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पंजाब

पानी मुद्दे पर अमरिन्दर सिंह ने सर्वदलीय बैठक बुलाई

January 24, 2020 10:13 AM

चंडीगढ़, फेस2न्यूज:
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व में सर्वदलीय बैठक के दौरान राज्य में पानी की गंभीर स्थिति पर गहरी चिंता ज़ाहिर करते हुए राज्य के पानी की उपलब्धता का पुन: मुल्यांकन करने की माँग की गई। इसके साथ ही समूह पार्टियों ने सर्वसम्मति से संकल्प लिया कि भारत सरकार को यह यकीनी बनाना चाहिए कि पंजाब के तीन दरियायों का पानी किसी भी हालत में बेसिन से नॉन-बेसिन इलाकों में स्थानांतरित न किया जाये।
सभी पार्टियों ने सर्वसम्मति से नये ट्रिब्यूनल की स्थापना के लिए प्रस्तावित अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद एक्ट में ज़रूरी संशोधन करने की माँग की ताकि न्यायसंगत के अनुसार पंजाब को इसकी कुल माँग और भावी पीढिय़ों की आजीविका को सुरक्षित करने के लिए अतिरिक्त पानी मुहैया करवाया जा सके।
बैठक में पढ़े गए प्रस्ताव के मुताबिक, ‘‘पंजाब के पास फ़ाल्तू पानी नहीं है और भूजल का स्तर तेज़ी से घटने के कारण और दरियायी पानी की कमी के कारण पंजाब के मरूस्थल बनने का अंदेशा है। पंजाब में भूजल जो राज्य की 73 प्रतिशत सिंचाई ज़रूरतों को पूरा करता है, अब बहुत नीचे जा चुका है जिस कारण किसानों और गरीब लोगों की रोज़ी-रोटी को बहुत बड़ा ख़तरा बना हुआ है।
ऐसी स्थिति में यह सर्वसम्मति से संकल्प किया जाता है कि भारत सरकार द्वारा यह सुनिश्चित किया जाये कि पंजाब के दरियायी पानी को तीन दरियाओं (रावी, सतलुज और ब्यास) के बेसिन से नॉन-बेसिन इलाकों में दुनिया भर में अपनाए गए तटीय सिद्धांत (रिपेरियन प्रींसिपल) के मुताबिक किसी भी सूरत में स्थानांतरित न किया जाये। इस सम्बन्ध में उपयुक्त विकल्प, जिनमें पानी की उपलब्धता का पुन: मुल्यांकन करने के लिए प्रस्तावित अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद एक्ट अधीन नया ट्रिब्यूनल स्थापित करने सम्बन्धी संशोधन करना भी शामिल है, अंतिम फ़ैसले से पहले, ढूँढे और विकसित किये जाएँ ताकि न्यायसंगत के अनुसार पंजाब को इसकी कुल माँग और भावी पीढिय़ों की आजीविका को सुरक्षित करने के लिए अतिरिक्त पानी मुहैया करवाया जा सके।’’
मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के दौरान प्रस्ताव कैबिनेट मंत्री सुखबिन्दर सिंह सरकारिया ने पेश किया ताकि राज्य के बढ़ते जल संकट का हल ढूँढने के लिए रास्ता ढूंढा जा सके।
हालांकि प्रस्ताव में सतलुज यमुना लिंक नहर का जि़क्र नहीं किया गया परन्तु शिरोमणी अकाली दल और आम आदमी पार्टी सहित सभी राजनैतिक पार्टियों ने एकसुर में कहा कि नहर के निर्माण की ओर उठाया गया कोई भी कदम राज्य के लिए घातक सिद्ध होगा। सभी पार्टियों ने इस नाजुक मसले पर सर्वदलीय बैठक बुलाने के लिए मुख्यमंत्री के कदम की सराहना की।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने सभी राजनैतिक पार्टियों के नेताओं की ओर से सकारात्मक और रचनात्मक सुझाव पेश करने का स्वागत करते हुए कहा कि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल द्वारा पंजाब का मामला रखने के लिए उनकी सरकार प्रधान मंत्री से मिलने का समय मांगेगी। उन्होंने कहा कि भारत में दरियायी पानी के विभाजन के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाया गया तटीय सिद्धांत (रिपारियन प्रींसिपल) को दरकिनार किया गया था। उन्होंने इसमें सुधार करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि उनकी सरकार राज्य से सम्बन्धित महत्वपूर्ण मसलों पर विचार करने के लिए हर छह महीनों बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जायेगी।
