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चंडीगढ़

सीआईआई ने प्रशासन से व्यापार और उद्योग को समर्थन देने की अपील की

April 29, 2020 05:34 PM

चंडीगढ़, फेस2न्यूज:
भारतीय उद्योग परिसंघ ने लॉक डाउन 2 से बाहर निकलने की रणनीति, चंडीगढ़ ट्राइसिटी परिपेक्ष्य विषय पर ड्राफ्ट तैयार किया तथा इसे पंजाब के गवर्नर तथा यूटी के प्रशासक वी पी सिंह बदनोर व चंडीगढ़ में प्रशासक के सलाहकार मनोज कुमार परीदा के साथ साझा किया। इस दस्तावेज में उद्योगों के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर, क्षेत्रवार प्रोटोकॉल तथा क्षेत्रवार सुझाव भी प्रशासन को सौपे गए।
सीआईआई चंडीगढ़ काउंसिल के चेयरमैन तथा ग्रेवाल आई इंस्टीट्यूट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ एस पी एस ग्रेवाल ने लॉक डाउन से बाहर निकलने की रणनीति के बारे में बात करते हुए कहा कि चंडीगढ़ को एक अकेले शहर के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि इसके साथ लगते हुए शहर मोहाली और पंचकूला के साथ इसे ट्राइसिटी के परिपेक्ष में देखा जाना चाहिए। ऐसे में भविष्य की कोई भी योजना बनाते हुए चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला को एक यूनिट ही समझना चाहिए। ऐसे में यदि चंडीगढ़ को बंद रखा गया और पंचकूला व मोहाली को खोला गया तो उद्योगों के बीच में प्रतिस्पर्धा समाप्त होने लगेगी और व्यापार मुश्किल हो जाएगा। ट्राइसिटी के लोग रोजाना बिजनेस के लिए इनमें आना-जाना करते हैं और बहुत से लोग आजीविका कमाने के लिए सीमावर्ती जिलों में आना-जाना करते हैं ऐसे में ट्राइसिटी के लिए अलग-अलग योजना बनाना किसी के हित में नहीं है। सीआईआई ने सुझाव दिया कि चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली के डीसी की कोआर्डिनेशन कमेटी बनाई जाए जो विभिन्न चुनौतियों को लेकर बैठक करें और इनका निदान करने की दिशा में निर्णय ले।
उन्होंने कहा कि पूरे चंडीगढ़ को रेड जोन तथा कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया है जिसके चलते समाज के दबे कुचले वर्ग के लिए रोजी-रोटी की समस्या आन पड़ी हुई है। पूरी तरह लॉक डाउन होने के चलते कई व्यापारियों को बहुत अधिक नुकसान हो रहा है। अगर लॉक डाउन कुछ और सप्ताह तक जारी रहा तो मध्यम, छोटे व सूक्ष्म उद्योगों को इतना अधिक नुकसान होगा कि उनके उद्योगों का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। ऐसे में सीआईआई ने रेड जोन और कंटेनमेंट जून को अलग-अलग करने की आवश्यकता बताते हुए इस दिशा में कदम उठाने की अपील की है। सीआईआई ने अपील की कि चंडीगढ़ में कंटेनमेंट ज़ोन की पहचान करके उन्हें बैरिकेड किया जाए तथा बाकी के शहर को चरणबद्ध तरीके से मुक्त किया जाए। जिन उद्योगों को अनुमति मिली है उन सभी में हाइजीन और प्रोटोकॉल का ध्यान रखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग के साथ चरणबद्ध तरीके से आरंभ करने की अनुमति दी जाए।
यूटी प्रशासन को सौंपे अपने अपने सुझाव में व्यापार व उद्योगों का समर्थन करते हुए सीआईआई ने कहा कि कंपनियां अभी दोहरी मार झेल रही है क्योंकि एक तरफ आय के नाम पर कुछ भी नहीं है और दूसरी ओर उन्हें कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी, कर्मचारियों का वेतन व अन्य प्रकार के खर्च करने पड़ रहे हैं ऐसे में उद्योगों को समर्थन देना समय की आवश्यकता है।
ग्रेवाल ने कहा कि सीआईआई ने यूटी प्रशासन से अपील की है कि जब तक कि लॉकडाउन समाप्त नहीं हो जाता तब तक गुजरात, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र व राजस्थान आदि की तर्ज पर उद्योगों पर लगने वाला फिक्स इलेक्ट्रिसिटी चार्ज माफ किया जाए। अपने सुझावों में सीआईआई ने 6 माह के प्रॉपर्टी टैक्स को भी माफ करने की अपील की और कहा कि जब तक लॉक डाउन नहीं हट जाता तब तक इसे माफ किया जाए। इसके साथ ही होटल व रेस्टोरेंट में एक्साइज, लाइसेंस फीस, शराब पर वैट आदि की छूट दी जाए।

ग्रेवाल ने कोरोनावायरस से लड़ने के लिए यूटी प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि सीआईआई तथा इसके सदस्य जरूरतमंद लोगों की सहायता कर रहे हैं और इसके लिए वे पैकेट बंद खाना, सुखा राशन आदि उपलब्ध करवा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि वह इस लड़ाई में काम कर रहे फ्रंटलाइन वर्करों के लिए मास्क, सैनिटाइजर व पी पी ई किट भी मुहैया करवा रहे हैं।

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