ENGLISH HINDI Thursday, August 06, 2020
Follow us on
 
ताज़ा ख़बरें
नकली शराब: शामिल व्यक्तियों के विरुद्ध धारा 302 के अंतर्गत कत्ल केस दर्ज के आदेशवृद्ध महिला को घर से निकालने का मामला: महिला आयोग ने सीनियर पुलिस कप्तान खन्ना से माँगी रिपोर्ट5 सदियों बाद 5 अगस्त को अभिजित मुहूर्त में राम जन्म भूमि पूजन, राम राज्य की ओर अग्रसर भारतकोविड-19 के कारण गिरावट दर 9.26 प्रतिशत रहीपंजाब: मुख्य चुनाव अधिकारी द्वारा डिजिटल माध्यम से स्वीप गतिविधियों की शुरूआतश्री राम जन्मभूमि निर्माण की ख़ुशी में सैंकड़ों दिए जलाकर मनाई दीपावलीपेट्रोल— डीजल के थोक और खुदरा विपणन का अधिकार नियमों को बनाया सरलजनशिकायतों निपटारे के लिए आईआईटी कानपुर तथा प्रशासनिक सुधार और लोकशिकायत विभाग के साथ त्रिपक्षीय करार
राष्ट्रीय

भ्रामक प्रचार कूटनीति तथा मजबूत नेतृत्व का विकल्प नहीं: मनमोहन

June 22, 2020 04:20 PM

नई दिल्ली, फेस2न्यूज:
15-16 जून को गलवान घाटी, लद्दाख में भारत के बीस साहसी जवानों ने सर्वोच्च कुर्बानी दी। इन बहादुर सैनिकों ने साहस के साथ अपना कर्तव्य निभाते हुए देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। देश के इन सपूतों ने अपनी अंतिम सांस तक मातृभूमि की रक्षा की। इस सर्वोच्च त्याग के लिए हम इन साहसी सैनिकों व उनके परिवारों के कृतज्ञ हैं। लेकिन उनका यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए।

हम प्रधानमंत्री व केंद्र सरकार से आग्रह करते हैं कि वो वक्त की चुनौतियों का सामना करें, और कर्नल बी. संतोष बाबू व हमारे सैनिकों की कुर्बानी की कसौटी पर खरा उतरें, जिन्होंने ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ व ‘भूभागीय अखंडता’ के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। इससे कुछ भी कम जनादेश से ऐतिहासिक विश्वासघात होगा।

 
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का बयान कि आज हम इतिहास के एक नाजुक मोड़ पर खड़े हैं। हमारी सरकार के निर्णय व सरकार द्वारा उठाए गए कदम तय करेंगे कि भविष्य की पीढ़ियां हमारा आंकलन कैसे करें। जो देश का नेतृत्व कर रहे हैं, उनके कंधों पर कर्तव्य का गहन दायित्व है। हमारे प्रजातंत्र में यह दायित्व देश के प्रधानमंत्री का है। प्रधानमंत्री को अपने शब्दों व ऐलानों द्वारा देश की सुरक्षा एवं सामरिक व भूभागीय हितों पर पड़ने वाले प्रभाव के प्रति सदैव बेहद सावधान होना चाहिए।
चीन ने अप्रैल, 2020 से लेकर आज तक भारतीय सीमा में गलवान वैली एवं पांगोंग त्सो लेक में अनेकों बार जबरन घुसपैठ की है। हम न तो उनकी धमकियों व दबाव के सामने झुकेंगे और न ही अपनी भूभागीय अखंडता से कोई समझौता स्वीकार करेंगे। प्रधानमंत्री को अपने बयान से उनके षडयंत्रकारी रुख को बल नहीं देना चाहिए तथा यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकार के सभी अंग इस खतरे का सामना करने व स्थिति को और ज्यादा गंभीर होने से रोकने के लिए परस्पर सहमति से काम करें।
यही समय है जब पूरे राष्ट्र को एकजुट होना है तथा संगठित होकर इस दुस्साहस का जवाब देना है।
हम सरकार को आगाह करेंगे कि भ्रामक प्रचार कभी भी कूटनीति तथा मजबूत नेतृत्व का विकल्प नहीं हो सकता। पिछलग्गू सहयोगियों द्वारा प्रचारित झूठ के आडंबर से सच्चाई को नहीं दबाया जा सकता।
हम प्रधानमंत्री व केंद्र सरकार से आग्रह करते हैं कि वो वक्त की चुनौतियों का सामना करें, और कर्नल बी. संतोष बाबू व हमारे सैनिकों की कुर्बानी की कसौटी पर खरा उतरें, जिन्होंने ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ व ‘भूभागीय अखंडता’ के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। इससे कुछ भी कम जनादेश से ऐतिहासिक विश्वासघात होगा।

 
कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें
 
और राष्ट्रीय ख़बरें
पेट्रोल— डीजल के थोक और खुदरा विपणन का अधिकार नियमों को बनाया सरल जनशिकायतों निपटारे के लिए आईआईटी कानपुर तथा प्रशासनिक सुधार और लोकशिकायत विभाग के साथ त्रिपक्षीय करार रूड़की में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाए जाने के संबंध में बैठक, 05 सितम्बर तक बिड प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश एम्स ऋषिकेश में 5 लोगों की रिपोर्ट कोविड पाॅजिटिव इलेक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क ने कोविड दौरान आवश्यक प्रतिरक्षण सेवाएं सुनिश्चित की प्रधानमंत्री श्री मोदी और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति में टेलीफोन पर हुई बातचीत खेल फिजियोथेरेपी और खेल न्यूट्रीशन में पाठ्यक्रम शुरू कश्मीर घाटी में प्रतिबंध लागू, बाजार बंद राम रहीम के लिए जेल में आईं 650 राखी आदिवासी दिवस के बहाने अलगाववाद की राजनीति