बैठक की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी की समस्या की चिंताएं सिफऱ् उनकी सरकार या कांग्रेस पार्टी के लिए नहीं बल्कि पूरे पंजाब के लिए हैं। बैठक का आधार बाँधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और पिघल रहे ग्लेशियरों के मद्देनजऱ पानी एक वैश्विक मसला बनकर उभरा है और दुनिया भर के शहरों में पानी की कमी होने की भविष्यवाणी की गई है। उन्होंने कहा कि हालाँकि यह सब हमारे समय में नहीं घटेगा, परन्तु हम हमारी आने वाली पीढिय़ों के लिए हल ढूँढेंगे। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि यह बैठक बुलाने का उद्देश्य इस मसले पर चर्चा करके इस सम्बन्ध में दीर्घकालिक नीति तैयार करने के लिए सर्वसम्मति जुटाना है।
भूजल के गिरते स्तर पर गहरी चिंता ज़ाहिर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ईराडी कमीशन के अनुसार पंजाब के नदियों में पानी 17 एम.ए.एफ. से घटकर अब 13 एम.ए.एफ. रह गया है। बैठक के उपरांत पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार द्वारा प्रधान मंत्री के समक्ष माँग रखी गई है कि पंजाब की तीन नदियों में पानी का मौजूदा स्तर पता करने के लिए नया कमीशन स्थापित किया जाये। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थितियों को देखते यह बहुत ज़रूरी है। मुख्यमंत्री ने साफ़ किया कि बैंस ब्रदर्स को बैठक के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था क्योंकि सिफऱ् निर्वाचन आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त राजसी पार्टियों को ही बैठक के लिए आमंत्रित किया गया था।
इससे पहले बैठक के दौरान बोलते हुए आम आदमी पार्टी के नेता और पंजाब विधान सभा में विपक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा ने राज्य सरकार को पंजाब में पानी के संरक्षण के लिए फ़सलीय विभिन्नता को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए पूर्ण सहयोग देने का विश्वास दिलाया। उन्होंने कहा कि राज्य को सुप्रीम कोर्ट में और रिट्ट दायर करके पंजाब में पानी की मौजूदा स्थितियों का ताज़ा मुल्यांकन करने की माँग करनी चाहिए और रिपेअरियन कानून के अनुसार पानी का पुन: विभाजन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मालवा की स्थिति और भी बुरी है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक पानी के प्रदूषण ख़ासकर बूढ्ढे नाले में डाले जाते प्रदूषित पानी के कारण कैंसर के मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है।
आप के अमन अरोड़ा ने राज्य सरकार से माँग की कि इस व्यापक मुद्दे पर और कार्य करने के लिए सब कमेटी बनाई जाये जिसमें मंत्री, अधिकारी और सभी राजसी पार्टियों के नुमायंदे शामिल किये जाएँ।
शिरोमणि अकाली दल के बलविन्दर सिंह भून्दड़ ने कहा कि पार्टियों को एक-दूसरे के खि़लाफ़ आरोप-प्रत्यारोप करने की बजाय पंजाब के जल संसाधनों की रक्षा के लिए एकता दिखानी चाहिए। एस.वाई.एल. को बड़ा मुद्दा बताते हुए उन्होंने कहा कि कानूनी हल के साथ-साथ इस मुद्दे की राजसी तौर पर भी पैरवी की जानी चाहिए। उन्होंने अपनी पार्टी द्वारा कैप्टन अमरिन्दर सिंह को इस मसले के हल के लिए कोई कदम उठाए जाने पर पूरा साथ देने की बात कही। उन्होंने कहा कि पंजाब में नदियों के मौजूदा स्तर का पुन: मुल्यांकन करना अति आवश्यक है।
