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राष्ट्रीय

व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा: कम कीमत में ज्यादा फायदा- जागो ग्राहक जागो

May 21, 2020 10:23 AM

चंडीगढ, संजय मिश्रा:
बीमा कई तरह के होते हैं, जैसे जीवन बीमा, हेल्थ बीमा, एवं व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा।
जीवन बीमा पॉलिसी: इसमें बीमित व्यक्ति के मृत्यु के बाद बीमा पॉलिसी की राशि बीमित व्यक्ति के नामिती को दी जाती है।
हेल्थ बीमा पॉलिसी: इस बीमा योजना में किसी बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती होने पर बीमित व्यक्ति के इलाज के खर्चे की भरपाई बीमा कंपनी द्वारा की जाती है।
लेकिन इन सबसे अलग एक और बीमा है जो सस्ता होने के साथ ही बहुत फायदमंद भी है और ये है व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा। आइए जानते है दुर्घटना बीमा के बारे में—
मान लीजिये, कोई व्यक्ति किसी दुर्घटना में मृत्यु से तो बच गया लेकिन काफी इलाज के बावजूद भी वो शारीरिक रूप से विकलांग हो गया और अब वो कमाने की स्थिति में नहीं है, तो क्या होगा? चूंकि बीमित की मृत्यु नहीं हुई है इसलिए उसे जीवन बीमा पॉलिसी का लाभ नहीं मिलेगा। चूंकि बीमित व्यक्ति का इलाज किसी बीमारी के कारण नहीं हुआ इसलिए हेल्थ इंश्योरेंस पॉलसी भी काम नहीं देगा।
ऐसी स्थिति में सिर्फ व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा पॉलिसी ही काम देगा। व्यक्तिगत दुर्घटना पॉलिसी वह बीमा योजना होती है जो किसी भी प्रकार की दुर्घटना घटने की स्थिति में होने वाले किसी शारीरिक नुकसान जैसे आंशिक या पूर्ण रूप से अपंगता या अंग-भंग और इसके कारण प्रत्यक्ष रूप से आय पर पड़ने दुष्प्रभाव की क्षति पूर्ति करती हैं। यह पॉलिसी नामित व्यक्ति को बीमा धारक की मृत्यु होने की स्थिति में भी क्षतिपूर्ति करती है। इसके अलावा यह व्यक्ति और उसके परिवार को, दुर्घटना के कारण बीमा धारक के अस्थायी रूप से विकलांग हो जाने की स्थिति में भी एक वित्तीय स्थिरता प्रदान करती है और इसकी यही विशेषता इसे किसी भी व्यक्ति के बीमा लेने के उद्देश्य के प्रति आकर्षित करती है। इसे एक राइडर के रूप में जीवन बीमा, या हैल्थ बीमा या वाहन बीमा के साथ भी लिया जा सकता है जो कि बहुत ही सस्ता पड़ता है।
अमूमन 15 लाख की व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा की प्रतिवर्ष प्रीमियम लगभग 3,000 रु का होता है लेकिन इस 15 लाख का दुर्घटना बीमा वाहन बीमा के साथ मात्र 275 रुपए में मिल जाती है। व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा का प्रीमियम व्यक्ति की आमदनी के अनुसार निर्धारित नहीं होता है इसलिए यह एक 50 वर्षीय व्यक्ति के लिए भी वही होगा जो उस समय 25 वर्षीय व्यक्ति के लिए हो सकता है।
लेकिन भारत में अभी भी इस बीमा योजना के बारे में जागरूकता बहुत कम है। अधिकतर लोग अपने बारे में अति-विश्वासी होते हैं जो यह मानते हैं कि उनके साथ कभी कोई दुर्घटना घट ही नहीं सकती है। जबकि सत्यता तो यह है कि दुर्घटना कभी भी, कहीं भी, और किसी के साथ भी घट सकती है, इसलिए स्वयं को और अपने परिवार को दुर्घटना के परिणामों से बचाने के लिए एक उपयुक्त व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा का होना जरूरी होता है।
चंडीगढ़ कंज्युमर फोरम ने हाल ही में अपने एक फैसले में मोटर दुर्घटना में अपंग हुए बीमित व्यक्ति को बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी से 65000 रुपए दिलवाए है। फोरम-2 ने शिकायत संख्या 718 आफ 2018 का निपटारा करते हुए बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी को उपरोक्त आदेश दिए।
पंचकुला निवासी ये शख्स 2016 में एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे। करीब डेढ़ साल के इलाज के बावजूद भी उनका दाहिना पैर ठीक नहीं हो सका। मेडिकल बोर्ड ने 30% की स्थाई अपंगता बताई। साल 2018 में बीमित को पता चला कि दुर्घटनाग्रस्त बाइक के बीमा पॉलिसी में 50 रुपए के अतिरिक्त प्रीमियम पर एक लाख रुपए का दुर्घटना बीमा भी है जिसमें स्थाई अपंगता लाभ भी मिलता है। फिर क्या था बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी को स्थाई अपंगता लाभ का दावा भेजा गया, लेकिन बीमा कंपनी ने 883 दिनों के देरी से दावा करने के कारण दावा खारिज कर दिया, मामला उपभोक्ता मंच मे पहुंचा। दोनों पक्षों को सुनने के बाद फोरम ने कहा, इसमें कोई संदेह नहीं है कि बीमित व्यक्ति का सड़क दुर्घटना में पैर टूटा और काफी इलाज के बावजूद भी 30 प्रतिशत की स्थाई अपंगता रह गई जैसे मेडिकल बोर्ड ने भी प्रमाणित किया। पुलिस स्टेशन में इस दुर्घटना की प्राथमिकी भी दर्ज है जिसमें उस गाड़ी को पकड़ा नहीं जा सका जिसने बीमित व्यक्ति को टक्कर मारी और भाग गया। मोटर वाहन बीमा पॉलिसी के प्रावधानों के तहत बीमित व्यक्ति स्थाई अपंगता लाभ लेने का अधिकारी है। कंपनी के दावा निस्तारण प्रक्रिया के तहत 50 प्रतिशत विकलांगता तक 50000 रुपया एवं 50 प्रतिशत से अधिक एवं 100 प्रतिशत तक की विकलांगता पर एक लाख रुपया देना बनता है। वर्तमान केस में 30 प्रतिशत की विकलांगता पहले स्लैब में कवर्ड है। जहां तक 883 दिन के देरी का सवाल है तो माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश अनुसार किसी भी जेनुइन मामले को दावे में देरी जैसी टेक्निकल ट्रिक से वापस नहीं किया जाना चाहिए। जाहिर सी बात है कि अगर किसी का ट्रैक्टर चोरी हो गया तो वो सीधा बीमा कंपनी में नहीं जाएगा क्लेम लेकर, बल्कि पहले अपने ट्रैक्टर को खोजने की हरसंभव कोशिश करेगा। अतः इस कोशिश के कारण बीमा कंपनी को सूचना में देरी या दावा में देरी के कारण क्लेम को खारिज नहीं किया जा सकता। उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए फोरम बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश देती है कि वो शिकायतकर्ता को बीमा के रकम का 50 प्रतिशत यानी 50000 हजार रुपए का भुगतान करे एवं, मानसिक तनाव व मुकदमा खर्च के लिए 15000 रुपया अलग से भुगतान करे। अगर इस आदेश को 30 दिन के भीतर पुरित नहीं किया गया तो कंपनी शिकायत कर्ता को उपरोक्त 50000 एवं 15000 रुपए के अलावा 10000 रूपए का और भुगतान करेगा।

 
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