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पंजाब

अरमानों का खून: अरमान के अपने ही निकले कातिल, मांग रहे थे दो करोड़ की फिरौती

November 22, 2019 09:48 PM

अबोहर (दीपक मेहता)                                                                                                              स्थानीय नई आबादी निवासी व फायनैंसर बलजिंदर के पुत्र अरमान के लापता होने की गुत्थी आखिरकार 36 दिनों बाद सुलझ गई जब मासूम अरमान का शव स्थानीय मलोट रोड ओवरब्रिज के निकट सडक किनारे भूमि में दफन किया हुआ मिला। इधर पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर आज सुबह अरमान के शव को नर सेवा नारायण सेवा समिति के सहयोग से एसडीएम पूनम सिंह, एसपी मनजीत सिंह तथा डीएसपी राहुल भारद्वाज की मौजूदगी में बाहर निकलवाया और अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया। शव के काफी गला सड़ा होने के कारण उसे पोस्टमार्टम के लिए फरीदकोट भेजा गया।

36 दिन से लगी थी जिसकी सकुशल बरामदगी की आस, उसके शव की बरामदगी ने सब को रुलाया *पिता का फाइनेेंस का कारोबार बन गया मासूम अरमान की मौत की वजह* अपहरण व हत्या के बाद शक से बचने के लिए अरमान की तलाश को लेकर हुए प्रदर्शनों में शामिल रहे कातिल सुनील व पवन
*पिता का देना था 30-35 लाख, अरमान का अपहरण कर मांगी थी 2 करोड़ की फिरौती*तकनीक के सहारे जिला पुलिस ने किया अरमान के अपहरण व कत्ल का पर्दाफाश 


इधर इस घटना का पता चलने पर पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गई। पूरे घटनाक्रम का खुलासा होने के बाद पुलिस उच्चाधिकारियों ने बीडीपीओ कार्यालय में प्रैस कान्फे्रंस बुलाई, जहां एसएसपी भूपेन्द्र सिंह, एसपीडी जसबीर सिंह, एसपी मंजीत सिंह, एसपीडी भूपेन्द्र सिंह, थाना प्रभारी चंद्र शेखर, एंटी गुंडा स्टाफ फाजिल्का के इंचार्ज छिंदा सिंह, सीआईए स्टाफ के इंचार्ज जगदीश कुमार व अन्य पुलिस टीम मौजूद थीं। प्रैस कान्फ्रेंस में पुलिस अधिकारियों ने बताया कि *17 अक्टूबर को सुनील कुमार उर्फ शीलू निवासी अजीमगढ व पवन कुमार उर्फ अंकी निवासी माडर्न पब्लिक स्कूल के पीछे अजीमगढ़ ने इस घटना को अंजाम दिया।                                                      *17 अक्टूबर की रात्रि दोषी सुनील कुमार अरमान को अपनी जान पहचान का फायदा उठाते हुए अपने मोटरसाईकिल पर बैठाकर शहर की ओर ले गया था, जहां पर दोषी पवन कुमार ने लडके अरमान को कार में बैठाया और फिर ये उसे सीतो रोड पर एक किराए के मकान में ले गए और उसे बंदी बनाकर वहां उसकी फोटो और वीडियो बनाते हुए उसके कुछ कागजों पर हस्ताक्षर करवाए और बाद में पकड़े जाने के डर से *19-20 अक्टूबर की रात्रि इन्होंनें अरमान को गला घोंटकर मार डाला और उसके शव को मलोट रोड फ्लाईओवर के नीचे बेआबाद कालोनी की झाडियों में गड्ढा खोदकर दफना दिया।

उन्होंने बताया कि *3 नवंबर को अरमान संधू के पिता बलजिंदर सिंह संधू को उसके बेटे को छोडऩे की ऐवज में इन दोषियों द्वारा मांगी गई 2 करोड़ की फिरौती संबंधी एक चि_ी प्राप्त हुई। इसके लिए दोषियों ने एक फेसबुक आईडी का इस्तेमाल किया। पुलिस द्वारा की गई टैक्निकल जांच के दौरान संदेह के घेरे में आए सुनील कुमार के बारे में पुलिस को जब *21 नवंबर को बलजिंदर से यह पता चला कि उसका सुनील के साथ 30-35 लाख का लेनदेन है तो पुलिस ने संदेह के आधार पर सुनील कुमार को काबू करने के लिए अबोहर सबडिवीजन ऐरिया में नाकाबंदी करवाई।
*22 नवंबर की सुबह सीआईए स्टाफ फाजिल्का के इंस्पेक्टर जगदीश कुमार ने आलमगढ़ चौक के निकट उक्त सुनील कुमार व पवन कुमार को एक आल्टो गाड़ी से काबू कर कार की तलाशी ली तो उसमें से मोबाईल फोन बरामद हुआ, जिसको चैक करने पर फेसबुक आईडी पर अरमान की फोटो, वीडियो व फिरोती मांगने के लिए की गई चैट पाई गई। जब उन्होंंनें सुनील व पवन से सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने पूरी घटना की जानकारी दी।                                                 

