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पंजाब

सरकार बरगाड़ी बेअदबी मामलों के ज़ब्त दस्तावेज़ और क्लोजऱ रिपोर्ट हासिल करने की हकदार; सीबीआई.अदालत ने पंजाब के अधिकार को ठहराया सही

October 05, 2019 10:14 PM

मोहाली: सी.बी.आई. की एक अदालत ने शनिवार को बरगाड़ी बेअदबी मामलों में क्लोजऱ रिपोर्ट हासिल करने के पंजाब के अधिकार को सही ठहराते हुए कहा कि सभी ज़ब्त दस्तावेज़ों समेत इस रिपोर्ट की प्रमाणित कॉपी देने के लिए अदालत की संतुष्टि के लिए ‘उपयुक्त तर्क ’ मौजूद है।

सी.बी.आई. के विशेष जज निरभौ सिंह ने विशेष जुडिशियल मैजिस्ट्रेट की तरफ से 23 जुलाई को पास किये हुक्मों के विरुद्ध राज्य सरकार की पुनरीक्षण पटीशन को मंज़ूर कर लिया। विशेष जुडिशियल मैजिस्ट्रेट ने क्लोजऱ रिपोर्ट देने की माँग करने वाली पंजाब सरकार के आवेदन को रद्द कर दिया था। इस अदालत में पुनरीक्षण पटीशन पर बहस करने के लिए दो विशेष सरकारी वकीलों राजेश सलवान और संजीव बत्रा (दोनों जि़ला अटॉर्नी) की टीम कायम करने वाले एडवोकेट जनरल अतुल नन्दा के मुताबिक सी.बी.आई. जज ने विशेष मैजिस्ट्रेट को आदेश दिया कि पंजाब सरकार को यह दस्तावेज़ मुहैया किये जाएँ। विशेष सरकारी वकीलों समेत ए.आई.जी. क्राइम सरबजीत सिंह भी पंजाब सरकार की तरफ़ से अदालत में पेश हुए।

राज्य सरकार के तर्क कि वह क्लोजऱ रिपोर्ट और ज़ब्त दस्तावेज़ों की कॉपियां हासिल करने की हकदार है, को मानते हुए अदालत ने कहा कि ‘पंजाब सिविल एंड क्रिमीनल कोर्ट्स प्रैपरेशन एंड स्पलाई ऑफ कौपीज़ ऑफ रिकार्ड रूल्ज, 1965 ’ की सम्बन्धित धाराओं के अंतर्गत फ़ौजदारी केस की पक्ष चालान की कॉपी हासिल करने की हकदार है और अगर अदालत की संतुष्टि करवाते हुए उचित तर्क मौजूद हैं तो फ़ौजदारी केस में कोई ‘अजनबी ’ व्यक्ति भी चालान की कॉपी हासिल कर सकता है।

पुनरीक्षण पटीशन को स्वीकार करते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि नियम 4(4) के मुताबिक अगर भारत में केंद्र सरकार या राज्य सरकार के किसी सरकारी अधिकारी को दफ़्तरी उद्देश्य के लिए केस की कॉपियों की ज़रूरत है तो यह मुफ़्त में दी जाएंगी। इसलिए कॉपी की माँग करने वाले आवेदन सम्बन्धी सरकार के विभागीय प्रमुख द्वारा सत्यापित की हो।

जज ने यह भी कहा कि ‘‘सी.बी.आई. का यह केस ही नहीं बनता कि क्लोजऱ रिपोर्ट या ज़ब्त किये दस्तावेज़ गुप्त हैं या नहीं और न ही सुनवाई करने वाली अदालत के सामने फ़ौजदारी आचार की धारा 173(6) अधीन कोई आवेदन दायर किया गया है, जिसमें कहा गया हो कि शिकायतकर्ता या मुलजिम को कोई दस्तावेज़ देना सार्वजनिक हित के विरुद्ध बनता है।’’

रूल 3(2) के अनुसार, अदालत को संतुष्ट करते हुए अजनबी भी ज़रुरी कारणों की सूरत में किसी चालान की नकल लेने का हकदार होता है। अजनबी शब्द की रूलों में कोई व्याख्या नहीं है और शब्दकोष के अनुसार अजनबी एक व्यक्ति है जिसको कोई नहीं जानता या जिससे कोई परिचित नहीं है। जज के फ़ैसले के अनुसार उक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए किसी मामले में पंजाब राज्य की स्थिति एक अजनबी से बेहतर है।