एस.वाई.एल. को पंजाब के लिए आत्मघाती बताते हुए शिरोमणि अकाली दल के महेश इन्दर सिंह गरेवाल ने मुख्यमंत्री के उस चेतावनी भरे कथन की पुष्टि की जिसमें उन्होंने शंका अभिव्यक्त की थी कि यह मुद्दा राज्य में हिंसा और आतंकवाद के पुनर्जिवित होने का कारण बन सकता है। उन्होंने महसूस किया कि सुप्रीम कोर्ट को ताज़ी पटीशन सुननी चाहिए और एस.वाई.एल. के निर्माण का फऱमान पर रोक लगानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र द्वारा नया ट्रिब्यूनल बनाने का कानून पास हो गया तो यह पंजाब के लिए तबाही होगा। उन्होंने पंजाब के हितों की रक्षा के लिए अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद (संशोधन) बिल, 2019 की धारा 12 बदलने के लिए कहा। उन्होंने इस मामले पर इकठ्ठे होकर लड़ाई लडऩे की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
शिरोमणि अकाली दल के प्रो. प्रेम सिंह चन्दूमाजरा ने भी इस मामले पर अपनी बात रखते हुए पंजाब में जल आवंटन रिपेरियन कानूनों के अनुसार करने की बात कही।
भाजपा के मदन मोहन मित्तल ने इस नाजुक मुद्दे पर सभी पार्टियों को एक मंच पर इक_ा करने के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया। उन्होंने गेहूँ /धान के फ़सलीय चक्र को तोडऩे और फ़सलीय विभिन्नता को बढ़ावा देने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा कि पंजाब के किसानों की आय बढ़ाने के लिए भूजल की पूर्ती करने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि देश के अन्न भंडार में चोखा योगदान डालने के बावजूद किसानी बड़े कजऱ्े तले दबी हुई है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा फ़सलीय विभिन्नता के लिए न्युनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी.) के स्टैंड पर भी सहमति जताई।
सी.पी.आई. के बंत बराड़ और सी.पी.आई. (एम.) के सुखविन्दर सिंह सेखों ने कहा कि पानी का आवंटन लोंगोवाल समझौते के अनुसार होनी चाहिए। सेखों ने कहा कि किसानों की हितों के लिए स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट हू-ब-हू लागू करनी चाहिए।
बसपा के जसबीर सिंह गड़ी ने कहा कि पंजाब को बनता जल का हिस्सा न देकर केंद्र ने पहले ही भेदभाव किया है।
तृणमूल कांग्रेस के मनजीत सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी पानी बचाने ख़ासकर फ़सलीय विभिन्नता के द्वारा पानी बचाने के मुद्दे पर राज्य सरकार के साथ है। पानी की बर्बादी रोकने के लिए सरकार को चाहिए कि ट्यूबवैलों को मुफ़्त बिजली देनी बंद करनी चाहिए। इसके साथ ही भूजल बचाने के लिए सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के साथ-साथ बारिश वाले पानी के संरक्षण के लिए प्रयास करने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को पानी रिचार्ज के लिए गढ्ढे बनाने के लिए 100 प्रतिशत सब्सिडी देनी चाहिए।
एम.सी.पी. के स्वर्ण सिंह ने भी पंजाब में पानी के स्तर के पुन: मुल्यांकन की माँग की जिससे पंजाब को इसका बनता हक देने में धोखा न हो।
अपने समाप्ति संबोधन में पंजाब कांग्रेस के प्रधान सुनील जाखड़ ने सभी पार्टियों से अपील की कि पंजाब को बचाने के लिए अपना अहंकार त्याग कर सभी को साझा मत पेश करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को रहम की अपील के साथ प्रधानमंत्री को मिलना चाहिए ताकि इस समस्या का जल्द हल न होने की सूरत में लोग मरना शुरू कर देंगे।

 
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