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धर्म

पद्मासना मन्दिर वैश्विक एकता, अंतर धार्मिक संस्कृति व पर्यटन का प्रतीक

October 31, 2019 11:28 AM

ऋषिकेश, ओम रातुड़ी:
परमार्थ निकेतन में बाली-इण्डोनेशिया से श्रद्धालुओं का दल आया दल के सदस्यों ने परमार्थ निकेतन में स्थित बाली संस्कृति का प्रतीक पद्मासना मन्दिर में विशेष पूजा अर्चना की, तत्पश्चात विश्व विख्यात परमार्थ गंगा आरती में सहभाग किया और विशेष मंत्रों से पूजन किया।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि पर्यटन को वैश्विक रूप से बढ़ावा देने के लिये एक-दूसरे की संस्कृति को आपस में साझा करना नींव का पत्थर साबित हो सकता है। पर्यटन को वैश्विक रूप से बढ़ाने के लिये हमें सांस्कृतिक, राजनीतिक, सामाजिक तथा आर्थिक मूल्यों को बढ़ाने के साथ आपसी भाईचारे को विकसित करना होगा। उन्होने कहा कि हम पर्यटन के माध्यम से आज की वैश्विक समस्याओं यथा प्रदूषित और घटता जल स्तर, पर्यावरण प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिग जैसे अनेक समस्याओं पर खुलकर चर्चा की जा सकती है तथा इन समस्याओं के समाधान के लिये पर्यटन को एक सशक्त माध्यम के रूप में उपयोग करना बेहतर होगा। वैश्विक पर्यटन के माध्यम से हम विश्व की संस्कृतियों को आपस में जोड़कर विविधता में एकता को विकसित कर सकते है। वास्तव में देखा जाये तो ’’पर्यटन विविधता में एकता का एक उत्सव है’’। मुझे तो लगता है आध्यात्मिक पर्यटन के माध्यम से हम वैश्विक समस्याओं को हल करते हुये वैश्विक शान्ति के मार्ग को प्रशस्त कर सकते है।
दल के सदस्यों ने कहा कि परमार्थ निकेतन की गंगा आरती का अनुभव अत्यंत अद्भुत है। यहा की शान्ति और सुन्दरता मन मोहक है वास्तव में यह स्थान स्वर्गतुल्य है।
बाली से आये दल में गुस्ताह नुराह आर्य, इडा अयू केतुत जूनी सुपारी, श्रीमती बालाजी, राजा डोली सिरगड़, वेपन सुप्रीत, सुरावन, मनेश त्रिपाठी, पूजा, अमित जुत्शी और अन्य सदस्यों ने आज की गंगा आरती में सहभाग किया। साध्वी भगवती सरस्वती जी ने सभी को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प कराया और रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया।

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