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हिमाचल प्रदेश

राज्यपाल ने दिया अनुसंधान और प्रौद्योगिकी पर आधारित जैव विविधता के दोहन पर बल

May 22, 2020 05:53 PM

शिमला, (विजयेन्दर शर्मा) राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने आज यहां अनुसंधान और प्रौद्योगिकी पर आधारित जैव विविधता के दोहन पर बल देते हुए कहा कि हिमालय क्षेत्र की जड़ी-बूटियों पर आधारित उत्पादों को बढ़ावा देकर राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
यह बात राज्यपाल ने विश्व जैव विविधता दिवस के अवसर पर राजभवन में वन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभागों और गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करते हुए कही।
श्री दत्तात्रय ने कहा कि ‘कोरोना ने दुनिया को एहसास दिलाया है कि मनुष्य प्रकृति से शत्रुता नहीं कर सकता, यदि मनुष्य प्रकृति को हानि पहुंचाता हैं, तो निश्चित ही प्रकृति भी मनुष्य को नुकसान पहुंचाएगी।’
उन्होंने कहा कि जनसंख्या घनत्व, शहरीकरण और औद्योगीकरण ने लोगों के जीवन को परिवर्तित कर लिया है। हमें विकास के पथ पर आगे बढ़ना है लेकिन, प्रकृति का आवश्यकता से अधिक दोहन कम करना होगा, क्योंकि प्रकृति का संतुलन अत्यंत महत्वपूर्ण है और हम विकास के नाम पर वन क्षेत्र को समाप्त नहीं कर सकते।
श्री दत्तात्रेय ने कहा कि सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाएं भी प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का ही परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि जैव विविधता अधिनियम को प्रत्येक स्तर पर सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जाने चाहिए। उन्होंने विभागीय स्तर पर बनाए गए उत्पादों की सराहना की और विभागीय समन्वय द्वारा इस कार्य को आगे बढ़ाने पर भी बल दिया।
प्रधान मुख्य वन अरण्यपाल और डाॅ. अजय और निदेशक विज्ञान और प्रौद्योगिकी डीसी राणा ने राज्यपाल को विभाग की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी और उन्हें जैव विविधता के लिए किए जा रहे कार्यों से भी अवगत करवाया। गैर सरकारी संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी चर्चा में भाग लिया।

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