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पंजाब

शिरोमणि कमेटी के फ़ैसले से पंजाब के 3.5 लाख दूध उत्पादकों के पेट पर पड़ी लात: रंधावा

July 09, 2020 02:34 PM

चंडीगढ़, फेस2न्यूज:
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की तरफ से लंगर और कड़ाह प्रसाद के लिए देसी घी और सूखे दूध की सप्लाई मिल्कफैड को छोडक़र पूने की अनजान प्राईवेट कंपनी सोनाई डेयरी को देने के मामले पर शिरोमणि कमेटी के प्रधान भाई गोबिन्द सिंह लोंगोवाल को पत्र लिखकर कहा है कि इस फ़ैसले से पंजाब के करीब 3.5 लाख दूध उत्पादकों के पेट पर लात पड़ी है। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि इन दूध उत्पादकों में से 99 प्रतिशत सिख हैं जबकि शिरोमणि कमेटी सिखों की एकमात्र नुमायंदा जत्थेबंदी है जिससे ऐसे फ़ैसले की आशा भी नहीं की जा सकती थी। नये समझौते के अंतर्गत प्राईवेट कंपनी को करीब 60 करोड़ रुपए के मूल्य के देसी घी और सूखे दूध की सप्लाई का ऑर्डर मिल गया है जो कई दशकों से पंजाब मिल्कफैड के पास था। उन्होंने भाई लोंगोवाल को इस फ़ैसले पर फिर से विचार करने की अपील की है।
रंधावा ने अपने पत्र में लिखा, ‘‘प्रधान साहिब, मिल्कफैड पंजाब का वह सहकारी संस्थान है जिसका मकसद मुनाफ़ाख़ोरी न होकर राज्य के दूध उत्पादकों को दूध का सही दाम देना और अपने उपभोक्ताओं को उच्च मानक का दूध, घी, पनीर और दूध से बनीं अन्य वस्तुएँ मुहैया करवाना है। दशकों से मिल्कफैड का ब्रांड वेरका अपने उच्च मानक के लिए न सिफऱ् पंजाब बल्कि पूरे मुल्क में जाना जाता है। दशकों से यह संस्थान शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी को सूखा दूध, देसी घी और पनीर मुहैया करवाता आ रहा है। आज तक मानक या समय पर स्पलाई के पक्ष से एक भी शिकायत नहीं आई। दूसरी तरफ़, पूने की जिस निजी कंपनी ‘सोनाई डेयरी’ को करीब 60 करोड़ के सूखे दूध और देसी घी की सप्लाई का ऑर्डर दिया गया है उसका आज तक किसी ने नाम भी नहीं सुना।’’
स. रंधावा ने कहा कि पूने की कंपनी का एकमात्र मकसद लाभ कमाना है। इस कंपनी ने जिस रेट पर देसी घी सप्लाई करने का समझौता किया है, उस रेट पर कोई भी संस्थान उच्च मानक का देसी घी और सूखा दूध मुहैया नहीं कर सकता जिससे स्पष्ट है कि मानक के साथ समझौता होगा। घटिया मानक के देसी घी और सूखे दूध की स्पलाई से लाखों श्रद्धालुओं की श्रद्धा के साथ खिलवाड़ होगा। यह फ़ैसला उन लाखों प्राणीयों की सेहत के साथ भी खीलवाड़ सिद्ध होगा जो श्री दरबार साहिब में धन श्री गुरु रामदास लंगर और दूसरे ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिबान के लंगरों में प्रसाद ग्रहण करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि मिल्कफैड ने कभी भी मानकों के साथ समझौता नहीं किया। अगर मिल्कफैड दूध के खऱीद रेट घटाएगा तो निजी मिल्क प्लांट और दूधवाले भी साथ के साथ रेट घटा देंगे और पंजाब के दूध उत्पादकों का धंधा चौपट हो जायेगा।
सहकारिता मंत्री ने अपने पत्र में लिखा, ‘‘प्रधान साहिब, पंजाब के दूध उत्पादक वही किसान हैं जो हर साल श्री दरबार साहिब और अन्य गुरुद्वारा साहिबान के लंगरों के लिए लाखों टन गेहूँ, चावल और दालें दान के तौर पर देते हैं जिससे गुरूद्वारा साहिबान के लंगर निरंतर चलते रहें पर शिरोमणि कमेटी ने एक बार भी यह नहीं सोचा कि मिल्कफैड से 60 करोड़ का ऑर्डर छीनकर किसी निजी कंपनी को देने से पंजाब के इन दूध उत्पादकों के पेट पर ही लात पड़ेगी।’’
स. रंधावा ने भाई लोंगोवाल को शिरोमणि कमेटी के रह चुके प्रधान पंथ रत्न जत्थेदार गुरचरण सिंह टौहड़ा की याद दिलाते हुए कहा कि वह कहते थे कि शिरोमणि कमेटी कोई व्यापारिक संस्थान नहीं है, जो अपना हर फ़ैसला करते समय पैसे के नफ़े-नुक्सान को सामने रखे। हर फ़ैसले के पीछे सिख पंथ के नफ़े-नुक्सान को सामने रखा जाना चाहिए। जत्थेदार टौहड़ा पूछा करते थे कि क्या शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अपने किसी गुरुद्वारा साहिब की दुकान सिख साहित्य और ककार बेचने वाले की जगह उससे दस गुणा अधिक किराया देने वाले किसी नास्तिक या बज़ारू किस्म का साहित्य बेचने वाले व्यक्ति को दे सकती है। हरगिज़ नहीं। उन्होंने कहा कि शिरोमणि कमेटी द्वारा सिख दूध उत्पादकों के संस्थान को छोडक़र किसी निजी कंपनी को 60 करोड़ का आर्डर देने का मामला भी इसी तरह का ही है। यह फ़ैसला सिख पंथ के हितों के विरुद्ध है। इससे पंजाब के दूध उत्पादकों के हितों का भी नुक्सान होगा और श्रद्धालुओं की श्रद्धा और स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ होगा।

 
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