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राष्ट्रीय

केरल व हिमाचल दो राज्यों में बहुत सी साझी बातें: डॉ. चौहान

July 01, 2020 09:43 AM

चण्डीगढ़, फेस2न्यूज:
भारत सरकार की विलक्ष्ण पहल ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का उद्देश्य दूर-दराज़ के लोगों को आपस में जोड़ कर वर्तमान समयों में राष्ट्रीय एकता की भावना को पुन-जागृत करना है। भारत सरकार के सूचना व प्रसारण मंत्रालय के चण्डीगढ़ स्थित क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा आयोजित ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ विषय पर एक वेबिनार के दौरान सभी भागीदारों को संबोधन करते हुए श्रीमति देवप्रीत सिंह, अपर महानिदेशक (उत्तर क्षेत्र), सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने कहा कि विभिन्नता से भरपूर विशाल सामाजिक पैनोरमे में भी भारत संपूर्ण देश में विद्यमान एक ऐसे धागे से परस्पर इतनी मज़बूती से जुड़ा हुआ है कि जिससे एक संगठित राष्ट्रीय पहचान बनती है।
‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ (ईबीएसबी) भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसके दौरान विभिन्न राज्यों के लोगों के मध्य परस्पर बातचीत व आपसी आदान-प्रदान के द्वारा भारत के विचार तथा उसकी सांस्कृतिक विभिन्नता के जश्न मनाए जाते हैं। इस पहल के भाग के तौर पर, ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के अंतर्गत दो जोड़े राज्यों हिमाचल प्रदेश व केरल की समृद्ध संस्कृति व विरास्त साझी करने पर ध्यान केन्द्रित करने के उद्देश्य से एक वेबिनार आज आयोजित किया गया था।
हिमाचल प्रदेश सरकार के सांस्कृतिम मामलों संबंधी विशेषज्ञ समिति के सदस्य सुश्री शैलजा खन्ना, जो विषय के विशेषज्ञों में से एक थे, ने सत्र के दौरान हिमाचल प्रदेश के लोक-संगीत के समृद्ध इतिहास, इससे जुड़े वाद्य यंत्रों व उनकी विलक्ष्णता पर बल दिया। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के सादा, ख़ुशनुमा एवं संगीतमय नाती नृत्य की बात करते हुए कहा कि इस राज्य के प्राकृतिक सौंदर्य ने कला, कारीगरी, संगीत व नृत्य को प्रेरित किया।

हिमाचल प्रदेश सरकार के भूतपूर्व सचिव, भाषा कला व संस्कृति डॉ. पूर्णिमा चौहान ने दोनों राज्यों की साझी बातों पर बल दिया। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों में अत्यधिक प्राकृतिक सौंदर्य है तथा ये दोनों भारतीय उप-महाद्वीप के दो छोरों पर स्थित हैं तथा इन राज्यों ने मानव विकास के सूचक अंकों पर बहुत बढ़िया ढंग से कार्य किया है। हिमाचल प्रदेश के विभिन्न सांस्कृतिक पक्षों की व्याख्या करते हुए उन्होंने ने यहां विद्यमान बौद्ध कनैक्शन व यहां के औपनिवेशक अतीत की बात की। उन्होंने कहा कि स्पिति में टैबो मठ को पहाड़ों का ‘अजन्ता’ माना जाता है, जबकि कांगड़ा में पहाड़ की चट्टान को काट कर बनाया गया मसरूर मन्दिर पहाड़ों का ‘ऐलोरा’ कहलाता है। उन्होने हिमाचल प्रदेश राज्य की विभिन्न पहाड़ी चित्रकला शैलियों जैसे कि कांगड़ा पेंटिंग्स व थांग्का पेंटिंग्स का वर्णन भी किया।

केरल के अकादमीशियन, अनुसंधानकर्ता व शास्त्रीय नृत्यांगना डॉ. नीना प्रसाद ने केरल की विभिन्न पर्दशन कला परंपराओं; जैसे कि केरल की प्राचीन संस्कृत रंगमंच कला - ‘कुटीयत्तम’ एवं केरल के एक शास्त्रीय नृत्य - ‘मोहिनीयत्तम’ के विवरण विस्तारपूर्वक बताए। उन्होंने केरल की समृद्ध संस्कृति संबंधी आगे बताया कि अरबों, पुर्तगालियों, डच लोगों से केरल का ऐतिहासिक संबंध रहा है, जिस ने साझे मल्याली संस्कृति को विकसित करने में सहायता की।
उन्होंने यह भी कहा कि केरल मन्दिरों की धरती है तथा प्रत्येक मन्दिर में त्यौहार एक विभिन्न ढंग से मनाए जाते हैं। फ़सलों की कटाई के समय का त्योहार ‘ओणम’ राज्य में सर्वाधिक लोकप्रिय त्योहार है तथा समाज के सभी वर्गों के लोग हर्षोल्लास एवं अत्यंत उत्साहपूर्वक इसे मनाते हैं। उन्होंने केरल के दीवार-चित्रों, मार्शल-आर्ट के प्रकार - कलरीपायातू एवं केरल के व्यंजनों की बात भी की।
श्री एस. वैंक्टेशवर, महानिदेशक, दक्षिण ज़ोन, सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने कहा कि जोड़े गए राज्यों के लोगों को एक-दूसरे से प्रायः मिलते रहना चाहिए व सांस्कृतिक विभिन्नता संबंधी जानकारी लेनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि जोड़े राज्यों के विद्यार्थियों के लाभ हेतु आदान-प्रदान कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।
इस वेबिनार में जी.डी. गोयनिका वर्ल्ड स्कूल, हरियाणा के विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यार्थियों ने इस सत्र व अतिथि वक्ताओं की विज़्युल प्रस्तुति की सराहना करते हुए इसे अत्यंत जानकारी भरपूर व शिक्षादायक बताया।
श्री आशीष गोयल, निदेशक, रीजनल आऊटरीच ब्यूरो (आरओबी - ROB) चण्डीगढ़ ने इस सत्र का समापन करते हुए सभी भागीदारों का आभार व्यक्त किया। श्री अनुज चांडक, उप-निदेशक, आरओबी चण्डीगढ़ व इस क्षेत्र के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अन्य अधिकारियों ने इस वेबिनार में भाग लिया।


 
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