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राष्ट्रीय

नागरिकता संशोधन विधेयक किसी के भी विरोध में नहीं: स्वामी चिदानन्द सरस्वती

January 07, 2020 09:28 PM

सूरत/ ऋषिकेश, ओम रातुड़ी:
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक किसी के भी विरोध में नहीं है। न ही किसी व्यक्ति के; जाति के और न ही किसी धर्म के विरोध में है। यह विधेयक देश को संगठित करने वाला; देश को मजबूत बनाने वाला तथा देश की अखंडता को बनायें रखने वाला कानून है। यह विधेयक किसी से कुछ छिनने के लिये नहीं है बल्कि सभी को कुछ देने का विधेयक है। किसी को भी भय और भ्रम में नहीं रहना चाहिये। भारत तो भाव की भूमि है हमें अपने दिलों में राष्ट्रभाव पैदा करना है।
चिदानन्द सरस्वती ने युवाओं से आह्वान किया कि नागरिकता संशोधन विधेयक के बारे में जानकारी करे, उस विधेयक के बारे में जाने तथा दूसरों को भी बताये, पूरे देश के लोग एक साथ खड़ा होकर राष्ट्र हित में कार्य करे तथा देश के सुरक्षित और समृद्ध बनाने में योगदान प्रदान करे।सूरत में रमेश भाई ओझा तथा एस आर के हीरा ग्रुप द्वारा भागवत कथा का उद्घाटन स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने रूद्राक्ष का पौधा देकर किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुये कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक किसी के खिलाफ नहीं है बल्कि देश की हिफाजत के लिये है। जो लोग दूसरों को गुमराह कर रहे है मंै उनसे कहना चाहता हूँ कि नफरत से किसी का नफा नहीं होता इसलिये नफरत न फैलाये, लोगों की एकता को न तोड़े इससे देश की अखंडता और अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ता है। बहला-फुसलाकर भोली जनता और गरीबों को उपद्रव के लिये सड़कों पर लाया जा रहा है इसका उनके जीवन पर ही सबसे बुरा प्रभाव पड़ता है इसलिये देेश के जिम्मेदार लोगों की यह जिम्मेदारी है; वफादार लोगों की वफादारी है कि सामने आकर जिस मिट्टी में जन्म लिया है, जहां का अन्न और जल ग्रहण किया है उस देश की रक्षा के लिये, उस मिट्टी की हिफाजत के लिये आगे आयें क्योकि उस मिट्टी ही हिफाजत ही आज की सबसे बड़ी जरूरत है और इबादत है इसका हमें ध्यान रखना होगा। रमेश भाई ओझा ने कहा कि जो सत्य के पक्ष में है, सत्य उनके पक्ष में है और जो सत्य की रक्षा करते है सत्य उनकी रक्षा करता है। जो अपने धर्म की रक्षा करता है तो धर्म उनकी रक्षा करता है। उन्होने कहा कि सफलता और विफलता दोनों ही जीवन का हिस्सा है। परन्तु सभी सफलता ही पाना चाहते है लेकिन मूल्यों का बलिदान करके पायी गयी सफलता, विफलता से भी अधिक खतरनाक है। अतः सत्य के राह पर चलना ही धर्म है।स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने भागवत कथा श्रवण करने भक्तों को एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग न करने, पर्यावरण एवं जल संरक्षण तथा पर्वों, उत्सवों, विवाह और जन्मदिन के अवसर पर वृक्षारोपण का संकल्प कराया।

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