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राष्ट्रीय

हिमालयी क्षेत्रों में बड़े उद्योगों के बजाय लघु उद्योगों को महत्व दिया जाये

October 12, 2019 11:07 AM

ऋषिकेश, (ॐ रतूड़ी) परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि मानव जीवन की सुरक्षा, भविष्य में पर्यावरण की शुद्धता एवं हिमालय की संस्कृति व शुद्धता की रक्षा के लिये हमें स्वच्छ, हरित, सतत एवं सामंजस्यपूर्ण ढ़ंग से कदम उठाने होंगे और सतत विकास को बढ़ावा देना होगा।
शुक्रवार को परमार्थ निकेतन में हिमालयी राज्यों ’’सामाजिक और आर्थिक रूपांतरण’’ विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला के समापन अवसर पर उन्होंने कहा, हमें विकास की ऐसी मिसाल स्थापित करना होगा जो विशिष्ट हो और मैदानी क्षेत्र की तुलना में हिमालय के लिये भिन्न हो। हिमालयी क्षेत्रों में बड़े उद्योगों के बजाय लघु उद्योगों को महत्व दिया जाये; हिमालय के प्राकृतिक सौन्दर्य एवं सांस्कृतिक विरासत जैसे स्वास्थ्य, अध्यात्म, पर्यटन, जैविक व आयुर्वेदिक, कृषि आदि को बढ़ावा दिया जाये तभी हम हिमालय की दिव्यता को संजो कर रख सकते है।
कार्यशाला के पश्चात सभी प्रतिभागियों और अधिकारियों ने विश्व विख्यात परमार्थ गंगा आरती में सहभाग किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा देकर सभी का अभिनन्दन किया और हिमालय की दिव्यता बनाये रखने का संकल्प कराया। सभी प्रतिभागियों और उच्चाधिकारियों ने परमार्थ निकेतन गंगा तट पर होने वाली दिव्य गंगा आरती में सहभाग किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने निदेशक पंचायती राज उत्तराखण्ड एच सी सेमवाल और अन्य अधिकारियों को रूद्राक्ष का पौधा भेंट सभी का अभिनन्दन किया।
दो दिवसीय कार्यशाला में दूसरे दिन चार सत्र आयोजित किये गये। प्रथम तकनीकी सत्र में संयुक्त सचिव पंचायत राज मंत्रालय, भारत सरकार आलोक प्रेम नागर, द्वारा प्लान अभियान का निरिक्षण, मिशन अंत्योदय सर्वेक्षण रिपोर्ट का उपयोग करते हुये साक्ष्य आधारित योजना तैयार करना, ग्राम पंचायत विकास प्लान के तहत आर्थिक विकास और सामाजिक परिवर्तन, जीपीडीपी, हिमालयी राज्यों में व्यापक जीपीडीपी की तैयारी के विषय पर समूह चर्चा और रोड़ मैप तैयार करना आदि पर विस्तृत चर्चा हुई।

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