एसएसपी भूपेन्द्र सिंह ने बताया कि इस किडनैपिंग की पूरी प्लानिंग एक माह पहले ही आरोपियों द्वारा कर ली गई थी। इतना ही नहीं इन्होंनें शातिराना अंदाज में पहले कई दिनों तक किडनैंपिंग करने एवं उससे बचने संबंधी अनेक नाटक व फिल्मों को सोशल नैटवर्किंग साईट पर देखकर इस घटना को फिल्मी रूप में अंजाम दिया, और उनकी पुलिस टीम ने फोरन टेक्नालाजी के माध्यम से इन आरोपियो तक अपनी पकड़ बनाई। इसके लिए फेसबुक साईट की एक अधिकारी ने पुलिस टीम को पूरी मदद की। उन्होंने बताया कि अरमान की हत्या के बाद उक्त दोनों आरोपी फायनैंसर बलजिंदर के परिवार के साथ इस प्रकार घुले मिले हुए थे कि उन्हें उक्त आरोपियों को पहचानने में काफी समय लग गया। इन अरोपियों ने मृतक के परिजनों संग धरने प्रदर्शनों में भी पूरी भूमिका निभाई ताकि किसी को उन पर शक न हो।

गौरतलब है कि पुलिस ने अरमान के लापता होने पर 18 अक्टूबर को ही अज्ञात लोगों के खिलाफ भांदस की धारा 365 के तहत मुकदमा नंबर 129 दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।

इधर इस घटना के बाद रासा के पदाधिकारियों ने गहरा शोक प्रकट करते हुए 23 नवंबर को शोक स्वरूप सभी स्कूल बंद रखने का निर्णय किया है। रासा के प्रदेश उपाध्यक्ष श्याम लाल अरोड़ा व अबोहर प्रधान किरण अरोड़ा सहित सभी पदाधिकारियों व सदस्यों ने अरमान के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। वहीं फायनैंसर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भी इस दुखद घटना पर शोक जताते हुए पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कडी कार्रवाई की जाए।

इधर अरमान का शव अस्पताल में पहुंचते ही वहां पहुंचें उसके माता पिता, रिश्तेदारों का रो रो कर बुरा हाल था। उनका रूदन सुनकर सबकी आंखें नम हो गई। अरमान के परिजनों ने कहा कि इतने दिनों बाद भी उन्हें एक उम्मीद थी कि उनका अरमान उन्हें जीता जागता जरूर वापस मिलेगा लेकिन इस हालत में वह बरामद होगा इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। उन्होंनें कहा कि उन्होंंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जो लोग उनके जानकार होते हुए अपनेपन का दिखावा कर रहे हैं वहीं लोग उनके बेटे के कातिल निकलेंगें।  

भावुक हुए एसएसपी, तलाश में जुटे पुलिसकर्मी भी हताश

मासूम अरमान के शव की बरामदगी के साथ भले ही एक तलाश खत्म हो गई है लेकिन इस मामले के इतने मायूसी भरे अंत ने जहां हर किसी को निराश कर दिया है वहीं पिछले 36 दिन से अरमान की तलाश में जुटी पुलिस भी काफी हताश दिखाई दी। सुबह जैसे ही शव बरामदगी की सूचना मिली तब भी और शाम को प्रैस कान्फ्रेंस में भी एसएसपी भूपिंदर सिंह बात करते करते भावुक हो गए। उनकी आंखों की नमी बता रही थी कि वह खुद मासूम अरमान की हत्या से कितने आहत हुए हैं। सबसे ज्यादा थकान वाली प्रक्रिया तो ये रही कि अरमान के पिता ने करीब 11 सौ लोगों को पैसा फाइनेंस कर रखा था और इतने लोगों को शक के आधार पर ट्रेस करना काफी मुश्किल काम रहा।

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