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पंजाब

पंजाब में भी होंगी गुरुकुल शिक्षा केंद्रों की स्थापना

June 05, 2020 10:13 PM

चंडीगढ़/बठिंडा, ब्यूरो/अखिलेश बंसल/ नीरज कुमार:
समय परिवर्तन के साथ पतन की जाती रही गुरुकुल शिक्षा पद्धति का देशभर में फिर से विकास व निर्माण करने की योजनाएं बन रही हैं। जिसके चलते पंजाब राज्य में भी गुरुकुल शिक्षा केंद्रों की स्थापना होंगी। यह बात मालवा प्रांतीय ब्राह्मण सभा रजि. पंजाब के अध्यक्ष एडवोकेट करन अवतार कपिल ने कही है। उन्होंने बताया है कि गुरुकुल शिक्षा पद्धति के तहत हालांकि हर वर्ग हर धर्म के बच्चों ने शिक्षा हासिल की है उसके बावजूद पद्धति का पतन करने वालों में अंग्रेज व मुस्लिम शासक पृष्ठ भूमि में रहे हैं।   

समय के चलते हर शासक रहा गुरुकुल शिक्षा पद्धति का पतन व नाश करने की कोशिश में: एडवोकेट कपिल।


गुरुकुल शिक्षा की आवश्यकता क्यों?
गुरुकुल शिक्षा विश्व की सबसे प्राचीन व आदर्श शिक्षा व्यवस्था है। इस व्यवस्था से अनेक व्यक्ति महापुरुष बने है, यह शिक्षा को लेकर मानव महामानव बना है ऐसा इतिहास है, अमेरिका जैसे देशों का इतिहास 500 साल पुराना नही है व इस शिक्षा व्यवस्था का इतिहास बल्कि 20 हजार साल पुराना है। यदि कोई भी शिक्षा व्यवस्था युक्तियुक्त व विचारपूर्ण नही तो वह लंबा समय नहीं टिक सकती। कुछ ही वर्ष बीतने पर सवाल पैदा होने लगते हैं। जबकि हजारों वर्ष से निरंतर चली आ रही हमारी भारतीय शिक्षा व्यवस्था में दिन प्रति दिन सुमधुर परिणाम आ रहे थे। नतीजा यह है कि तक्षशिला जैसे गुरुकुलों व विद्यापीठों में ईरान, इराक, इंडोनेशिया, मलेशिया व यूरोप खंड के हजारों विद्यार्थी दाखिला लेनेे के लिए उत्सुक रहते हैं और प्रवेश पाने पर खुदको भाग्यशाली मानते हैं।
संस्कृति बचाने वाले अभी जिंदा हैं:
समय के परिवर्तन के साथ ही मध्य युग मे शासन परिवर्तन व सांस्कृतिक पतन हो गया। जिसका असर गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था पर भी हुआ। जहां कहीं चल रही थी उन्हें गुरुकुल विरोधी ताकतों ने नष्ट कर दिया गया। इतना सबकुछ हो जाने के बावजूद सौभाग्यवश आचार्यों ने प्रयत्न कर गुरुकुल शिक्षा प्रणाली के कुछ बीज बचा लिए।
पुरुष से महापुरुष बनाने की ताकत:
पंचकोश विकासयुक्त गुरुकुल शिक्षा मनुष्य के शरीर, इंद्री, मन, बुद्धि व आत्मा का सम्पूर्ण विकास में कारगार साबित हुई है। गुरुकुल शिक्षा सभी वर्ग के बच्चों के लिए सामान्य है, ना कि किसी विशेष वर्ग के लिए। गुरुकुल केंद्रों में दी जाती शिक्षा में आयुर्वेद के सिद्धांत होने से बच्चों का मानसिक ही नहीं शारीरिक विकास भी होता है। महापुरुष के संसर्ग होने से अभ्यास, चिंतन से उनका मन विकसित होता है, तर्कशास्त्र, विभिन्न शाखाओं के करवो जाते अध्ययन से बुद्धि का विकास होता है।
20 हजार साल से निरंतर है भारतीय शिक्षा व्यवस्था:
भारतीय शिक्षा व संस्कृति गुरुकुलम भारत के हर कोने में स्थापित हो इसके लिए विविध विषयों पर व्याख्यान, सेमिनार, वर्कशॉप आदि का आयोजन किया जा रहा है। वर्षों से पिछाड़ कर रखे जा रहे गुरुकुल शिक्षा प्रणाली व समाज को बचाने के लिए योजनाएं तैयार की जा रही है। गुरुकुल आचार्यों का दावा है कि गुरुकुल शिक्षा में ही जीवन के असली मायने हैं। जिसकी शिक्षा में ऐसी ताकत है जो विश्व की किसी भी ताकत का मुकाबला करने में सामथ्र्य है। गुरुकुल शिक्षा सम्पूर्ण मनोवैज्ञानिक व शास्त्रीय है।
गुरुकुल=गुरु+कुल:
भले ही परंपरा के अनुसार मां अपने बच्चे की प्रथम शिक्षक है और पिता दिव्तीय गुरु हैं, लेकिन संपूर्ण जीवन देने और मार्गदर्शन देने वाला असली गुरु शिक्षा पद्धति में शिक्षा देने वाला गुरु ही है, जो विद्यार्थियों को जीवन की कठिनाइयों से संघर्ष करने व जीवन की संपूर्ण जटिलताओं से मुक्त रहने की शिक्षा देता है। गुरुकुल का मतलब है जहां गुरु का कुल यानि गुरु का परिवार निवास करता हो। प्राचीन काल से शिक्षक को गुरु माना जाता है और शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों गुरु का परिवार माना जाता है। उसके यहां से ही पूर्ण माना जाता था।
शास्त्रों में श्रीगणेश के बाद पहली वंदना गुरु की:
सम्पूर्ण प्राचीन भारत के वांग्मय से लेकर अधुनातन तक हर व्यक्ति को गुरुकुल व्यवस्था के दिग्दर्शन होते हैं। गुरु की महत्ता को प्रतिपादित करने के लिए हर धर्म के शास्त्रों में गुरु की वंदना को महत्व दिया जाता है। हिंदु शास्त्रों में गुरु वंदना के लिए (गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर, गुरु साक्षात् परमं ब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नम:) का उच्चारण किया जाता है।   

