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पंजाब

ब्रिटिश आर्मी के सदस्यों ने 21 सिख सूरमाओं की याद में सारागढ़ी मेमोरियल में शीश नवाया

December 12, 2019 09:33 PM

जिला प्रशासन ने फिरोजपुर पहुंचने पर ब्रिटिश आर्मी के डेलिगेशन का किया स्वागत, सारागढ़ी मेमोरियल के महत्व से वाकिफ करवाया

फिरोजपुर,  मनीष बावा

सारागढ़ी की लड़ाई में हजारों अफगान लड़ाकों को टक्कर देने वाले 21 सिख सैनिकों की याद में शीश नवाने के लिए वीरवार को ब्रिटिश आर्मी ऑफिसर्ज का एक डेलिगेशन फिरोजपुर स्थित सारागढ़ी मेमोरियल काम्पलेक्स पहुंचा।

  
  
  
यहां सारागढ़ी गुरुद्वारा साहिब में ब्रिटिश आर्मी के अधिकारियों ने सभी 21 सूरमाओं को याद करते हुए माथा टेका और उस लड़ाई को याद किया जोकि 1897 में ब्रिटिशन इंडियन अंपायर और अफगान लड़ाकों के बीच लड़ी गई थी। ये स्थान अब पाकिस्तान के खैबर पखतूनखवा का हिस्सा है।

प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई ब्रिगेडियर सेलीया जेन हार्वी ने की, जिनके साथ कैप्टन क्रेग बिकरटोन, भारतीय मूल के ब्रिटिश कैप्टन जगजीत सिंह सोहल, वारंट ऑफिसर अशोक चौहान भी थे। ये डेलिगेशन एक हफ्ते के दौरे पर भारत आया हुआ है। प्रतिनिधिमंडल को फिरोजपुर पहुंचने पर जिला प्रशासन ने रिसीव किया और स्वागत किया। एसडीएम कुलदीप बावा ने प्रतिनिधिमंडल को सारागढ़ी मेमोरियल के ऐतिहासिक महत्व के बारे में जानकारी दी।

सारागढ़ी काम्पलेक्स में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ब्रिगेडियर सेलीया जेन हार्वी ने कहा कि आर्मी अफसरों का प्रतिनिधिमंडल यहां 21 जाबांज हीरोज को श्रद्धांजलि देने के लिए फिरोजपुर आया है, जिन्होंने हजारों की संख्या में आए दुश्मनों को टक्कर दी। इस लड़ाई में इन योद्धाओं ने अपनी जानें कुर्बान की। यहां आकर हमें इन योद्धाओं के बारे में और बारीकी से जानने का मौका मिला है, साथ ही हम यहां आकर सिख कल्चर, सिख रीति-रिवाजों से भी वाकिफ हुए हैं। उन्होंने कहा कि बुधवार को डेलिगेशन ने अमृतसर में श्री हरिमंदिर साहिब में भी माता टेका था।

डेलिगेशन में शामिल भारतीय मूल के ब्रिटिश कैप्टन जगजीत सिंह सोहल ने कहा कि लंदन के साउथहाल में हर साल सारागढ़ी के शहीदों को समर्पित कार्यक्रम करवाया जाता है, जिसमें बड़ी तादाद में लोग शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि यहां आकर हमें भारत-ब्रिटेन के सांझे इतिहास और नैतिक मूल्यों से जुड़ने का मौका मिला है। प्रतिनिधिमंडल के साथ सारागढ़ी फाउंडेशन के चेयरमैन गुरिंदरपाल सिंह जोसन, अध्यक्ष ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह काहलों, उपाध्यक्ष गुरभेज सिंह टिब्बी व अन्य मौजूद थे।

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