ENGLISH HINDI Tuesday, October 22, 2019
Follow us on
 
राष्ट्रीय

क्लिनिकल रिसर्च नैदानिक अनुसंधान विषय पर कार्यशाला शुरू

September 24, 2019 07:53 PM

ऋषिकेश, (ओम रतूड़ी) एम्स ऋषिकेश में दो दिवसीय क्लिनिकल रिसर्च नैदानिक अनुसंधान विषय पर कार्यशाला शुरू हो गई। जिसमें देशभर से 60 से अधिक विशेषज्ञ व प्रतिभागी शिरकत कर रहे हैं। कार्यशाला को लेकर अपने संदेश में एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने फार्माकोलॉजी विभाग द्वारा लगातार किए जा रहे अनुसंधान से जुड़े कार्यों पर शुभकामनाएं दी। प्रो. कांत ने विभागीय टीम को भविष्य में शोध कार्यों को सततरूप से करने के लिए प्रोत्साहित किया,जिससे इसका लाभ मरीजों व आम जनता को मिल सके। एम्स ऋषिकेश में फार्माकोलॉजी विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय क्लिनिक रिसर्च कार्यशाला का डीन रिसर्च प्रो. प्रतिमा गुप्ता, पीजीआई चंडीगढ़ के प्रो. विकास मेहंदी, फार्मासिटिकल कंपनी से जुड़े डा. विनु,डा. शोएवल मुखर्जी व डा. इंद्रजीत ने संयुक्तरूप से किया। इस अवसर पर डीन रिसर्च प्रो. प्रतिमा गुप्ता ने संस्थान के फार्माकोलॉजी विभाग की ओर से किए जा रहे विभिन्न शोधकार्यों की सराहना की व कार्यशाला में शामिल हो रहे प्रतिभागियों को भविष्य में शोधकार्य के लिए शुभकामनाएं दी। एम्स के फार्माकोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. शैलेंद्र हांडू ने कार्यशाला में देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञों व विद्यार्थियों का विभाग की ओर से स्वागत किया, उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में अनुसंधान के क्षेत्र में आए बदलावों से अवगत कराया। कार्यशाला में अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर नैदानिक अनुसंधान किस तरह से करें,इसका प्रशिक्षण दिया गया।

कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें
 
और राष्ट्रीय ख़बरें
डीआरडीओ ने प्रौद्योगिकी हस्‍तातंरण से जुड़े 30 समझौते किये सुरक्षित और किफायती प्रौद्योगिकियों की दिशा में नवाचार उन्मूलन के लिए टीबी दर गिरना काफ़ी नहीं, गिरावट में तेज़ी अनिवार्य: नयी WHO रिपोर्ट बिना मानवाधिकार उल्लंघन के, व्यापार करे उद्योग: वैश्विक संधि की ओर प्रगति प्रकृति ही देगी प्लास्टिक का हल चिकित्सकों व नर्सिंग कर्मचारियों का ट्रॉमा केयर में दक्ष होना नितांत आवश्यक कूड़ा मुक्त, कुरीति मुक्त भारत बने अनुभव व नवीनतम तकनीकि ज्ञान का लाभ मरीजों को मिले: प्रो. कांत जल संरक्षण पर कार्य करने की जरूरत हिमालयी क्षेत्रों में बड़े उद्योगों के बजाय लघु उद्योगों को महत्व दिया जाये