अंग्रेजी हकूमत ने किया जबरदस्त पतन:
देश में अंग्रेजी शासक लॉर्ड मैकाले ने अपनी वैचारिकी परोसने आधुनिक शिक्षा के नाम पर काम किया। भारतीयों को अंग्रेज भक्त बाबू बना योजनाबद्ध गुरुकुलों का नाश किया। गुरुकुल शिक्षा पद्धति का मखौल उड़ाते हुए अंग्रेज परस्त और कम्युनिष्टों को आगे किया।
इस लिए की जा रही है गुरुकुलों की मांग:
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से विश्वविद्यालय व उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू की जा रही इस व्यवस्था के तहत छात्रों को उपलब्ध कराए जाने वाले शिक्षक परामर्शदाता को संरक्षक के तौर पर भी सक्रिय बने रहने का प्रशिक्षण दिया जाने वाला है। शिक्षक ना सिर्फ विद्यार्थियों की हरसंभव मदद के लिए तत्पर रहेगा, बल्कि अभिभावकों से भी विद्यार्थियों से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा भी करेंगे। गौरतलब हो कि वैदिक विश्वविद्यालयों और गुरुकुल ही एक मात्र ऐसे शिक्षण संस्थान आगे आएं हैं जिनके विद्यार्थी कभी स्ट्रेस में नहीं रहे और बाकी शिक्षण संस्थानों के मुकाबले कभी विद्यार्थियों ने आत्महत्याएं नहीं की हैं। जिसे देखकर बदलते वक्त में गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था की मांग की जा रही है।

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