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हिमाचल प्रदेश

विद्यार्थियों में सामाजिक चेतना विकसित करें शिक्षक एवं अभिभावक: परमार

December 17, 2019 08:03 PM

ज्वालामुखी, (विजयेन्दर शर्मा) शिक्षा देने का उद्देश्य तभी सार्थक होगा जब विद्यार्थियों में समाजिक चेतना विकसित होगी। इसलिए शिक्षकों और अभिभावकों को विद्यार्थियों में समाजिक चेतना विकसित करने का कार्य प्रमुखता से करना चाहिए। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री विपिन सिंह परमार भड़ोलि में डीएवी स्कूल के वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि युवा-विद्यार्थी स्वामी दयानंद सरस्वती की परम्पराओं को आगे बढ़ाने का कार्य करें। कार्यक्रम का शुभारम्भ स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार और राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष रमेश धवाला ने वैदिक मंत्रोचारन और यज्ञ से की। इस दौरान स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस दौरान विद्यार्थियों ने भारत के सभी प्रांतों के लोक नृत्य प्रस्तुत किए। स्वास्थ्य मंत्री ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम भारत की सांस्कृतिक एकता को दर्शाते हैं। इस अवसर पर उन्होंने कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाले विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह और स्कूल में शिक्षा और खेलों में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह एवं पुरस्कार भेंट किए। विद्यालयों की भूमिका पर बोलते हुए विपिन परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बताए गये प्रकल्पों पर विद्यालय गम्भीरता से कार्य करें। उन्होंने कहा कि विद्यालय शिक्षकों और विद्यार्थियों के समूह बना कर स्वच्छता, प्लास्टिक मुक्त भारत और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर कार्य करें। इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए स्वामी दयानन्द सरस्वती एवं स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों के जीवन पर प्रश्नोत्तरी और भाषण जैसी प्रतिस्पर्धाओं का आयोजन भी करवाया जाए।
इस अवसर पर अभिभावकों को सम्बोधित करते हुए विपिन परमार ने कहा कि अपने बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अभिभावक बच्चों से निरंतर संवाद करें और उनके पाठयक्रम पर उनसे चर्चा करें। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अभिभावक और शिक्षक बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर बनाने के साथ एक अच्छा व्यक्ति बनाने पर भी ध्यान दें। उन्होंने कहा कि शिक्षा की बुनियाद जितनी मजबूत होगी, भविष्य उतना ही सुनहरा होगा। उन्होंने कहा कि बुनियादी स्तर पर गुणात्मक व आधुनिक शिक्षा सुविधा घरद्वार पर उपलब्ध करवाने के दृष्तिगत प्रदेश सरकार ने प्राथमिक पाठशालाओं मे प्री-प्राईमरी कक्षाओं की शुरूआत कर इस दिशा में एक अभिनव पहल की है।
विपिन परमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार आने वाले समय में प्रदेश को स्वास्थ्य सुविधाओं की दृष्टि से सबसे तेज गति से आगे बढ़ाने के लिए कृतसंकल्पित है। उन्होंने कहा कीं प्रदेश सरकार द्वारा इस दिशा में गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं।
विपिन परमार ने शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षा जीवन में सफलता का आधार होती है। उन्होंने अध्यापकों से आहवान् किया कि वह बच्चों को गुणात्मक शिक्षा के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में भी भाग लेने के लिए प्रेरित करें ताकि उनका सर्वागीण विकास हो सकें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के कुशल नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है और प्रदेश अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी काल में अनुशासन, परिश्रम की आदत बनानी चाहिये ताकि इसका लम्बे समय तक लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि सभी बच्चों को अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए तथा उसी के आधार पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करनी चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्री ने बच्चों से नशे से दूर रहने और रचनात्मक गतिविधियों में आगे बढ़कर भाग लेने का आहवान् किया। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे खुद नशे से दूर रहते हुए इसकी बुराईयों को लेकर अपने आसपास के हर व्यक्ति को जागरूक करने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या न केवल एक व्यक्ति को कमजोर करती है, बल्कि पूरे परिवार की खुशियों को नष्ट करती है।
इस अवसर पर विशिष्ठ अतिथि उपाध्यक्ष राज्य योजना बोर्ड रमेश चंद धवाला ने विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि मनुष्य संस्कारों और विचारों से आगे बढता है, इसलिए पाठशालाओं का दायित्व है कि वह शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को संस्कार और मूल्यों की शिक्षा भी दें। धवाला ने कहा कि आज समय कौशल विकास और डिजिटाइजेशन का है, इस हेतु स्कूल विद्यार्थियों के कौशल विकास की दिशा में विशेष ध्यान दें।

 
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