कहा कि हम गाँधी को पढ़ते हैं लेकिन गाँधी को जानते नहीं। हमारे बीच में से असल गाँधी गैर-हाजिर है। हम गाँधी के रामराज्य को नहीं जानते कि रामराज्य में शासन, न्याय, राजा की नैतिकता और बंधुत्व के लिए कोई जगह हो या नहीं। गाँधी की समानता का दर्शन यह है कि बेशक सब लोग समान ना हो लेकिन जुड़े रहें। उन्होंने कहा कि गाँधी का अर्थ शांति नहीं शांति के लिए संघर्ष करने का नाम गाँधी है। ऐसा आदमी इस देश में कभी पैदा नहीं हुआ और ऐसा आदमी इस देश में पैदा हुआ, यह इस देश का सौभाग्य है। उनका दर्शन है कि आंदोलन के लिए कोई जरुरी चीज है तो वह अहिंसा है। उन्होंने कहा कि गांधी का वैष्णवजन वही है जो पीर पराई जानता है, महसूस करता है। संविधान भी इसी एकमात्र भावना से ही जीवित रह सकता है।
भूदानी और पूर्व विधायक सीताराम बागला के सुपुत्र प्रवीण बागला ने अपने पिता से जुड़े संस्मरण बताये। उन्होंने कहा कि यह व्याख्यानमाला बड़े संकोच के साथ शुरू की गयी है क्योंकि पिताजी नहीं चाहते थे कि उनके किसी काम के लिए स्तुतिगान रचे जाएं। उन्होंने बताया कि सीताराम बागला ने अपनी 300 एकड़ समस्त जमीन काश्तकारों को दान दी, वे कहते थे कि जमीन का मालिक दरअसल वही होना चाहिए जो जमीन पर मेहनत करता है। उन्हें विनोबा भावे और जयप्रकाश नारायण के बारे में पता चला तो उन्होंने भूदान आंदोलन में भाग लेते हुए अपनी समस्त जमीन दान कर दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विक्रमजीत सिंह अधिवक्ता ने सीताराम बागला के जीवन और सुमेल सिंह सिद्धू के गाँधी पर रखे गए व्याख्यान पर अपनी बात रखी। श्री युवक साहित्य सदन समिति की सदस्या रेणुका प्रवीण ने सीताराम बागला जी को श्रद्धांजलि देते हुए अपने उद्गार प्रकट किये। हरभगवान चावला साहित्यकार ने ज्वलंत कविता ‘वह मारा जाएगा’ प्रस्तुत की। नारीणा सैनी ने सुरीली प्रस्तुतियां दीं, हरियाणा ज्ञान-विज्ञान समिति के संयोजक गुरबक्श मोंगा ने मंच संचालन किया, आये हुए अतिथियों का धन्यवाद उमेद सिंह लोहान ने किया।

कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें
 
और हरियाणा ख़बरें