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पंजाब

ज़ीरकपुर की हवा में प्रदूषण तत्व निश्चित मात्रा की अपेक्षा अधिक, पटाख़ों के साथ बढ़ा शहर का प्रदूषण

November 14, 2019 09:46 AM

ज़ीरकपुर, जेएस कलेर
शिक्षण संस्थाओ और ज़िला प्रशासन की ओर से लोगों को दीवाली मौके दिए गए संदेश उस समय पर व्यर्थ सिद्ध हुए जब मंगलवार की रात को लोगों ने गुरू नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व की ख़ुशी में बेतहाशा पटाख़े चला कर प्रदूषण का स्तर एकदम बडा दिया।

हवा की गुणवत्ता का स्तर अगर 50 से नीचे रहे तो इसको सही समझा जाता है परन्तु इससे ऊपर हो जाये तो यह सेहत के लिए नुकसानदेय हो जाता है और अगर प्रदूषण का स्तर 200 का आंकड़ा पार कर जाये तो यह खतरे की निशानी होती है। 330 तक प्रदूषण का स्तर पहुंच जाना ज़ीरकपुर निवासियों की सेहत के लिए ख़तरा बन गया।

  बीती रात ज़ीरकपुर क्षेत्र के आसपास के प्रदूषण को मापने के लिए यहाँ वीआईपी रोड पर मोना ग्रीन 1 में कैप्टन चावला के घर में प्राईवेट तौर पर लगाए गए प्रदूषण मापक यंत्र की रिपोर्ट मुताबिक ज़ीरकपुर शहर के आसपास हवा में मौजूद प्रदूषण ख़तरनाक स्तर तक पहुँच गया था। पिछले दो महीनों के प्रदूषण सम्बन्धित प्राप्त किये आंकड़ों में पीऐम 10 (परटीकुलेट मैटर) और पीऐम 2.5 की मात्रा निर्धारित मात्रा की अपेक्षा ज्यादा रही।

मंगलवार रात 9 बजे शहर में प्रदूषण का स्तर 220 एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडैक्स) तक था परन्तु जब रात को गुरपर्व की ख़ुशी में लोगों ने धड़ाधड़ आतिशबाजी करनी शुरू की तो 10:30 बजे हवा गुवणत्ता इंडैक्स 330 तक पहुंच गया। हवा को इस स्तर तक प्रदूषित करने में आस पास के किसानों की तरफ से जलाई जा रही धान की पराली व कंस्ट्रक्शन कार्य का भी योगदान रहा। यहाँ बताने योग्य है कि हवा की गुणवत्ता का स्तर अगर 50 से नीचे रहे तो इसको सही समझा जाता है परन्तु इससे ऊपर हो जाये तो यह सेहत के लिए नुकसानदेय हो जाता है और अगर प्रदूषण का स्तर 200 का आंकड़ा पार कर जाये तो यह खतरे की निशानी होती है। 330 तक प्रदूषण का स्तर पहुंच जाना ज़ीरकपुर निवासियों की सेहत के लिए ख़तरा बन गया।

डाक्टरों का मानना है कि अगर हवा का प्रदूषण इस स्तर पर पहुंच जाये तो लोगों को घरों के अंदर रहना चाहिए क्योंकि यह दमे और एलर्जी के साथ पीडित लोगों के लिए अति -ख़तरनाक होता है। डाक्टरों मुताबिक हवा में प्रदूषण की मात्रा बहुत ज़्यादा होने साथ आँखों में जलन होने के मामले सामने आ रहे हैं। यहाँ यह भी बताने योग्य है कि पिछले दिनों से चल रहे धान की कटाई के चलते किसानों को जागरूक करने के बावजूद धान की पराली को लगाई जा रही आग कारण 15 दिन से प्रदूषण का स्तर निर्धारित सिमा से अधिक चल रहा था। अब दीवाली के बाद गुरुपर्व मौके चले पटाख़ों कारण यह और उपर चला गया है और एयर क्वालिटी इंडैक्स अगले हफ्ते तक ख़तरनाक स्तर पर बने रहने की संभावना है।

डाक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि जिन घरों में दमो की शिकायत वाले मरीजों को बाहर न निकलने दिया जाये। इसके साथ आम लोग भी बाहर निकलने समय पर मुँह व नाक ढक कर रखने और आँखों की जलन से बचने के लिए हवा से बचाने वाले चश्मे का प्रयोग की जाये। बीती रात जैसे -जैसे पटाख़ों की आवाज़ बढ़ रही थी, वैसे -वैसे हवा के प्रदूषण में भी विस्तार होता चला गया। मंगलवार बाद दोपहर 3 बजे प्रदूषण स्तर 192 था जबकि रात 9 बजे 264 तक पहुंच गया था परन्तु इसके बाद पटाख़ों के धमाकों के साथ रात 10 बजे के बाद एकदम 330 के ख़तरनाक स्तर पर पहुंच गया। देर रात पटाख़ों की आवाजें घटते ही प्रदूषण का स्तर 304 तक पर आ गया परन्तु बुद्धवार सुबह 8 बजे यह 367 के स्तर तक पहुंच गया। क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर बढ़ने का कारण उद्योग, लकड़ी का ईंधन, फसलों की अवशेष जलाने, कचरा जलाने, भवन निर्माण और माइनिंग दौरान मिट्टी -धूल उडने, और पटाख़े होते हैं। 

एयर क्वालिटी इंडेक्स

1 से 50 तक सही, 50 से 100 तक रोगी के लिए हानिकारक, 100 से 150 तक संवेदनशील लोगों के लिए हानिकारक, 150 से 200 तक सब के लिए हानिकारक, विशेष कर बच्चों और बुजुर्गों के लिए, 200 से 300 तक सब लोगों की के लिए बेहद खतरनाक, 300 से अधिक सभी मनुष्य के लिए गंभीर सेहत समस्याएँ पैदा होने का खतरा

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