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जीवन की सार्थकता है 'स्वार्थ से सर्वार्थ की यात्रा, परमार्थ की यात्रा'

September 19, 2019 08:19 PM

ऋषिकेश, (ओम रतूड़ी) अपने लिये जिये तो क्या जिये’’ इसलिये स्व से ऊपर हो कर ही सेवा हमारे जीवन का लक्ष्य बने। आज के समय में समाज को; पर्यावरण को और पूरी दुनिया को इसी तरह की सेवा की आवश्यकता है। "जीवन की सार्थकता है ’स्वार्थ से सर्वार्थ की यात्रा’, परमार्थ की यात्रा।
यह कहना है स्वामी चिदानन्द सरस्वती का। वर्तमान समय की सबसे बड़ी सेवा है रोटरी क्लब देहरादून के सदस्यों से चर्चा करते हुये उन्होंने कहा कि रोटरी का आदर्श वाक्य है ’सेवा स्व से ऊपर’। स्व में व्यक्ति स्वयं के लिये सोचता है कि मेरे लिये क्या, मेरे लिये नहीं तो मुझे क्या?
रोटरी वैश्विक सेवा संगठन है, जिसकी स्थापना 1905 में पाॅल हैरिस ने अन्य तीन लोगों के साथ मिलकर की थी। आज दुनिया में 32000 से अधिक रोटरी क्लब है जिसमें 13 लाख से अधिक इसके सदस्य है। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि वर्तमान समय की सबसे बड़ी सेवा है पर्यावरण और प्रकृति की सेवा क्योंकि जब तक ये शुद्ध और जीवंत बने रहेंगे तब की मानव के जीवन की कल्पना की जा सकती है। उन्होने कहा कि अगर हमें प्रदूषण मुक्त और शान्तिपूर्ण विश्व की स्थापना करनी है तो प्रत्येक व्यक्ति को इसके लिये योगदान देने की जरूरत है, अगर एक भी व्यक्ति इस बात का समर्थन नहीं करता तो स्वच्छ, प्रदूषण मुक्त और शान्त विश्व की कल्पना मात्र है।
स्वामी जी ने वातावरण में बढ़ते जल और वायु संकट पर चिंता व्यक्त करते हुये कहा कि 20 अगस्त 2019 को विश्व बैंक द्वारा ’’अज्ञात गुणवत्ता: अदृश्य जल संकट’’ नामक रिपोर्ट प्रकाशित की गयी जिसमें बताया गया कि वर्तमान समय में लगभग सभी नदियों और झीलों में प्रदूषण का स्तर इतना अधिक है कि उसमें आॅक्सीजन का स्तर लगभग खत्म हो रहा है तथा जल, जहर में तब्दील हो रहा है। दिन-प्रतिदिन जल की गुणवत्ता बिगड़ रही है जिससे मानव के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है साथ ही खाद्य उत्पादन में भी भारी कमी आ रही है। उन्होने कहा कि अब समय आ गया है कि सभी संस्थायें मिलकर संयुक्त रूप से जल और वायु को प्रदूषण मुक्त करने हेतु कार्य करे तभी हम भावी पीढ़ियों को स्वच्छ और शुद्ध वातावरण प्रदान कर सकते है।
स्वामी जी के साथ रोटेरियंस देहरादून ने विश्व स्तर पर जल की आपूर्ति हेतु वाॅटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की। स्वामी जी ने सभी को वृक्षारोपण करने तथा एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग न करने का संकल्प कराया।

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