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पंजाब

गड़बड़झाला: जमीनों की कीमतें बढ़ाने के लिए नेश्नल ग्रीन ट्रिब्यूनल एक्ट की धज्जियां उड़ा रहे कॉलोनाईजर

October 12, 2019 06:59 PM

बरनाला, अखिलेश बंसल/करन अवतार  

प्लाटों व जमीनों की कीमतें बढ़ाने के लिए बरनाला के कॉलोनाईजर नेश्नल ग्रीन ट्रिब्यूनल एक्ट 2010 की धज्जियां उड़ा रहे हैं। जिससे वन-जंगलात विभाग के वरिष्ठ अधिकारी बेखबर हैं। जबकि ऐसे मामलों को दबाने के लिए जांच करने की आड़ ले वन-जंगलात विभाग के छोटे अधिकारी महीनों तक बच निकलते हैं। कथित मिलीभगत के चलते शहर के एक कॉलोनाईजर ने वृक्षों का कत्ल कर बेखौफ कॉलोनी तैयार कर डाली। गौरतलब हो कि ऐसे मामलों का विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के पास कोई डेटा ही नहीं।

  
  
यह है मामला-

27 जुलाई 2019 की रात करीब दस बजे बरनाला-संगरूर मार्ग पर आईटीआई चौक के पास एक कॉलोनाईजर ने करीब 4 फीट मोटे तथा करीब 40-50 फीट ऊंचे खड़े सफेदे के वृक्ष को मूली की तरह काट डाला। जिसके गिरने से वहां स्थित सीवरेज की पाईप लाईन भी टूट गई थी। जिसका खुल्लासा वहां नजदीक रहते बाशिंदों को उस वक्त हुआ जब चारों ओर पानी ही पानी गंदा पानी फैलने से इलाका बदबूदार हो गया।

जैसे ही लोग घटनास्थल पर पहुंचे तो वहां 27 जुलाई की रात काटे गए वृक्ष की लकड़ी को कॉलोनाईजर के करिंदे इक्कठी कर ट्रैक्टर पर लाद रहे थे और वहां सीवरेज का पाईप टूटा हुआ था। जैसे ही वहां के लोगों ने ट्रैक्टर चालक व कॉलोनाईजर के करिंदों को ललकार दी तो वह भाग खड़े हुए। इसी क्रम में कॉलोनाईजर के करिंदों ने लोगों को ट्रैक्टर से कुचलने की कोशिश भी की। जाते जाते ट्रैक्टर चालक ने बठिंडा मार्ग पर खेतों में काटे गए सफेदे की लकड़ी व रहंद-खूंहद को फैंक ट्रक्टर को एक मैरिज पैलेस में छिपा दिया। घटनास्थल पर पीसीआर की पुलिस कर्मी भी पहुंचे लेकिन उन्होंने क्या कार्यवाी की आज तक खुल्लासा नहीं हो सका।

विभागों ने नहीं की कोई कार्यवाई-
लोगों द्वारा संबंधित विभागों को दी गई सूचना के आधार पर हालांकि घटनास्थल पर वन-जंगलात विभाग तथा सीवरेज विभाग के अधिकारी भी पहुंचे लेकिन जांच करने का बहाना लगा सभी शांत हो गए। जिसका फायदा उठा आरोपित कॉलोनाईजर ने अपनी कॉलोनी को महंगी कर लिया।

इन कट रहे वृक्षों का रिकार्ड सार्वजनिक नहीं-
हाई-वे पर काटे जाते वर्षों पुराने भारी भरकम वृक्षों की कीमत क्या होनी चाहिए उसका विभाग ने कोई मापदंड सार्वजनिक नहीं किया है। जिसके चलते पीड्ब्लयूडी बीएंडआर की सूचि अनुसार जिन वृक्षों की कटाई होती है उनका तो रिकार्ड विभाग के पास जमा करवा दिया जाता है लेकिन जो कॉलोनाईजर एवं आम लोग कॉलोनियां बनाने के लिए वृक्षों की चोरी-छिपे कटाई करते हैं उनकी किसी समाजसेवी द्वारा सूचना मिलने पर भी वन विभाग के अधिकारी भूमिगत ही हो जाते हैं। गौरतलब हो कि बाजाखाना-संघेड़ा मार्ग पर कितने वृक्षों की कटाई होनी है, कितनी हो चुकी है, गैर-कानूनी ंग से कितने वृक्ष कट चुके हैं का कोई रिकार्ड विभाग ने सार्वजनिक नहीं किया है।

यह है कानून-
एडवोकेट योगेश गुप्ता का कहना है कि यदि कोई भी व्यक्ति नेश्नल ग्रीन ट्रिब्यूनल एक्ट 2010 की धज्जियां उड़ाता पकड़ा जाए तो उसके खिलाफ कानून में जुर्माने के अलावा सात साल की सजा का प्रावधान है।

यह कहते हैं अधिकारी-
डिवीजनल फोरेस्ट आफिसर सुश्री विद्या सागरी का कहना है कि उनके पास मौके पर जो सूचना मिली थी उसके आधार पर आरोपित व्यक्ति से कुछ राषि वसूली गई है। लेकिन आरोपित ने इतने बड़े कांड को अंजाम दिया है के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। उसके सहित पूरे अधिकारित क्षेत्र के बारे में जांच करने के लिए बरनाला के वन रेंज अधिकारी से रिपोर्ट एकत्रित की जाएगी। जहां कहीं कमी पाई गई दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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