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पंजाब

सूखे दरख्तों की कटाई या हरे वृक्षों पर कुल्हाड़ी

December 06, 2019 11:53 AM

फाजिल्का, दीपक नागपाल/राजीव दावड़ा:
लगातार बिगड़ रहे पर्यावरण संतुलन के पीछे हरे दरख्तों की अंधाधुंध कटाई एक बड़ा कारण है जिसके चलते सरकार व वन विभाग ने सार्वजनिक व सरकारी स्थलों पर लगाए गए हरे दरख्तों की कटाई पर रोक लगा रखी है लेकिन इन दिनों स्थानीय मार्केट कमेटी परिसर में बनी प्रशासनिक इमारत और किसान भवन के पीछे स्थित खाली जगह पर काटे गए आधा दर्जन के करीब दरख्तों की कटाई कई सवाल पैदा कर रही है। जड़ से काटे गए दरख्तों के साथ भारी मात्रा में हरे पत्ते व टहनियां पूरे परिसर में बिखरी पड़ी हैं।   

--मार्केट कमेटी में काटे गए आधा दर्जन के करीब दरख्तों पर उठे सवाल


मार्केट कमेटी परिसर में ही काटे गए दरख्तों के तनों के ढेर लगा दिए गए हैं। इसके चलते ये सवाल उठा है कि क्या मार्केट कमेटी प्रशासन ने इन दरख्तों की कटाई से पहले वन विभाग करवाई जाने वाली दरख्तों की वेल्यूएशन करवाई है या नहीं। इन दरख्तों को काटने की नौबत क्यों आई क्योंकि एक तरफ तो सरकार और सभी सरकारी विभाग नए दरख्त लगाने के लिए जोर शोर से अभियान चला रहे हैं, और दूसरी तरफ बिना विशेष जरूरत के इतने दरख्त एक साथ क्यों काट दिए गए। सूत्रों से पता चला है कि काटे गए दरख्तों वाली जगह पर किसी इमारत का निर्माण भी नहीं किया जाना। साथ ही इस बारे में वन विभाग फाजिल्का के वन रेंज आफिसर निशान सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कटाई से पहले विभाग से वेल्यूएशन करवाना जरूरी होता है। इस वेल्यूएशन में यह तय किया जाता है कि काटा जा रहा दरख्त हरा तो नहीं है। लेकिन मार्केट कमेटी की तरफ से विभाग के पास ऐसी किसी तरह की वेल्यूएशन के लिए आवेदन ही नहीं किया गया। उन्होंने ये भी बताया कि एक या दो दरख्त ही कोई विभाग या स्कूल अपने स्तर पर काट सकता है, उससे ज्यादा दरख्त काटने के लिए मंजूरी लेना अनिवार्य है। ऐसे में यह मामला और भी संदेहास्पद हो गया है, क्योंकि काटे गए दरख्तों के तनों के साथ हरे पत्ते भी हैं जो हरे दरख्त काटे जाने का संदेह पैदा करते हैं।

सचिव बोले, नहीं ली मंजूरी, क्योंकि सिर्फ सूखे दरख्त ही काटे:
इस बारे में मार्केट कमेटी सचिव जगरूप सिंह से बात कर दरख्त काटे जाने के लिए वांछित मंजूरी की बात पूछी गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें किसी मंजूरी की जरूरत नहीं थी क्योंकि केवल सूखे दरख्त ही काटे गए हैं। हरे दरख्तों तो सिर्फ छंटाई की गई है क्योंकि उनकी टहनियां इमारतों से उलझने लगी थीं और उनके बीच से निकल रही बिजली की तारों से करंट की आशंका भी थी।

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