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राष्ट्रीय

कोरोना लॉक डाउन में सूचना अधिकार कानून की अहमियत

March 28, 2020 03:08 PM

चंडीगढ, संजय मिश्रा:
आज पूरा देश कोरोना महामारी के कारण 21 दिनों के लॉक डाउन में है, ऐसे में सूचना अधिकार कानून की अहमियत और भी बढ़ गई है।
ऐसा हम सिर्फ इसलिए नहीं कह रहे हैं कि अभी के समय में आमजनों के लिए घोषित सरकारी घोषणाओं में कुछ अधिकारियों द्वारा जमकर भ्रष्टाचार किए जाने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता, जिसका प्रत्यक्षीकरण सिर्फ सूचना अधिकार कानून के तहत ही संभव है लेकिन अभी ऐसा करना सही नहीं होगा क्योंकि अभी लॉक डाउन के कारण प्रशासन खुद ही दवाब में है उस पर आर टी आई का दवाब सही नहीं होगा।
लेकिन उपरोक्त के अलावा मैं जो बात कहना चाहता हूं वो है सूचना अधिकार अधिनियम का सेक्शन 4, जिसके तहत सरकारी घोषणाओं एवं उसे लागू करने से संबंधित सभी सूचनाओं का सरकारी वेबसाइट पर सुओ मोटो प्रत्यक्षीकरण। अभी पूरी जनता अपने—अपने घरों में बंद है। जरूरी खाद्य आपूर्ति बेहद सीमित जगहों पर सीमित मात्रा में उपलब्ध है, वो कहां, किस वक्त एवं किस रेट पर उपलब्ध है ये सूचना सरकार द्वारा आमजन को मिलनी ही चाहिए। यही नहीं, बीमार लोग कहां जाएंगे, कैसे जाएंगे, जरूरी सेवा से संबंधित कर्मचारी को लॉक डाउन में पास कहां से और कैसे मिलेगी, इन कर्मचारियों के परिवहन की क्या सुविधाएं है इत्यादि कई सूचनाएं उपलब्ध होनी जरूरी है और सूचना अधिकार अधिनियम की धारा 4 सरकार को ये जिम्मेदारी देती है कि उपरोक्त सूचनाएं बिना किसी के मांगे सरकारी वेबसाइट पर सरकार द्धारा स्वतः उपलब्ध करवाई जाएं।
उम्मीद है कि सरकार अपनी उपरोक्त जिम्मेवारियों को बखूबी निभाएगी और सभी ज़रूरी सूचनाएं सूओ मोटू उपलब्ध कराएंगे।

 
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