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हिमाचल प्रदेश

प्रधानमंत्री को हिमाचली टोपी पहनाना दस लाख रुपये में पड़ा : कुलदीप राठौर

November 18, 2019 06:53 PM

चंडीगढ़ । हिमाचल में कराई गई इनवेस्टर समिट बिल्कुल सिरे से असफल रही व सरकार को चाहिए कि इस पर हुए खर्च का व प्रदेश जनता को इससे क्या मिला, इस बाबत श्वेत पत्र जारी करना चाहिए। यह मांग हिमाचल कांग्रेस के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने आज चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रत्रकार वार्ता में उठाई।

 इनवेस्टर समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुलाने का भी कोई औचित्य समझ नहीं आया। न उन्होंने कोई बेलआऊट पैकेज दिया न ही कोई औद्योगिक पैकेज। उन्हें इस सम्मेलन में हिमाचल की टोपी पहनाई गई जो प्रदेश की जनता को दस लाख रुपये में पड़ी। उन्होंने कहा कि हिमाचल में जो पहले से उद्योग स्थापित हैं वो ही यहां से पलायन कर रहे हैं तो नए उद्योग कहां से आएंगे। इसके अलावा इस सम्मेलन में अंबानी, अडानी व टाटा जैसे बड़े उद्योगपति भी नदारद रहे और जो यहां आए भी वह भी माहौल देखकर असमंजस में दिखे।

उन्होंने कहा कि इस इनवेस्टर समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुलाने का भी कोई औचित्य समझ नहीं आया। न उन्होंने कोई बेलआऊट पैकेज दिया न ही कोई औद्योगिक पैकेज। उन्हें इस सम्मेलन में हिमाचल की टोपी पहनाई गई जो प्रदेश की जनता को दस लाख रुपये में पड़ी। उन्होंने कहा कि हिमाचल में जो पहले से उद्योग स्थापित हैं वो ही यहां से पलायन कर रहे हैं तो नए उद्योग कहां से आएंगे। इसके अलावा इस सम्मेलन में अंबानी, अडानी व टाटा जैसे बड़े उद्योगपति भी नदारद रहे और जो यहां आए भी वह भी माहौल देखकर असमंजस में दिखे।

उन्होने कहा कि इस सम्मेलन में भाजपा कार्यकर्ताओं को बुलाने का कोई मतलब नहीं था। हालत यह थी कि भाजपा कार्यकर्ता कुर्सियों पर बैठे थे और उद्योगपति सडक़ों पर। उन्होंने कहा कि कांग्रेस निवेश की विरोधी नहीं है परंतु सरकार ने इसके लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किए। सरकार स्कूल खोलने व अन्य गतिविधियों के लिए पूंजीपतियों को आमंत्रित कर रही है जिससे लगता है कि हिमाचल की जमीनें अब सुरक्षित नहीं रहेंगी क्योंकि चोर दरवाजे से जमीनें बाहरी लोगों के हाथों में चली जाएंगी। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि बीते लोकसभा चुनावों में नितिन गडकरी ने घोषणा की थी कि प्रदेश में ६९ एनएच बनाए जाएंगे जिस पर ६५ हजार करोड़ का खर्च आएगा पंरतु वोटे बटोरने के बाद अब वह कह रहे हैं कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।

बेरोजगारी में हिमाचल त्रिपुरा व हरियाणा के बाद तीसरे नंबर पर है। इसके अलावा यह सरकार फिजूलखर्ची भी दबाकर कर रही है और महज दो साल में ही चार हजार करोड़ के कर्ज का बोझ डाल दिया है। राठौर ने प्रदेश में नशाखोरी में बढो़तरी पर भी चिंता जताई व कहा कि प्रदेश में नशे की बड़ी खेप आ रही है पर यह सरकार इस पर लगाम लगाने में असफल है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में होटलों का बुरा हाल है व पर्यटकों की संख्या घटती जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अफसरशाही हावी है व भाजपा अलग अलग गुटों में आपस में लड़ रही है।

हिमाचल में कांग्रेस के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी नेता अब एक मंच पर देखे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे काम संभाले कुछ ही अर्सा हुआ पर मैंने पार्टी को कार्यालय से बाहर निकालकर सक्रिय कर दिया है। उपचुनावों में कांग्रेस की हार पर उन्होंने कहा कि पछाद में न केवल भाजपा ने धनबल का प्रयोग किया बल्कि सभी परंपराओं को ध्वस्त करते हुए विस अध्यक्ष भी प्रचार करने उतर पड़े जो कि बहुत ही खेदजनक रहा।

इस अवसर पर सुजानपुर के विधायक राजेंद्र राणा व चंडीगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा भी मौजूद रहे।

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