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चंडीगढ़

आरटीआई खुलासा: पीयू स्पोर्ट्स कोटा दाखिले में घोटाला

February 27, 2020 05:19 PM

चंडीगढ, संजय मिश्रा:

चेक और नियंत्रण की विफलता और पारदर्शिता व जवाबदेही की कमी पंजाब विश्वविद्यालय के अधिकारियों को भ्रष्टाचार का बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करती रही है। इसी श्रृंखला में जो मामला उजागर हुआ है, उसमे मेरिट स्कोर को बदलकर कुछ पसंदीदा उम्मीदवारों का दाखिला किया गया है।

कम से कम तीन छात्र ऐसे हैं जिन्हें कथित रूप से धोखाधड़ी करके 5% आरक्षित स्पोर्ट्स कोटा सीटों के तहत शैक्षणिक सत्र 2019-20 में एलएलबी में भर्ती किया गया है। सात सदस्यीय प्रमुख प्रवेश समिति द्वारा उनमें से प्रत्येक को दिए गए 36 के स्कोर को बाद में 46 में बदल दिया गया, वह भी बिना किसी आधार या औचित्य के।

आरटीआई कार्यकर्ता डॉ राजिंदर के सिंगला ने कुलपति प्रोफेसर राज कुमार पर पद के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने यूनिवर्सिटी के शारीरिक शिक्षा और खेल निदेशक डॉ परमिंदर सिंह अहलूवालिया की सिफारिशों पर इसकी अनुमति दी, जिसके आधार पर चार व्यक्तियों के हस्ताक्षरों तहत इस घोटाले को अंजाम दिया गया।

   
आरटीआई कार्यकर्ता डॉ राजिंदर के सिंगला ने कुलपति प्रोफेसर राज कुमार पर पद के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने यूनिवर्सिटी के शारीरिक शिक्षा और खेल निदेशक डॉ परमिंदर सिंह अहलूवालिया की सिफारिशों पर इसकी अनुमति दी, जिसके आधार पर चार व्यक्तियों के हस्ताक्षरों तहत इस घोटाले को अंजाम दिया गया।

आरटीआई से हुए खुलासे अनुसार जिन तीन छात्रों का स्कोर बढा दिया गया है, उनमें से सौम्या जोशी को पांच वर्षीय बीए एलएलएम और राकेश देशवाल और हरीश गुज्जर को तीन वर्षीय एलएलबी में दाखिला दिया गया है।
प्रो नवदीप गोयल, प्रो दविंदर सिंह, प्रो गुरमीत सिंह और डॉ नीरू मलिक के हस्ताक्षरों के तहत स्कोर बढ़ाने के लिए कोई कारण, गणना, आधार या तर्क तक नहीं दिया गया है।
पीयू की प्रमुख प्रवेश समिति के सदस्यों द्वारा तैयार की गई व्यक्तिगत मेरिट शीट में प्रत्येक उम्मीदवार को 100 में से 36 स्कोर मिले थे। कराटे विशेषज्ञ अश्विनी कुमार ने भी 36 के स्कोर की ही पुष्टि की थी। लेकिन स्कोर बदलते समय, न केवल कराटे विशेषज्ञ को बाईपास किया गया, बल्कि सक्षम प्रवेश समिति के अधिकांश सदस्य भी हटा दिए गए।
आरटीआई अधिनियम के तहत सिंगला द्वारा प्राप्त किए गए खेल योग्यता प्रमाण पत्र से पता चलता है कि इन सभी उम्मीदवारों ने आदर्श पब्लिक स्कूल, सेक्टर 20-बी, चंडीगढ़ में हुई नॉर्थ जोन कराटे चैंपियनशिप (2018-19) में स्वर्ण पदक जीता था।
योग्यता के अंकन के लिए निर्धारित मानदंड बताते हैं कि गोल्ड मेडल (प्रथम स्थान) वाला उम्मीदवार केवल तब 46 अंकों का हकदार होता है जब उसने जोनल यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप/नेशनल जोनल चैंपियनशिप में ओपन अथवा सीनियर कैटेगरी में भाग लिया हो। तदनुसार, चैंपियनशिप जिसमें इन अभ्यर्थियों ने भाग लिया था, उन्हें नेशनल जोनल या जोनल यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप के बराबर नहीं किया जा सकता ।
एक्टिविस्ट सिंगला खुद वर्ष 2002 में हैदराबाद में आयोजित 32वीं राष्ट्रीय खेलों में चंडीगढ़ की तरफ से पिस्तौल शूटिंग में खेले थे।
दिलचस्प बात यह है कि पीयू नेशनल/ जोनल/ स्टेट लेवल पर किसी भी कराटे चैंपियनशिप में भाग नहीं लेता है।
डॉ परमिंदर सिंह ने आरटीआई अधिनियम के तहत स्वीकार किया है कि उनके पास आदर्श पब्लिक स्कूल, चंडीगढ़ में आयोजित कराटे चैम्पियनशिप (2018-19) का परिणाम उपलब्ध नहीं है। तब इन प्रमाण पत्रों की सत्यता उन्होंने कैसे तय कीे, छानबीन का विषय है। हालांकि डॉ परमिंदर सिंह दावा करते हैं कि स्कोर में वृद्धि को 7-सदस्यीय प्रमुख प्रवेश समिति और कराटे एक्सपर्ट द्वारा अनुमोदित किया गया था, लेकिन सिंगला का कहना है वह ऐसा कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवा सके।
पंजाब विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और मुख्य सतर्कता अधिकारी के अलावा, आरटीआई कार्यकर्ता ने एक लिखित शिकायत द्वारा मामले को पीएमओ, पीयू-चांसलर, यूजीसी और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के संज्ञान में लाते हुए गुहार लगाई है कि किसी बाहरी जांच एजेंसी द्वारा इस घोटाले की जांच करवा कर पंजाब यूनिवर्सिटी के दोषी अधिकारियों को सजा दी जाए ताकि भविष्य में भ्रष्टाचार थम सके।

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