प्रोसीक्युशन के अनुसार पहले बेअदबी मामले में पंजाब पुलिस की तरफ से तीन एफ.आई.आर्ज़ रजिस्टर की गई परन्तु बाद में इसको जाँच के लिए पंजाब सरकार द्वारा सीबीआई को सौंप दिया गया, जिसको क्रमवार आरसी नम्बर. एस) 2015 /एससी -3एनडी तारीख़ 13.11.2015, आरसी नम्बर. एस)/2015 /एससी -3/एनडी तारीख़ 13.11.2015 और आरसी नम्बर. एस)/2015 /एससी -3/एनडी तारीख़ 13.11.2015 के तौर पर फिर से रजिस्टर किया गया, यह भी पेश किया गया कि 3 मामलों में सीसीआई की तरफ से संयुक्त क्लोजऱ रिपोर्ट दायर की गई, पंजाब सरकार की तरफ से दफ़्तरी प्रयोग के लिए संयुक्त रिपोर्ट की प्रमाणित कॉपी समेत दस्तावेज़ों की कापियों की ज़रूरत है।

प्रोसीक्युशन की तरफ से आगे पेश किया गया कि केवल जाँच को ही स्थानांतरित किया गया था और पंजाब सरकार को समय समय पर सीबीआई की तरफ से जाँच की स्थिति बारे अवगत करवाया गया। प्रोसीक्युशन की तरफ से आगे बहस करते हुए बताया गया कि 6.9.2018 को, पंजाब विधानसभा की तरफ से सीबीआई से जाँच वापस लेने के लिए एक प्रस्तावपास किया गया था और जिसके अनुसार, पंजाब सरकार की तरफ से एक नोटिफिकेशन भी जारी की गई थी,

सीबीआई से मामले की जाँच के अ्िरधकार वापस लिए गए थे। इस प्रस्ताव और नोटिफिकेशन को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई, 2019(2) आरसीआार फ़ौजदारी मामले के फ़ैसले के अनुसार, पन्ना 165, नोटिफिकेशन को सही ठहराया गया। सीबीआई की तरफ से कोई भी एस.एल.पी दायर नहीं की गई और इस प्रकार, अधिकार वापस लेने के उपरांत, सरकार की तरफ से पक्ष रखा गया कि राज्य सरकार के पास मामलों की जाँच करने सम्बन्धी पूरे अधिकार थे।

प्रोसीक्युशन की तरफ से आगे तर्क दिया गया, ‘‘भारत के संविधान के आर्टीकल 246 के अनुसार राज्य सरकार के पास अपने मामलों की जाँच करने के पूरे अधिकार हैं और एक बार दी गई सहमति वापस ले ली गई हो, राज्य सरकार के पास क्लोजऱ रिपोर्ट की कॉपी लेने के अधिकार होते हैं। इसके साथ ही, हाईकोर्ट रूल्ज एंड ऑडर्ज़ के अनुसार, क्रिमीनल प्रोसीडिंग करने वाला पक्ष चालान की कॉपियां ले सकता है और इसके साथ जुड़े दस्तावेज़ भी और राज्य सरकार की तरफ से यह एफ.आई.आर्ज़ रजिस्टर करवाई गई थीं, इस कारण, पंजाब सरकार इस मामले में अहम पक्ष बन जाती है।’’ उनकी तरफ से पुलिस एक्ट 1861 अनुसार यह भी पेश किया गया, ‘‘किसी भी पुलिस जिले की निगरानी का अधिकार राज्य सरकार के पास है और राज्य सरकार की तरफ से इस्तेमाल किया जाता है।’’

उन्होंने पेश किया कि पंजाब सिवल और क्रिमीनल कोट्र्स प्रैप्रेशन्ज़ एंड स्पलाई ऑफ कॉपी ऑफ रिकॉडर्ज़ रूल्ज, 1965, कोई भी पक्ष दीवानी या फ़ौजदारी मामले में चालान की कापियां लेने का हकदार होता है। प्रोसीक्युशन की तरफ से बहस करते हुए यह भी कहा गया कि यह भी मान लिया जाये कि राज्य सरकार मामले में पक्ष नहीं है और राज्य सरकार अदालत को किसी फ़ौजदारी मामले में ज़रुरी कारण पेश करती है तो रूल 3(2) के अनुसार चालान की कॉपी लेने की हकदार होती है।

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